सूरत सैनिक स्कूल: आदिवासी बच्चे बन रहे आर्मी ऑफिसर और ओलंपियन, ₹50 करोड़ का 20 एकड़ कैंपस
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के सूरत जिले की उमरपाड़ा तालुका के वाडी गाँव में संचालित सैनिक स्कूल आदिवासी बच्चों के जीवन में नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है — कोई सेना अधिकारी बनने का सपना देख रहा है, तो कोई ओलंपिक पदक की ओर नज़रें टिकाए है। गुजरात राज्य ट्राइबल एजुकेशन सोसायटी द्वारा राज्य सरकार के आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत चलाए जा रहे इस स्कूल में फिलहाल 372 आदिवासी छात्र कक्षा 6वीं से 12वीं तक की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
स्कूल की बुनियादी संरचना और सुविधाएँ
राज्य सरकार ने लगभग ₹50 करोड़ के खर्च से 20 एकड़ में इस आधुनिक परिसर का निर्माण कराया है। कैंपस में स्मार्ट क्लासरूम, मेस, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, 400 मीटर का एथलेटिक्स ग्राउंड, लाइब्रेरी तथा रसायन विज्ञान, भौतिकी, जीव विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशालाएँ उपलब्ध हैं। सभी छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ भोजन और आवास की सुविधा निःशुल्क दी जा रही है। राज्य सरकार प्रत्येक छात्र के लिए प्रति वर्ष ₹80,000 की अनुदान राशि प्रदान करती है।
अनुशासन और सैन्य प्रशिक्षण का माहौल
स्कूल के प्रिंसिपल जयदीप सिंह राठौड़ के अनुसार, यहाँ शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक विकास पर समान बल दिया जाता है। रिटायर्ड सेना अधिकारियों द्वारा छात्रों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। रिटायर्ड सूबेदार श्याम सिंह वसावा ने बताया कि ड्रिल परेड ग्राउंड पर बच्चों को फिजिकल ट्रेनिंग दी जाती है ताकि रक्षा सेवाओं में प्रवेश के लिए उन्हें एक ठोस अवसर मिल सके।
छात्रों की आवाज़: सपने और हौसला
छात्रा दिव्याबेन पंगी ने कहा, 'इस स्कूल में आने के बाद मैं अनुशासित हुई हूँ। यहाँ पढ़ाई के साथ-साथ भविष्य में हमें क्या करना है, इसको लेकर प्रेरित किया जाता है। मैं आर्मी अधिकारी बनना चाहती हूँ।' छात्र नील गामित ने बताया कि प्रतिदिन एक घंटे की परेड होती है जिसमें सावधान-विश्राम से लेकर फ्लैग मार्चिंग और फ्लैग सैल्यूट तक का प्रशिक्षण दिया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सरकार की मंशा और व्यापक संदर्भ
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार आदिवासी युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयासरत है। गौरतलब है कि अनुसूचित जनजाति के बच्चों को मुख्यधारा की प्रतिस्पर्धी शिक्षा और रक्षा सेवाओं से जोड़ने की यह पहल राज्य में अपनी तरह की विशिष्ट कोशिश मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में इस स्कूल से निकले छात्रों का प्रदर्शन ही इस मॉडल की वास्तविक सफलता का पैमाना होगा।