अभिषेक बनर्जी को KMC नोटिस: 17 संपत्तियों पर जवाब के लिए मिले 10 दिन, पुलिस ने भी दिया दबी जुबान दौरा
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता नगर निगम (KMC) ने सोमवार, 25 मई को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को 17 संपत्तियों से संबंधित नोटिसों का जवाब देने के लिए 10 दिन का अतिरिक्त समय प्रदान किया। इससे पहले जवाब दाखिल करने की अंतिम सीमा सोमवार मध्यरात्रि तय थी, लेकिन बनर्जी के वकील द्वारा अतिरिक्त समय की माँग किए जाने के बाद निगम ने यह राहत दी।
नोटिस की पृष्ठभूमि
अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं। KMC ने हाल ही में उन्हें नोटिस जारी किए थे और दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर स्थित हरिश मुखर्जी रोड पर उनके आवास की दीवार पर भी नोटिस चस्पा किया गया था। इन नोटिसों में यह जानकारी माँगी गई थी कि क्या उनकी संपत्तियों पर किसी अतिरिक्त निर्माण के लिए नगर निगम से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।
वकील की अपील और निगम का फैसला
रविवार को जानकारी सामने आई कि अभिषेक बनर्जी के वकील ने KMC को पत्र भेजकर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की माँग की थी। इसके बाद सोमवार को निगम अधिकारियों ने 10 दिन का अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया। KMC ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कार्रवाई से पहले इन सवालों का जवाब प्राप्त करना आवश्यक है।
पुलिस का अचानक दौरा
इसी बीच, सोमवार दोपहर कोलकाता पुलिस के सादे कपड़ों में कुछ अधिकारी अचानक हरिश मुखर्जी रोड स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास 'शांतिनिकेतन' पहुँचे। इस दौरे के बारे में मीडिया को कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई। पुलिसकर्मी कुछ समय तक घर के भीतर रहे और बाहर निकलते समय एक मॉनिटर अपने साथ ले जाते दिखाई दिए, जिसे बाद में 'कोलकाता पुलिस' स्टीकर लगी सफेद गाड़ी में रखा गया।
संपत्ति और कंपनी का संबंध
पुलिस टीम के जाने के बाद घर के गैरेज से एक कार भी बाहर निकली। बताया जा रहा है कि वह कार बनर्जी परिवार के कुछ सदस्यों की एक कंपनी के नाम पर पंजीकृत है। 'शांतिनिकेतन' नामक यह आवास भी उसी कंपनी के नाम पर नगर निगम में दर्ज है — एक तथ्य जो नोटिस प्रकरण के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में अटकलें
पुलिस के इस अघोषित दौरे को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। शहर पुलिस के एक अधिकारी ने कथित तौर पर मामले की जानकारी होने से इनकार किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई जाँच एजेंसियों के रडार पर हैं। अब सभी की नज़रें इस बात पर हैं कि 10 दिन के भीतर वे नगर निगम के नोटिसों का क्या जवाब देते हैं और आगे क्या कार्रवाई होती है।