अभिषेक बनर्जी की 17 संपत्तियों पर KMC नोटिस के बाद ममता ने बुलाई आपात पार्षद बैठक
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता नगर निगम (KMC) के सभी पार्षदों की एक आपात बैठक बुलाई है। यह बैठक उनके भतीजे और TMC सांसद अभिषेक बनर्जी की कई संपत्तियों पर पिछले सात दिनों में KMC द्वारा जारी लगातार नोटिसों के बाद बुलाई गई है। KMC बोर्ड TMC के नियंत्रण में है, जिससे यह टकराव पार्टी के भीतर प्रशासनिक संघर्ष का रूप ले रहा है।
बैठक का मुख्य एजेंडा
KMC में एक पार्टी पार्षद के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य मौजूदा स्थिति पर विचार-विमर्श करना है। पार्टी का आरोप है कि KMC की नौकरशाही निर्वाचित पार्षदों, मेयर और मेयर-इन-काउंसिल (MMIC) को दरकिनार कर नगर विकास मंत्रालय के निर्देशों पर स्वतंत्र रूप से काम कर रही है।
पार्टी पार्षद ने कहा, "नगर आयुक्त स्मित पांडे ने शुक्रवार को होने वाली नगर निगम की बैठक रद्द कर दी है। प्रशासन राज्य सरकार के निर्देशों पर बिना मेयर और MMIC से सलाह-मशविरा किए स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए हमारे शीर्ष नेता ने सभी पार्षदों की यह महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।"
17 संपत्तियों पर नोटिस — क्या है मामला
इस सप्ताह की शुरुआत में KMC अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी से जुड़ी या सह-स्वामित्व वाली कई संपत्तियों की जाँच शुरू की। निगम ने KMC एक्ट 1980 की धारा 400(1) के तहत 17 संपत्तियों पर नोटिस जारी किए हैं, जिसमें कथित अवैध निर्माणों के मालिकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। इन नोटिसों की प्रतियाँ संबंधित संपत्तियों की दीवारों पर चिपकाई गई हैं। अभिषेक बनर्जी की दो आवासीय संपत्तियाँ भी जाँच के दायरे में हैं।
हरीश मुखर्जी रोड संपत्ति पर नया विवाद
22 मई को KMC के असेसर-कलेक्टर (साउथ) कार्यालय ने 188A हरीश मुखर्जी रोड स्थित अभिषेक बनर्जी की संपत्ति को लेकर एक और नोटिस जारी किया। KMC रिकॉर्ड के अनुसार, यह संपत्ति पहले एक निजी कंपनी के नाम पर दर्ज थी, जिसे बाद में 'लीप्स एंड बाउंड्स इंफ्रा कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड' नाम दिया गया। आरोप है कि पुरानी इमारत को तोड़कर वहाँ नया भवन 'संतिनिकेतन' बनाया गया, लेकिन संपत्ति को अभी भी 'ओनर ऑकूपाइड' के रूप में दर्ज रखा गया है।
मेयर फिरहाद हकीम की प्रतिक्रिया
KMC के मेयर फिरहाद हकीम — जो चार बार के विधायक और पूर्व मंत्री हैं — ने कहा कि उन्हें इस कार्रवाई की पूर्व जानकारी नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर आयुक्त अपने अधिकारों के तहत बिना मेयर को सूचित किए नोटिस जारी कर सकते हैं। गौरतलब है कि KMC बोर्ड पर TMC का पूर्ण नियंत्रण है, ऐसे में यह स्वीकारोक्ति पार्टी के भीतर प्रशासनिक दरार की ओर संकेत करती है।
आगे क्या होगा
ममता बनर्जी की बुलाई बैठक यह तय करेगी कि TMC पार्षद नगर आयुक्त की स्वायत्त कार्रवाई को किस तरह से संबोधित करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई जाँच एजेंसियों की नजर में हैं। आने वाले दिनों में KMC की नोटिस प्रक्रिया और पार्टी की प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति पर गहरा असर डाल सकती है।