अभिषेक बनर्जी की 17 संपत्तियों को KMC नोटिस पर मेयर फिरहाद हकीम बोले — 'मुझे कोई जानकारी नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता नगर निगम (KMC) द्वारा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के कथित स्वामित्व या सह-स्वामित्व वाली 17 संपत्तियों को नोटिस जारी किए जाने की खबरों के बीच, KMC के मेयर फिरहाद हकीम ने बुधवार, 20 मई को इस पूरे घटनाक्रम से अनजान होने का दावा किया। हकीम, जो तृणमूल कांग्रेस के चार बार के विधायक और पश्चिम बंगाल कैबिनेट में पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं, ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि ऐसे फैसलों में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
नोटिस का आधार क्या है
रिपोर्टों के अनुसार, KMC ने KMC अधिनियम, 1980 की धारा 400(1) के तहत अभिषेक बनर्जी से जुड़ी 17 संपत्तियों को नोटिस भेजे हैं। यह धारा कथित अवैध निर्माणों के मालिकों को नगर निगम अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का अवसर देती है। ये सभी संपत्तियाँ KMC के अधिकार क्षेत्र में आती हैं।
मेयर हकीम का बयान
मेयर फिरहाद हकीम ने बुधवार दोपहर मीडिया से बातचीत में कहा, 'KMC अधिनियम के तहत, मैं केवल एक नीति निर्माता हूँ। मुझे ऐसे नोटिसों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मुझे इस घटनाक्रम के बारे में भी किसी ने सूचित नहीं किया था।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि KMC आयुक्त को ऐसे मामलों में निर्णय लेने का अधिकार है और मेयर का भवन विभाग के फैसलों पर कोई सीधा प्रभाव नहीं होता।
अभिषेक बनर्जी का रुख
इससे एक दिन पहले, मंगलवार को दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में हुई नवनिर्वाचित TMC विधायकों की बैठक में अभिषेक बनर्जी भी उपस्थित थे। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने बैठक में कहा, 'वे जो चाहें करें। वे मुझे नोटिस भेज सकते हैं। वे मेरा घर भी गिरा सकते हैं। लेकिन मैं कभी नहीं झुकूँगा। चाहे कुछ भी हो जाए, मैं भाजपा के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखूँगा।'
भाजपा का आरोप और TMC का जवाब
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पश्चिम बंगाल इकाई ने 43 संपत्तियों की एक सूची जारी की, जिनके बारे में भाजपा खेमे ने आरोप लगाया कि वे अभिषेक बनर्जी से जुड़ी हैं। हालाँकि, तृणमूल कांग्रेस ने इस सूची को मनगढ़ंत और अविश्वसनीय बताते हुए खारिज कर दिया। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक तनाव चरम पर है और भाजपा राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि KMC अधिनियम की धारा 400(1) के तहत नोटिस मिलने के बाद संपत्ति मालिकों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलता है, जिसके बाद ही कोई कार्रवाई संभव है। KMC आयुक्त के स्तर पर इस मामले में आगे क्या निर्णय होता है, यह देखना बाकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।