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जगन मोहन रेड्डी ने महिला आरक्षण बिल के विरोध पर विपक्ष से पूछे सवाल

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जगन मोहन रेड्डी ने महिला आरक्षण बिल के विरोध पर विपक्ष से पूछे सवाल

सारांश

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने विपक्षी दलों से पूछा है कि उन्होंने महिला आरक्षण बिल का विरोध करके क्या हासिल किया। उन्होंने चिंता जताई कि अगर परिसीमन के आधार पर जनगणना होती है, तो दक्षिण की स्थिति और खराब हो सकती है।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण पर राजनीति में गंभीरता की आवश्यकता है।
विपक्ष को अपने कार्यों पर विचार करना चाहिए।
दक्षिण भारत के लिए परिसीमन के मुद्दे पर जागरूकता बढ़ानी होगी।
महिला आरक्षण बिल का सही तरीके से कार्यान्वयन जरूरी है।
भाजपा को महिलाओं के मुद्दों पर सच्ची प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए।

अमरावती, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रमुख वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि जिन राजनीतिक दलों ने संसद में महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के बिल का विरोध किया, उन्हें खुद से यह सोचना चाहिए कि उन्होंने क्या प्राप्त किया है।

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में असफल रहने के बाद, जगन मोहन रेड्डी ने 'एक्स' पर उन दलों से सवाल किया जिन्होंने इसके खिलाफ मतदान किया था।

उन्होंने यह चिंता व्यक्त की कि यदि 2026 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया गया, तो दक्षिण के लिए स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी।

उन्होंने कहा, "विपक्षी दलों को खुद से गंभीरता से सवाल पूछना चाहिए; उन्होंने क्या हासिल किया है? जबकि सच्चाई यह है कि दक्षिण के लिए सीटें कम होंगी, और महिला आरक्षण विधेयक को टाल दिया गया है! न तो दक्षिण को न्याय मिला और न ही महिलाओं को! अगर 2026 की जनगणना आती है, तो स्थिति और भी खराब हो जाएगी; परिवार नियोजन के मामलों में अनुशासित रहने के लिए उन्हें और भी अधिक दंड मिलेगा।"

आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष वाई. एस. शर्मिला रेड्डी ने प्रतिक्रिया में कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर भाजपा की धोखाधड़ी वाली चाल नाकाम हो गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के मुद्दों को ढाल बनाकर गैर-कानूनी कानूनों को लागू करने की साजिश सफल नहीं हुई है।

उन्होंने लिखा, "सशक्तिकरण के नाम पर संघवाद की भावना को कमजोर करने की भाजपा की साज़िशें बेकार साबित हुई हैं। 'इंडी' गठबंधन की न्यायपूर्ण लड़ाई ने एनडीए के अन्याय पर विजय प्राप्त की है। यह लोकतंत्र की जीत है। यह वास्तव में भारत के लोगों की जीत है। यह भाजपा के राजनीतिक रूप से दुर्भावनापूर्ण एजेंडे का अंत है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंह पर एक जोरदार तमाचा है, जिन्होंने महिलाओं के नाम पर ओछी राजनीति की।"

कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि जो गिरा, वह केवल 'बिना सोचे-समझे और दिशाहीन' परिसीमन विधेयक था, न कि महिला आरक्षण विधेयक।

उन्होंने कहा कि विपक्ष ने कभी भी महिला आरक्षण विधेयक का विरोध नहीं किया। "'नारी' (महिलाओं) के नाम पर जो पेश किया गया, वह वास्तव में परिसीमन बिल के अलावा कुछ नहीं था। आज जिसे हराया गया, वह विशेष रूप से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं फिर से तय करने वाला बिल था। विपक्ष ने जिस साजिश को सफलतापूर्वक नाकाम किया, वह केवल संविधान को बदलने की साजिश थी।"

उन्होंने आगे कहा, "महिला आरक्षण बिल, वास्तव में, 2023 में ही मंजूर हो गया था। विपक्ष पर कीचड़ उछालना जारी रखने के बजाय, भाजपा को अब कम से कम, 2023 के महिला आरक्षण बिल को तुरंत लागू करना चाहिए। भाजपा को एक बार और हमेशा के लिए यह साबित करना होगा कि वह महिलाओं के मुद्दों को लेकर सचमुच गंभीर है। सभी 543 संसदीय सीटों पर 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जाना चाहिए।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जगन मोहन रेड्डी ने विपक्षी दलों के प्रति सीधा सवाल उठाया है, यह दर्शाते हुए कि राजनीति में केवल विरोध करने से कोई समाधान नहीं निकलता। उनके बयान से साफ है कि दक्षिण भारत में महिला आरक्षण की आवश्यकता पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल का क्या महत्व है?
महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देना है, जिससे उनकी समस्याओं और मुद्दों को बेहतर तरीके से संबोधित किया जा सके।
जगन मोहन रेड्डी ने किस मुद्दे पर सवाल उठाया?
उन्होंने महिला आरक्षण बिल के विरोध करने वाले दलों से सवाल किया कि उन्होंने क्या हासिल किया है।
क्या परिसीमन के आधार पर जनगणना का असर होगा?
जगन मोहन रेड्डी का मानना है कि परिसीमन के आधार पर जनगणना होने से दक्षिण के लिए स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
वाई. एस. शर्मिला रेड्डी का क्या कहना है?
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया है कि महिला आरक्षण के नाम पर उनकी योजनाएं नाकाम हो गई हैं।
कांग्रेस ने महिला आरक्षण बिल का विरोध किया था?
कांग्रेस ने कभी भी महिला आरक्षण विधेयक का विरोध नहीं किया, बल्कि उन्होंने इसे सही तरीके से लागू करने की बात की है।
राष्ट्र प्रेस
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