आंध्र प्रदेश में एनडीए के घटक दलों की महत्वपूर्ण बैठक: संसद के विशेष सत्र की तैयारी
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण अधिनियम का समर्थन करने के लिए रणनीति पर चर्चा हुई।
- चंद्रबाबू नायडू ने सभी दलों से समर्थन की अपील की।
- आंध्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने परिसीमन प्रक्रिया को खतरा बताया।
- बैठक में एनडीए के सभी प्रमुख नेता शामिल हुए।
- 16 अप्रैल को विधेयक पेश किया जाएगा।
अमरावती, 15 अप्रैल (आईएएनस)। गुरुवार से आरंभ हो रहे संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से पूर्व, आंध्र प्रदेश में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।
यह बैठक बुधवार की शाम मुख्यमंत्री के सरकारी निवास पर हुई, जिसमें मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री और जन सेना के अध्यक्ष पवन कल्याण, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पीवीएन माधव और प्रदेश टीडीपी अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव शामिल हुए।
एनडीए के सहयोगियों ने संसद के दोनों सदनों में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण अधिनियम, 2023) से संबंधित संवैधानिक संशोधन के समर्थन के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति पर विचार-मंथन किया।
चंद्रबाबू नायडू ने राज्य के राजनीतिक दलों के प्रमुखों और राज्य से राज्यसभा व लोकसभा सदस्यों को पत्र लिखकर इस संशोधन विधेयक के समर्थन की अपील की है।
उन्होंने उनसे अनुरोध किया कि वे 2029 के चुनावों से लागू होने वाले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के इस विधेयक का समर्थन करें।
टीडीपी के अध्यक्ष ने अपील की कि वे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को मजबूत करें।
उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल को संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का पेश किया जाना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर होगा।
इस बीच, आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष शर्मिला रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू को एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी है कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया राज्य के राजनीतिक और आर्थिक भविष्य के लिए गंभीर खतरा है।
अपने पत्र में, वाईएस शर्मिला रेड्डी ने आगाह किया है कि जनसंख्या-आधारित परिसीमन से संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व कम होगा, जिससे केंद्र के साथ मोलभाव करने की शक्ति कमजोर पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इससे आंध्र प्रदेश को केंद्रीय आवंटन में हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है, जिसका सीधा असर अमरावती की विकास योजनाओं, पोलावरम परियोजना और प्रमुख औद्योगिक गलियारों पर पड़ेगा।