8 जुलाई 2026
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कलकत्ता हाई कोर्ट का बंगाल सरकार को निर्देश: इस्कॉन मिड-डे मील प्रस्ताव पर 4 हफ्ते में दाखिल करें हलफनामा

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कलकत्ता हाई कोर्ट का बंगाल सरकार को निर्देश: इस्कॉन मिड-डे मील प्रस्ताव पर 4 हफ्ते में दाखिल करें हलफनामा

सारांश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूछा है कि KMC स्कूलों में मिड-डे मील इस्कॉन को सौंपने का प्रस्ताव कहाँ तक पहुँचा। अदालत ने 4 हफ्ते में हलफनामा माँगा। याचिका में अंडे न मिलने से पोषण की कमी और महिला कर्मचारियों की नौकरी जाने की चिंता जताई गई है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 8 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार को 4 सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
मामला KMC क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंपने के प्रस्ताव से जुड़ा है।
राज्य के महाधिवक्ता सूरजित नाथ मित्रा ने अदालत को बताया कि अभी तक कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
याचिकाकर्ता को सरकारी हलफनामे के 2 सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
PIL में चिंता जताई गई है कि इस्कॉन के भोजन में अंडे नहीं होंगे और मौजूदा महिला कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है।
अदालत ने याचिका को फिलहाल समय से पहले दायर बताया, क्योंकि कोई आधिकारिक अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 8 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह कोलकाता नगर निगम (KMC) क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) की जिम्मेदारी इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) को सौंपने के प्रस्ताव की मौजूदा स्थिति पर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से अदालत के सामने आया है, जिसमें इस प्रस्ताव को छात्रों के पोषण और महिला कर्मचारियों की आजीविका के लिए हानिकारक बताया गया है।

खंडपीठ ने की सुनवाई

इस जनहित याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रता चक्रबर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी चटर्जी की खंडपीठ ने सुनवाई की। अदालत ने राज्य सरकार से सीधे पूछा कि इस्कॉन को मिड-डे मील सौंपने के प्रस्ताव की अद्यतन स्थिति क्या है।

इसके जवाब में राज्य के महाधिवक्ता सूरजित नाथ मित्रा ने स्पष्ट किया कि यह मामला अभी केवल प्रस्ताव के स्तर पर है और अब तक कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

अदालत के निर्देश

खंडपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश दिया। साथ ही याचिकाकर्ता को निर्देश दिया गया कि सरकारी हलफनामा दाखिल होने के दो सप्ताह के भीतर वे अपना जवाबी हलफनामा पेश करें।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि चूँकि राज्य सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है, इसलिए यह याचिका फिलहाल समय से पहले दायर प्रतीत होती है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में सरकार औपचारिक अधिसूचना जारी करती है, तो याचिकाकर्ता पुनः अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

याचिका में उठाई गई चिंताएँ

जनहित याचिका में तर्क दिया गया है कि यदि मिड-डे मील की जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंपी जाती है, तो भोजन में अंडे नहीं परोसे जाएंगे, जिससे छात्रों को प्रोटीन युक्त आहार से वंचित होना पड़ सकता है। यह ऐसे समय में उठाई गई चिंता है जब देश में बच्चों में कुपोषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बना हुआ है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस बदलाव से वर्तमान में मिड-डे मील तैयार करने वाली बड़ी संख्या में महिला कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। गौरतलब है कि मध्याह्न भोजन कार्यक्रम न केवल बच्चों की पोषण जरूरतें पूरी करता है, बल्कि ग्रामीण और शहरी गरीब महिलाओं के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है।

इस्कॉन और मिड-डे मील: पृष्ठभूमि

इस्कॉन का 'अक्षय पात्र' कार्यक्रम पहले से ही कई राज्यों में लाखों बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराता है। हालाँकि, इस कार्यक्रम पर अंडे न परोसे जाने को लेकर पहले भी विभिन्न राज्यों में विवाद उठ चुके हैं। पश्चिम बंगाल में यह प्रस्ताव उसी बहस को नए सिरे से जीवित करता है।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें पश्चिम बंगाल सरकार के उस हलफनामे पर होंगी, जिसे चार सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाना है। इस हलफनामे से स्पष्ट होगा कि सरकार इस्कॉन को मिड-डे मील की जिम्मेदारी सौंपने के प्रस्ताव पर आगे बढ़ने का इरादा रखती है या नहीं। अदालत की अगली सुनवाई में इस मुद्दे पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में पहले भी उठ चुका है — पश्चिम बंगाल इस सूची में नया नाम होगा। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार पोषण मानकों और रोजगार सुरक्षा को प्राथमिकता देगी, या प्रशासनिक सुविधा के नाम पर एक केंद्रीकृत आपूर्तिकर्ता को तरजीह दी जाएगी। अदालत का 'समय से पहले' वाली टिप्पणी यह भी संकेत देती है कि सरकार ने इस संवेदनशील प्रस्ताव को बिना पर्याप्त सार्वजनिक परामर्श के आगे बढ़ाया।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस्कॉन मिड-डे मील मामले में क्या आदेश दिया?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को 4 सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें KMC क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंपने के प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए। याचिकाकर्ता को भी 2 सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा देने को कहा गया है।
इस्कॉन को मिड-डे मील सौंपने के प्रस्ताव पर आपत्ति क्यों है?
जनहित याचिका में दो मुख्य आपत्तियाँ उठाई गई हैं — पहली, इस्कॉन के भोजन में अंडे नहीं परोसे जाएंगे जिससे छात्रों को प्रोटीन युक्त आहार नहीं मिलेगा; दूसरी, वर्तमान में मिड-डे मील बनाने वाली बड़ी संख्या में महिला कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है।
क्या पश्चिम बंगाल सरकार ने इस्कॉन को मिड-डे मील देने की अधिसूचना जारी कर दी है?
नहीं। राज्य के महाधिवक्ता सूरजित नाथ मित्रा ने अदालत को बताया कि यह मामला अभी केवल प्रस्ताव के स्तर पर है और कोई औपचारिक अधिसूचना अब तक जारी नहीं की गई है। अदालत ने भी इसी आधार पर याचिका को फिलहाल समय से पहले दायर बताया।
इस मामले में किस खंडपीठ ने सुनवाई की?
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रता चक्रबर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी चटर्जी की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर 8 जुलाई को सुनवाई की।
अगर भविष्य में अधिसूचना जारी होती है तो याचिकाकर्ता क्या कर सकते हैं?
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि पश्चिम बंगाल सरकार भविष्य में इस्कॉन को मिड-डे मील सौंपने की औपचारिक अधिसूचना जारी करती है, तो याचिकाकर्ता पुनः अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं और उस समय याचिका सुनवाई योग्य होगी।
राष्ट्र प्रेस
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