दिशा विधेयक वापसी: जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू सरकार को घेरा, महिलाओं के लिए 'काला दिन' बताया
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने 7 अगस्त 2026 को आंध्र प्रदेश दिशा विधेयक वापस लेने के राज्य सरकार के फैसले की कड़ी निंदा की और इसे राज्य की महिलाओं व बच्चों के लिए 'काला दिन' करार दिया। उनके अनुसार, यह निर्णय महिला सुरक्षा के एक सुदृढ़ और बहुस्तरीय तंत्र को राजनीतिक कारणों से समाप्त करने जैसा है।
विधेयक वापसी का निर्णय
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में आंध्र प्रदेश दिशा बिल (क्रिमिनल लॉ एपी संशोधन विधेयक, 2019) को वापस लेने का निर्णय किया गया। राज्य सरकार के अनुसार, यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा गया था, किंतु केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ प्रावधानों पर स्पष्टीकरण माँगा और मौजूदा विधेयक वापस लेकर केंद्र की सिफारिशों के अनुरूप संशोधित विधेयक प्रस्तुत करने का सुझाव दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब महिला सुरक्षा राष्ट्रीय विमर्श में केंद्रीय मुद्दा बनी हुई है और विपक्ष राज्य सरकार पर पहले से ही दबाव में है।
दिशा व्यवस्था की मुख्य विशेषताएँ
जगन मोहन रेड्डी ने बताया कि दिशा केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक व्यापक सुरक्षा ढाँचा था। इसके अंतर्गत संकट में फँसी महिला मोबाइल पर एसओएस बटन दबाकर या फोन को पाँच बार हिलाकर तत्काल पुलिस सहायता प्राप्त कर सकती थी। उन्होंने दावा किया कि दिशा ऐप को 1.51 करोड़ से अधिक लोगों ने डाउनलोड किया था और वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल में ऐप के माध्यम से प्राप्त 31,607 आपातकालीन कॉलों पर पुलिस ने कार्रवाई की।
उन्होंने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने 18 विशेष दिशा महिला पुलिस थाने स्थापित किए थे और 13,500 महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती कर प्रत्येक गाँव एवं वार्ड सचिवालय में एक महिला अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित की गई थी। इसके साथ ही 900 दोपहिया और 163 चारपहिया वाहनों के साथ विशेष गश्ती व्यवस्था भी लागू की गई थी।
आँकड़ों में दिशा का असर
जगन मोहन रेड्डी ने दावा किया कि दिशा व्यवस्था लागू होने के बाद महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की जाँच की औसत अवधि 2017 के 156 दिनों से घटकर 2022 में 28 दिन रह गई। उनके अनुसार, 164 दुष्कर्म मामलों और 378 अन्य यौन अपराधों में सात दिनों के भीतर आरोप-पत्र दाखिल किए गए, जबकि गंभीर मामलों में 51 प्रतिशत से अधिक आरोपियों को 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि मई 2024 तक महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में 27 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई और वार्षिक औसत मामले 14,338 से घटकर 10,426 रह गए।
गौरतलब है कि छह प्रमुख शहरों में फोरेंसिक ढाँचे को सुदृढ़ किया गया था, 13 विशेष पॉक्सो अदालतें और 12 विशेष महिला अदालतें स्थापित की गई थीं, तथा यौन अपराधियों का 2,17,467 पंजीकृत आरोपियों का डेटाबेस तैयार किया गया था।
जगन का विपक्षी प्रहार
जगन मोहन रेड्डी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए इस व्यापक तंत्र को 'राजनीतिक द्वेष' के कारण समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार का मानना है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) पर्याप्त है, तो वह दिशा जैसी विशेष व्यवस्था का विकल्प कैसे हो सकती है, जिसमें एसओएस प्रणाली, विशेष थाने, गाँव स्तर तक महिला पुलिस नेटवर्क, यौन अपराधियों का डेटाबेस और त्वरित न्याय की व्यवस्था शामिल थी।
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि इस विधेयक को वापस लेकर चंद्रबाबू सरकार अपराधियों के मन से कानून का भय कम कर रही है और महिलाओं का सरकारी तंत्र पर विश्वास कमज़ोर कर रही है। उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल से यह निर्णय वापस लेने और दिशा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की माँग की।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि केंद्र की सिफारिशों के अनुरूप एक संशोधित विधेयक लाया जाएगा, हालाँकि इसकी समय-सीमा अभी स्पष्ट नहीं है। विपक्ष की कड़ी आलोचना के बीच यह देखना होगा कि चंद्रबाबू सरकार महिला सुरक्षा के मोर्चे पर किस नए ढाँचे के साथ आती है।