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नालंदा स्कूल में मिड-डे मील से ~60 छात्र बीमार, NHRC ने बिहार सरकार से रिपोर्ट तलब की

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नालंदा स्कूल में मिड-डे मील से ~60 छात्र बीमार, NHRC ने बिहार सरकार से रिपोर्ट तलब की

सारांश

नालंदा के सरकारी स्कूल में 21 मई को मिड-डे मील खाने के बाद ~60 बच्चे बीमार पड़े — यह बिहार में इस साल की तीसरी बड़ी ऐसी घटना है। NHRC ने स्वतः संज्ञान लेकर राज्य सरकार से जवाब माँगा है, जो मध्याह्न भोजन योजना की निगरानी व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

NHRC ने बिहार के नालंदा जिले के सरकारी स्कूल में मिड-डे मील से बीमार पड़ने की घटना पर स्वतः संज्ञान लिया।
21 मई को लगभग 60 छात्रों ने भोजन के बाद उल्टी, पेट दर्द, मतली और दस्त की शिकायत की; सभी की हालत अब स्थिर बताई गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, शिक्षकों ने भोजन परोसने से पहले उसे नहीं चखा — एक शिक्षक ने बाद में भोजन किया और वह भी बीमार पड़ गए।
फरवरी 2025 में नालंदा के हरनौत ब्लॉक में 60 छात्र और इसी वर्ष मई में सहरसा में 250 से अधिक बच्चे मिड-डे मील के बाद बीमार पड़े थे।
NHRC ने बिहार सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है; जाँच जारी है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बिहार के नालंदा जिले के एक सरकारी स्कूल में 21 मई को मध्याह्न भोजन करने के बाद लगभग 60 छात्रों के बीमार पड़ने की मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। प्रभावित बच्चों ने उल्टी, पेट दर्द, मतली और दस्त की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें पास के अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा।

मुख्य घटनाक्रम

रिपोर्टों के अनुसार, 21 मई को नालंदा के उक्त सरकारी स्कूल में शिक्षकों द्वारा भोजन को पहले चखे बिना ही छात्रों को परोसा गया। भोजन ग्रहण करने के कुछ ही देर बाद बड़ी संख्या में बच्चे अस्वस्थ हो गए। बाद में एक शिक्षक ने भी वही भोजन किया और वह भी बीमार पड़ गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि सभी प्रभावित छात्रों की हालत अब स्थिर है और संदिग्ध भोजन के नमूने जाँच के लिए भेजे गए हैं।

NHRC की कार्रवाई

NHRC को मानवाधिकार उल्लंघन की औपचारिक शिकायत प्राप्त किए बिना भी मीडिया रिपोर्टों, सार्वजनिक जानकारी या अन्य स्रोतों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार है। आयोग ने इस मामले में यही शक्ति प्रयोग करते हुए बिहार सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिसमें खाद्य सुरक्षा उपायों और जाँच की स्थिति पर स्पष्टीकरण माँगा गया है।

बिहार में मध्याह्न भोजन: बार-बार उठते सवाल

यह घटना अकेली नहीं है। फरवरी 2025 में नालंदा के हरनौत ब्लॉक स्थित श्री चांदपुर प्राथमिक विद्यालय में कम से कम 60 छात्र दोपहर के भोजन के बाद बीमार पड़े थे और उन्होंने पेट दर्द व उल्टी की शिकायत की थी। इसी वर्ष मई में सहरसा जिले के एक सरकारी स्कूल में मध्याह्न भोजन के बाद 250 से अधिक बच्चे बीमार पड़ गए — उन्हें पेट दर्द, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत हुई और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराना पड़ा। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में मध्याह्न भोजन योजना की गुणवत्ता और निगरानी पहले से ही सवालों के घेरे में है।

खाद्य सुरक्षा पर व्यापक चिंता

आलोचकों का कहना है कि भोजन परोसने से पहले शिक्षकों द्वारा उसे चखने की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन न होना प्रशासनिक लापरवाही का संकेत है। गौरतलब है कि मध्याह्न भोजन योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख पोषण पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। बार-बार सामने आने वाली ऐसी घटनाएँ योजना की ज़मीनी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

आगे क्या होगा

NHRC की रिपोर्ट माँग के बाद अब बिहार सरकार को निर्धारित समयसीमा में जवाब देना होगा। जाँच के नतीजे और आयोग की अगली कार्रवाई यह तय करेगी कि दोषियों के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक स्कूल स्तर पर खाद्य सुरक्षा की नियमित और स्वतंत्र जाँच नहीं होती, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना कठिन होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार जाँच की घोषणा होती है, पर व्यवस्थागत बदलाव नहीं दिखता। NHRC का स्वतः संज्ञान महत्वपूर्ण है, लेकिन असली सवाल यह है कि भोजन चखने जैसी बुनियादी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं होता। जब तक स्कूल स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती और खाद्य सुरक्षा की स्वतंत्र निगरानी नहीं होती, तब तक ये घटनाएँ दोहराती रहेंगी और बच्चों का स्वास्थ्य दाँव पर लगा रहेगा।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नालंदा स्कूल में मिड-डे मील से कितने छात्र बीमार पड़े और कब?
21 मई को नालंदा जिले के एक सरकारी स्कूल में दोपहर का भोजन करने के बाद लगभग 60 छात्र बीमार पड़े। उन्होंने उल्टी, पेट दर्द, मतली और दस्त की शिकायत की और उन्हें पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
NHRC ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए बिहार सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। NHRC को बिना औपचारिक शिकायत के भी ऐसे मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार है।
क्या बिहार में पहले भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं?
हाँ, फरवरी 2025 में नालंदा के हरनौत ब्लॉक स्थित श्री चांदपुर प्राथमिक विद्यालय में 60 छात्र और इसी वर्ष मई में सहरसा जिले के एक सरकारी स्कूल में 250 से अधिक बच्चे मिड-डे मील के बाद बीमार पड़ चुके हैं।
मिड-डे मील में खाद्य सुरक्षा की चूक कहाँ हुई?
रिपोर्टों के अनुसार, शिक्षकों ने अनिवार्य प्रक्रिया के तहत भोजन परोसने से पहले उसे नहीं चखा। एक शिक्षक ने बाद में वही भोजन किया और वह भी बीमार पड़ गए, जिससे भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठे।
मध्याह्न भोजन योजना क्या है और यह किसके लिए है?
मध्याह्न भोजन योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख पोषण पहल है, जिसके तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चों को प्रतिदिन पका हुआ पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य बच्चों की उपस्थिति बढ़ाना और कुपोषण दूर करना है।
राष्ट्र प्रेस
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