2 अगस्त 2026
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जगन मोहन रेड्डी का चंद्रबाबू सरकार पर हमला: आंध्र में हमलावरों को संरक्षण, पीड़ितों पर FIR

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जगन मोहन रेड्डी का चंद्रबाबू सरकार पर हमला: आंध्र में हमलावरों को संरक्षण, पीड़ितों पर FIR

सारांश

जगन मोहन रेड्डी ने एक्स पर चंद्रबाबू नायडू को सीधे घेरा — आलूर विधायक की आधी रात गिरफ्तारी, CCTV हार्ड डिस्क जब्ती और ₹9,500 करोड़ के बकाया का हवाला देकर 'बदले की राजनीति' का आरोप लगाया। YSRCP ने साफ कहा — दरवाजे तोड़े जा सकते हैं, पर पार्टी नहीं झुकेगी।

मुख्य बातें

वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 2 अगस्त 2026 को एक्स पर पोस्ट कर चंद्रबाबू नायडू सरकार पर 'बदले की राजनीति' का आरोप लगाया।
आलूर के बीसी विधायक विरुपाक्षी को रात 2:45 बजे भारी पुलिस बल भेजकर गिरफ्तार किया गया; उनके भाई हमले में घायल हुए।
पुलिस ने विधायक के घर से सीसीटीवी हार्ड डिस्क जब्त की — जगन ने इसे सबूत छुपाने की कोशिश बताया।
पूर्व मंत्री सीडिरी अप्पाला राजू (श्रीकाकुलम) और पूर्व विधायक शेख मोहम्मद मुस्तफा (गुंटूर ईस्ट) पर भी कथित तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध में मुकदमे दर्ज किए गए।
जगन ने 'विद्या दीवेना' व 'वसति दीवेना' योजनाओं के ₹9,500 करोड़ बकाया और DSC-2025 में अनियमितताओं की CBI जाँच की माँग उठाई।
YSRCP ने चेतावनी दी कि चाहे कितने भी मुकदमे दर्ज हों, पार्टी पीड़ितों के साथ खड़ी रहेगी।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 2 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की सरकार पर कानून व्यवस्था के पूर्ण पतन का आरोप लगाया। उनका कहना है कि राज्य में 'बदले की राजनीति' का बोलबाला है — सत्ताधारी दल से जुड़े हमलावरों को पुलिस सुरक्षा मिल रही है, जबकि विपक्षी दल के पीड़ितों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।

एक्स पर उठाए तीखे सवाल

जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सीधे मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए लिखा, 'चंद्रबाबू नायडू, आज आंध्र प्रदेश में असल में क्या हो रहा है? अगर हमला करने वाले सत्ताधारी पार्टी के हों तो उन्हें सुरक्षा मिलती है। अगर पीड़ित वाईएसआर कांग्रेस के हों तो उन पर केस दर्ज होते हैं। सरकार से सवाल पूछने वालों को गिरफ्तार किया जाता है। क्या यही लोकतंत्र है? क्या यही न्याय है?'

विधायक विरुपाक्षी की गिरफ्तारी पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने आलूर के बीसी विधायक विरुपाक्षी की गिरफ्तारी का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने पूछा कि क्या लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित विधायक के घर पर रात 2:45 बजे भारी पुलिस बल भेजकर दरवाजा तोड़ना उचित था।

जगन के अनुसार, चिप्पागिरी मंडल के नेमाकल्लू गाँव में कथित तौर पर तेलुगु देशम पार्टी (TDP) कार्यकर्ताओं ने एक YSRCP नेता के घर पर हमला किया। मदद के लिए बुलाए जाने पर जब विधायक विरुपाक्षी पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचे, तो उन पर भी पथराव किया गया और उनके भाई घायल हो गए। इसके बावजूद, जगन के अनुसार, पुलिस ने हमलावरों की बजाय विधायक और YSRCP कार्यकर्ताओं पर हत्या के प्रयास जैसे संगीन आरोप लगाए।

जगन ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने विधायक के घर से सीसीटीवी हार्ड डिस्क जब्त की, और सवाल किया कि कहीं इसका उद्देश्य आधी रात के पुलिस ऑपरेशन की कथित ज्यादती को छुपाना तो नहीं था।

श्रीकाकुलम और गुंटूर के मामले

श्रीकाकुलम जिले में पूर्व मंत्री सीडिरी अप्पाला राजू की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए जगन ने आरोप लगाया कि एक सड़क दुर्घटना को राजनीतिक प्रतिशोध के तहत हत्या के मामले में बदल दिया गया। उनका दावा है कि जब राजू पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचे तो भारी भीड़ उमड़ी, और इसके बाद सरकार ने कथित तौर पर वीडियो से छेड़छाड़ कर चिंताडा रविकुमार समेत अन्य नेताओं पर मुकदमे दर्ज किए।

गुंटूर ईस्ट के पूर्व विधायक शेख मोहम्मद मुस्तफा के मामले में भी उन्होंने इसी पैटर्न की ओर ध्यान दिलाया। जगन के अनुसार, एक व्यावसायिक विवाद में शामिल व्यक्ति को पुलिस को सौंपे जाने के बावजूद मुस्तफा पर अपहरण का मामला दर्ज कर दिया गया — महज इसलिए कि वे YSRCP से जुड़े हैं।

शासन पर बड़े सवाल

जगन ने DSC-2025 में कथित अनियमितताओं की CBI जाँच, शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे की माँग, 'विद्या दीवेना' और 'वसति दीवेना' योजनाओं के ₹9,500 करोड़ के बकाया तथा ₹3,000 बेरोजगारी भत्ते जैसे मुद्दे भी उठाए। उनका तर्क है कि इन सवालों का जवाब देने की बजाय सरकार झूठे मुकदमों, आधी रात की गिरफ्तारियों और पुलिस की ज्यादती से ध्यान भटका रही है।

चंद्रबाबू को चेतावनी

जगन मोहन रेड्डी ने अपनी पोस्ट में चंद्रबाबू नायडू को चेतावनी देते हुए कहा, 'राजनीतिक सत्ता और पुलिस की ताकत हमेशा नहीं रहती। आप कितने भी केस दर्ज करें, कितने भी दरवाजे तोड़ें, वाईएसआरसीपी पीछे नहीं हटेगी।' उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है, लेकिन उनके साहस और सवालों को नहीं दबाया जा सकता। यह टकराव आंध्र प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में और तीव्र होने के संकेत दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 2014 के बाद से दोनों दलों के शासनकाल में बारी-बारी से दिखता रहा है। असली सवाल यह है कि आधी रात की गिरफ्तारियाँ और CCTV जब्ती जैसे कदम क्या पुलिस की स्वायत्त कार्रवाई हैं या राजनीतिक निर्देश पर — और इसकी जाँच कौन करेगा। ₹9,500 करोड़ के कल्याण बकाये का मुद्दा शासन की विफलता का ठोस आँकड़ा है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के शोर में दबा देती है। न्यायपालिका और स्वतंत्र जाँच एजेंसियों की भूमिका ही तय करेगी कि यह सियासी बयानबाजी है या वास्तविक संस्थागत संकट।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया है कि आंध्र प्रदेश में सत्ताधारी दल के हमलावरों को पुलिस सुरक्षा मिल रही है जबकि YSRCP के पीड़ितों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे 'बदले की राजनीति' करार दिया और कई ठोस मामलों का हवाला दिया।
विधायक विरुपाक्षी की गिरफ्तारी का मामला क्या है?
आलूर के बीसी विधायक विरुपाक्षी को रात 2:45 बजे भारी पुलिस बल भेजकर गिरफ्तार किया गया। जगन के अनुसार, विधायक नेमाकल्लू गाँव में एक पीड़ित YSRCP नेता से मिलने गए थे जहाँ उन पर पथराव हुआ और उनके भाई घायल हो गए — इसके बावजूद हमलावरों की बजाय विधायक पर ही हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया।
YSRCP ने ₹9,500 करोड़ के बकाये का मुद्दा क्यों उठाया?
'विद्या दीवेना' और 'वसति दीवेना' योजनाओं के तहत छात्रों को मिलने वाली सहायता राशि के ₹9,500 करोड़ अभी तक जारी नहीं हुए हैं। जगन का कहना है कि सरकार इन सवालों का जवाब देने की बजाय विपक्षी नेताओं को झूठे मुकदमों में उलझा रही है।
DSC-2025 विवाद क्या है और CBI जाँच की माँग क्यों?
जगन मोहन रेड्डी ने DSC-2025 (जिला चयन समिति भर्ती 2025) में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए CBI जाँच की माँग की है। उनका कहना है कि शिक्षा मंत्री नारा लोकेश को इस मामले में तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।
आंध्र प्रदेश में YSRCP और TDP के बीच यह टकराव कितना पुराना है?
2024 के विधानसभा चुनाव में TDP की वापसी के बाद से YSRCP और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ा है। दोनों दल एक-दूसरे पर राजनीतिक प्रतिशोध और पुलिस के दुरुपयोग के आरोप लगाते रहे हैं, जो आंध्र प्रदेश की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद की पुरानी परंपरा का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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