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जगन का 'स्मार्ट किचन' योजना पर हमला: 85,000 मिड-डे मील महिलाओं की आजीविका खतरे में

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जगन का 'स्मार्ट किचन' योजना पर हमला: 85,000 मिड-डे मील महिलाओं की आजीविका खतरे में

सारांश

'स्मार्ट किचन' योजना आधुनिकीकरण की बात करती है, लेकिन जगन मोहन रेड्डी का आरोप है कि इसकी असली कीमत 85,000 महिलाएँ चुकाएँगी जो दो दशकों से बच्चों को भोजन परोस रही हैं — और जिन्हें पिछले दो महीने से वेतन तक नहीं मिला।

मुख्य बातें

जगन मोहन रेड्डी ने 27 जून 2026 को आंध्र प्रदेश सरकार की 'स्मार्ट किचन' योजना की तीखी आलोचना की।
आरोप है कि योजना से सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने वाली लगभग 85,000 महिलाओं की आजीविका खतरे में पड़ेगी।
मिड-डे मील कर्मियों को कथित तौर पर पिछले दो महीनों से मानदेय नहीं मिला है।
जगन सरकार के दौरान इन कर्मियों का मानदेय ₹1,000 से बढ़ाकर ₹3,000 प्रतिमाह किया गया था।
वाईएसआरसीपी ने लंबित वेतन के तत्काल भुगतान और चुनावी वादे के अनुसार मानदेय वृद्धि की माँग की है।

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने 27 जून 2026 को राज्य की टी.डी.पी. नेतृत्व वाली सरकार की प्रस्तावित 'स्मार्ट किचन' योजना पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इस योजना के ज़रिए सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) तैयार करने वाली लगभग 85,000 महिलाओं की आजीविका छीनी जा रही है। जगन ने यह हमला ताडेपल्ली से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक पोस्ट के माध्यम से किया।

योजना पर आरोप: समर्थकों को लाभ, महिलाओं को नुकसान

जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया कि 'स्मार्ट किचन' योजना की आड़ में सरकार अपने समर्थकों को ठेके और लाभ पहुँचाने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, जो महिलाएँ दो दशकों से अधिक समय से सरकारी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराती आ रही हैं, उन्हें आधुनिकीकरण के नाम पर बेरोज़गार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल रोज़गार का नहीं, बल्कि हज़ारों परिवारों की आर्थिक सुरक्षा का सवाल है।

दो महीने से वेतन नहीं, आर्थिक संकट गहरा

जगन ने यह भी आरोप लगाया कि मिड-डे मील कर्मियों को पिछले दो महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानियाँ और बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में इन कर्मचारियों का मानदेय ₹1,000 प्रतिमाह से बढ़ाकर ₹3,000 प्रतिमाह किया गया था। गौरतलब है कि चुनाव से पहले मौजूदा सरकार ने इन कर्मियों को और अधिक सहायता देने का वादा किया था।

वाईएसआरसीपी का रुख: संघर्ष जारी रहेगा

वाईएसआरसीपी अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी मिड-डे मील कर्मियों के साथ मज़बूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने सरकार से लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान करने और चुनावी वादे के अनुसार मानदेय बढ़ाने की माँग की। जगन ने कहा, 'यह केवल वेतन का मुद्दा नहीं, बल्कि सम्मान और जीवनयापन का सवाल है।'

आम जनता पर असर

आलोचकों का कहना है कि तकनीकी आधुनिकीकरण मानव कल्याण की कीमत पर नहीं होना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में ग्रामीण महिला रोज़गार पहले से ही दबाव में है। 85,000 कर्मियों की आजीविका पर खतरे का अर्थ है कि उन पर आश्रित हज़ारों परिवार सीधे प्रभावित होंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने माँग की कि इन महिलाओं को उपेक्षा नहीं, बल्कि सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।

क्या होगा आगे

वाईएसआरसीपी ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को विधानसभा और सड़क — दोनों मोर्चों पर उठाएगी। राज्य सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 'स्मार्ट किचन' योजना का भविष्य और मिड-डे मील कर्मियों की स्थिति आने वाले दिनों में आंध्र प्रदेश की राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा बनती दिख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब उनकी लागत सबसे कमज़ोर कामगारों — ग्रामीण महिलाओं — पर पड़ती है, तो नीति की प्राथमिकताएँ सवालों के घेरे में आ जाती हैं। दो महीने से लंबित वेतन का आरोप, अगर सही है, तो यह प्रशासनिक विफलता से भी आगे की बात है — यह उन महिलाओं के साथ वादाखिलाफी है जिन्होंने पीढ़ियों से स्कूली बच्चों की थाली भरी। जगन का यह हमला विपक्षी राजनीति का हिस्सा ज़रूर है, लेकिन 85,000 कर्मियों का आँकड़ा और लंबित वेतन का दावा सरकार से जवाब माँगता है — जो अभी तक नहीं आया।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'स्मार्ट किचन' योजना क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
'स्मार्ट किचन' आंध्र प्रदेश सरकार की प्रस्तावित योजना है जिसके तहत सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की तैयारी को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाना है। विवाद इसलिए है क्योंकि वाईएसआरसीपी का आरोप है कि इससे लगभग 85,000 महिला कर्मियों की आजीविका समाप्त हो जाएगी।
जगन मोहन रेड्डी ने मिड-डे मील कर्मियों के बारे में क्या कहा?
जगन ने कहा कि ये महिलाएँ दो दशकों से अधिक समय से स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराती आ रही हैं और उन्हें पिछले दो महीनों से मानदेय नहीं मिला है। उन्होंने सरकार पर चुनावी वादे से मुकरने का आरोप भी लगाया।
मिड-डे मील कर्मियों का मानदेय कितना है और पहले क्या था?
जगन मोहन रेड्डी के अनुसार, उनकी सरकार के कार्यकाल में इन कर्मियों का मानदेय ₹1,000 प्रतिमाह से बढ़ाकर ₹3,000 प्रतिमाह किया गया था। वर्तमान सरकार पर आरोप है कि उसने और अधिक बढ़ाने का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ।
वाईएसआरसीपी इस मुद्दे पर क्या कदम उठाएगी?
वाईएसआरसीपी ने कहा है कि वह मिड-डे मील कर्मियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी। पार्टी ने सरकार से लंबित वेतन का तत्काल भुगतान और मानदेय वृद्धि की माँग की है।
आंध्र प्रदेश सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा?
रिपोर्टों के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 'स्मार्ट किचन' योजना का विस्तृत क्रियान्वयन ढाँचा भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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