शिमला नर्सिंग कॉलेज में 19 छात्राओं को टीबी: एनएचआरसी ने हिमाचल सरकार से 2 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने शिमला के एक नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल में 19 महिला छात्राओं के टीबी (तपेदिक) से संक्रमित होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने 7 मई 2026 को यह जानकारी देते हुए दो हफ्तों के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
2 मई 2026 को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए एनएचआरसी ने यह कदम उठाया। उक्त रिपोर्ट में 31 मार्च और 17 अप्रैल को संस्थान में हुए दो निरीक्षणों के आधार पर हॉस्टल प्रबंधन की कई गंभीर कमियों को उजागर किया गया था। आरोप लगाया गया कि निरीक्षणों में खामियाँ सामने आने के बावजूद अधिकारियों ने कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया, जिसके परिणामस्वरूप छात्राएँ टीबी की चपेट में आ गईं।
हॉस्टल की अमानवीय स्थितियाँ
एनएचआरसी के बयान के अनुसार, हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को भीड़भाड़ वाली, सीलन भरी और अस्वच्छ परिस्थितियों में रहने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जहाँ साफ-सफाई की व्यवस्था बेहद अपर्याप्त है। भोजन की गुणवत्ता भी खराब बताई गई है और उसमें बुनियादी पोषण तत्वों की कमी है। कथित तौर पर बीमार होने पर भी छात्राओं को आराम करने की अनुमति नहीं दी जाती और छुट्टियों के दिनों में भी उन्हें 'अस्पताल के कर्मचारियों' के रूप में काम करने के लिए बाध्य किया जाता है।
मानवाधिकार उल्लंघन की आशंका
आयोग ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट में कही गई बातें सच हैं, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक अत्यंत गंभीर मामला है। गौरतलब है कि नर्सिंग छात्राएँ भावी स्वास्थ्यकर्मी हैं, और यदि उनके प्रशिक्षण संस्थान में ही स्वास्थ्य व स्वच्छता के बुनियादी मानक नहीं हैं, तो यह व्यापक स्वास्थ्य तंत्र के लिए भी चिंता का विषय है।
झारखंड रिमांड होम में मौत का मामला भी उठाया
एनएचआरसी ने एक अलग मामले में झारखंड सरकार के मुख्य सचिव और देवघर के पुलिस अधीक्षक को भी नोटिस जारी किया है। यह नोटिस देवघर जिले के चरकी पहाड़ी इलाके स्थित एक रिमांड होम में रह रही 19 वर्षीय महिला कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के संबंध में है। 4 मई को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे देवघर सदर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। आयोग ने इस मामले में भी दो हफ्तों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट माँगी है।
रिमांड होम में मौतों की बढ़ती संख्या पर सवाल
एक बयान में कथित तौर पर कहा गया है कि 1 जनवरी 2026 से अब तक इस रिमांड होम के 5 कैदियों की मौत हो चुकी है, जिससे वहाँ की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृत महिला कैदी की मौत का सही कारण अधिकारियों के अनुसार अभी तक स्थापित नहीं हो पाया है। दोनों मामलों में आयोग की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि सरकारी संस्थानों में कमज़ोर वर्गों की सुरक्षा को लेकर निगरानी तंत्र और अधिक सक्रिय होने की ज़रूरत है।