कोयंबटूर के सरकारी स्कूल में मिड-डे मील से 43 बच्चे बीमार, छिपकली से हुआ फूड पॉइजनिंग
सारांश
Key Takeaways
- कोयंबटूर में 43 बच्चे मिड-डे मील खाने के बाद बीमार पड़े।
- भोजन में छिपकली गिरने से फूड पॉइजनिंग का मामला।
- बच्चों का इलाज डॉक्टरों की टीम द्वारा किया जा रहा है।
- स्कूल प्रशासन और नगर निगम की जांच जारी है।
- भविष्य में सुरक्षित भोजन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश।
कोयंबटूर, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के एक सरकारी विद्यालय में मिड-डे मील खाने के बाद फूड पॉइजनिंग का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। भोजन के उपरांत लगभग 43 छात्रों की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके कारण उन्हें तुरंत सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जानकारी के अनुसार, प्रभावित छात्रों में 30 लड़के और 13 लड़कियां शामिल हैं। सभी बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और घबराहट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। स्कूल प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को तुरंत सूचित किया और सभी छात्रों को एंबुलेंस और अन्य वाहनों के माध्यम से नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया। इस घटना ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है, और बच्चों के अभिभावक बेहद चिंतित हैं।
कोयंबटूर सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (सीसीएमसी) के कमिश्नर एम शिवगुरु प्रभाकरन ने मीडिया को बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बच्चों को परोसे गए भोजन में छिपकली
अस्पताल में भर्ती सभी छात्रों का इलाज एक विशेष डॉक्टरों की टीम द्वारा किया जा रहा है। पांच डॉक्टरों की टीम बच्चों के स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखे हुए है। सभी बच्चों को फिलहाल मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक बच्चे पूर्णतः स्वस्थ नहीं हो जाते, उनकी निगरानी जारी रहेगी। वर्तमान में सभी छात्रों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है और किसी की हालत गंभीर नहीं है।
घटना के उपरांत स्कूल प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। स्कूल के किचन और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया का निरीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी स्कूलों को सुरक्षित भोजन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएंगे। इस बीच अस्पताल के बाहर बच्चों के अभिभावकों की भीड़ लगी हुई है, जो अपने बच्चों की सेहत को लेकर चिंतित हैं। यह घटना स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठाती है।