अभिषेक बनर्जी की कथित संपत्तियों पर केएमसी की जांच, तृणमूल नेतृत्व के सामने राजनीतिक संकट
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से तीन बार निर्वाचित लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी, उनके परिवार अथवा उनसे जुड़ी कंपनी के कथित स्वामित्व वाली संपत्तियों की जांच शुरू की है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर और बाहर एक साथ राजनीतिक व संगठनात्मक दबाव उत्पन्न कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, यह जांच 21 मई को सामने आई और इसने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को असहज स्थिति में डाल दिया है।
जांच का स्वरूप और दायरा
केएमसी अधिकारियों ने कोलकाता नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों के तहत अभिषेक बनर्जी से जुड़ी कुछ संपत्तियों को नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों में स्वीकृत भवन योजनाओं और संबंधित दस्तावेजों की माँग की गई है। अधिकारियों ने कोलकाता के शांति निकेतन सहित कई स्थानों का भौतिक निरीक्षण भी किया है।
जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण कार्य स्वीकृत योजनाओं के अनुरूप हैं या नहीं, और क्या कोई कर बकाया है। एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि एक संपत्ति पर चिपकाया गया नोटिस बाद में फटा हुआ मिला — यह घटना भले ही छोटी हो, लेकिन राजनीतिक खींचतान के संदर्भ में प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पार्टी के भीतर संगठनात्मक तनाव
यह मुद्दा इसलिए और जटिल हो गया है क्योंकि केएमसी स्वयं तृणमूल कांग्रेस द्वारा संचालित नागरिक निकाय है। ऐसे में पार्टी के लिए यह दावा करना कठिन है कि यह कार्रवाई बाहरी राजनीतिक उत्पीड़न का परिणाम है। तृणमूल के एक पदाधिकारी ने कहा कि इस घटनाक्रम ने संगठन के भीतर कुछ नेताओं को पार्टी के कथित 'उत्तराधिकारी' अभिषेक बनर्जी से अपनी शर्तों पर बात करने का अवसर दिया।
एक वरिष्ठ नेता, जिन्हें कभी अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता था, ने हाल ही में हुई एक बैठक में कथित तौर पर कहा कि कुछ ऐसे विषय हैं जिन पर विस्तार से चर्चा की आवश्यकता है। यह टिप्पणी पार्टी के अंदरूनी समीकरणों में बदलाव के संकेत के रूप में देखी जा रही है।
महापौर हकीम और वरिष्ठ नेताओं की दूरी
केएमसी के महापौर फिरहाद हकीम — जो चार बार के तृणमूल विधायक और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली पश्चिम बंगाल कैबिनेट में मंत्री भी रह चुके हैं — ने इस पूरे घटनाक्रम से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने यह स्वीकार करने से इनकार किया कि उन्हें केएमसी द्वारा इन संपत्तियों की जांच शुरू किए जाने की कोई पूर्व जानकारी थी।
अन्य वरिष्ठ तृणमूल नेता भी सार्वजनिक रूप से इस मामले से दूरी बनाते दिखे, जो इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर एकराय नहीं है।
तृणमूल का पक्ष और घोषित संपत्ति के आँकड़े
तृणमूल कांग्रेस ने ऐसे आरोपों को बार-बार 'कीचड़ उछालने' की कोशिश बताकर खारिज किया है। गुरुवार देर शाम फेसबुक पर पोस्ट किए गए एक संदेश में तृणमूल के प्रवक्ता कुणाल घोष ने इन आरोपों को झूठा करार दिया। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अभिषेक बनर्जी द्वारा अपने नामांकन पत्रों के साथ दाखिल हलफनामे में घोषित संपत्ति की जाँच करें।
2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान दाखिल हलफनामे के अनुसार, अभिषेक बनर्जी की कुल घोषित संपत्ति ₹2.32 करोड़ से अधिक थी, जबकि उन पर लगभग ₹36 लाख का कर्ज था। 2022-23 में उनकी निजी आय ₹82.58 लाख रही, जो पिछले वित्तीय वर्षों में घोषित ₹90.5 लाख और ₹1.51 करोड़ की आय की तुलना में कम है।
गौरतलब है कि आलोचक पहले से यह आरोप लगाते रहे हैं कि बड़ी संख्या में संपत्तियाँ अभिषेक बनर्जी और उनकी कथित कंपनी लीप्स एंड बाउंड्स के नाम पर पंजीकृत हैं — हालाँकि तृणमूल इन आरोपों को निराधार बताती रही है। यह देखना बाकी है कि केएमसी की यह जांच आगे किस दिशा में जाती है और क्या इसके निष्कर्ष पार्टी की आंतरिक राजनीति को और प्रभावित करते हैं।