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TMC चुनाव चिन्ह और पार्टी ममता बनर्जी की: कुणाल घोष ने विपक्षी गुट को दी कड़ी चुनौती

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TMC चुनाव चिन्ह और पार्टी ममता बनर्जी की: कुणाल घोष ने विपक्षी गुट को दी कड़ी चुनौती

सारांश

तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने साफ कर दिया कि 'दो फूल' चुनाव चिन्ह और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस कानूनी रूप से ममता बनर्जी की है। स्क्रूटनी की समय-सीमा गुरुवार को समाप्त होते ही यथास्थिति लागू होगी और विपक्षी गुट को नए चिन्ह पर उपचुनाव लड़ना पड़ सकता है।

मुख्य बातें

TMC विधायक कुणाल घोष ने 16 सितंबर को स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में 'दो फूल' चिन्ह और AITC ममता बनर्जी के नाम पर दर्ज है।
चुनाव आयोग ने TMC टीम को साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए गुरुवार शाम 4 बजे के बाद का समय दिया है, लेकिन स्क्रूटनी की समय-सीमा उससे पहले समाप्त हो जाएगी।
TMC की कानूनी लड़ाई की कमान सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी के हाथों में है।
घोष ने संकेत दिया कि पार्टी से अलग हुए गुट को उपचुनाव में 'तकिया' जैसे वैकल्पिक चुनाव चिन्ह पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
TMC ने BJP पर चुनाव आयोग को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया, हालाँकि कोई ठोस साक्ष्य नहीं दिया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक कुणाल घोष ने बुधवार, 16 सितंबर को स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और उसका 'घास पर दो फूल' चुनाव चिन्ह ममता बनर्जी के नाम पर दर्ज है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक यथास्थिति बनी रहेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी से अलग हुए गुट को आगामी विधानसभा उपचुनाव में 'तकिया' जैसे किसी अन्य चुनाव चिन्ह पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

घोष ने बताया कि चुनाव आयोग ने TMC की कानूनी टीम को साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए गुरुवार शाम 4 बजे के बाद का समय निर्धारित किया है। हालाँकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तब तक नामांकन जांच (स्क्रूटनी) की समय-सीमा बीत चुकी होगी, जिसके बाद कानूनी रूप से यथास्थिति स्वतः लागू हो जाएगी।

घोष के अनुसार, 'सुनवाई केवल इस बारे में नहीं है कि किसने कौन-सा पत्र सौंपा — अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की टीम बैठक और विचार-विमर्श के बाद ही अगला कदम उठाएगी।

कानूनी मोर्चे की कमान किसके हाथ

TMC की ओर से इस पूरे कानूनी विवाद की बागडोर सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी के हाथों में है। घोष ने कहा कि कल्याण-दा इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं और तकनीकी-कानूनी पहलुओं की विस्तृत जानकारी वही दे पाएंगे। ममता बनर्जी स्वयं स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं।

गौरतलब है कि चुनाव चिन्ह विवाद किसी राजनीतिक दल के लिए अस्तित्व का प्रश्न बन जाता है, क्योंकि मतदाता प्रायः चिन्ह के आधार पर ही अपना वोट डालते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव की तैयारियाँ चल रही हैं।

विपक्षी गुट पर तीखा प्रहार

घोष ने तंज़ भरे लहजे में कहा कि अगर सब कुछ कानून के अनुसार हुआ, तो 'दो फूल' वाला चुनाव चिन्ह ममता बनर्जी के पास ही रहेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी से अलग हुए 'चटन' जैसे नेताओं को उपचुनाव में 'तकिया' चुनाव चिन्ह पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि TMC का गुट भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनाव आयोग पर दबाव डालने की किसी भी संभावना को लेकर अटकलें नहीं लगा रहा, लेकिन कानूनी दृष्टिकोण से पार्टी की स्थिति मज़बूत है।

आम जनता और उपचुनाव पर असर

यह विवाद आगामी विधानसभा उपचुनाव के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। यदि स्क्रूटनी की समय-सीमा बिना किसी बदलाव के बीत जाती है, तो चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और 'घास पर दो फूल' चिन्ह पर केवल ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी का ही अधिकार बना रहेगा। विपक्षी गुट को नए चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरना होगा, जो उनकी चुनावी संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।

क्या होगा आगे

TMC की कानूनी टीम गुरुवार को चुनाव आयोग के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करेगी। स्क्रूटनी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद की स्थिति पर कल्याण बनर्जी की ओर से विस्तृत बयान आने की उम्मीद है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC के आंतरिक विखंडन और उसके चुनावी परिणामों को लेकर एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न मीडिया में। TMC का दांव यह है कि स्क्रूटनी की समय-सीमा बीत जाए और यथास्थिति स्वतः उनके पक्ष में काम करे, लेकिन यह रणनीति तब कमज़ोर पड़ सकती है जब विपक्षी गुट के पास भी दस्तावेज़ी आधार हो। BJP पर दबाव का आरोप बिना साक्ष्य के लगाया गया है, जो TMC की बेचैनी को दर्शाता है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव चिन्ह का मनोवैज्ञानिक महत्व बेहद बड़ा है — 'दो फूल' खोने का मतलब ज़मीनी स्तर पर मतदाताओं का भ्रमित होना है, जो TMC के लिए उपचुनाव में भारी पड़ सकता है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TMC के चुनाव चिन्ह विवाद में मामला क्या है?
तृणमूल कांग्रेस के एक गुट ने 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'घास पर दो फूल' चुनाव चिन्ह पर दावा किया है। TMC विधायक कुणाल घोष के अनुसार, चुनाव आयोग के मौजूदा रिकॉर्ड में यह चिन्ह और पार्टी ममता बनर्जी के नाम पर दर्ज है और स्क्रूटनी की समय-सीमा बीतने के बाद यथास्थिति बनी रहेगी।
चुनाव आयोग ने इस मामले में क्या कदम उठाया है?
चुनाव आयोग ने TMC की कानूनी टीम को गुरुवार शाम 4 बजे के बाद साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने का समय दिया है। हालाँकि, कुणाल घोष ने बताया कि तब तक नामांकन जांच (स्क्रूटनी) की समय-सीमा समाप्त हो जाएगी, जिसके बाद कानूनी रूप से यथास्थिति लागू होगी।
TMC की कानूनी रणनीति कौन संभाल रहे हैं?
सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी TMC की कानूनी लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं। कुणाल घोष ने स्पष्ट किया कि चुनाव चिन्ह विवाद के तकनीकी और कानूनी पहलुओं की विस्तृत जानकारी केवल कल्याण बनर्जी ही दे सकते हैं।
विपक्षी गुट को उपचुनाव में क्या करना होगा?
कुणाल घोष के अनुसार, यदि कानूनी प्रक्रिया सामान्य रूप से चली तो पार्टी से अलग हुए गुट को आगामी विधानसभा उपचुनाव में 'तकिया' जैसे किसी वैकल्पिक चुनाव चिन्ह पर निर्भर रहना पड़ सकता है। 'दो फूल' चिन्ह ममता बनर्जी की पार्टी के पास ही रहने की संभावना है।
BJP की भूमिका इस विवाद में क्या बताई जा रही है?
TMC विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) चुनाव आयोग पर दबाव डालने की कोशिश कर सकती है, हालाँकि उन्होंने इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने कहा कि TMC इस पर अटकलें नहीं लगा रही और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा है।
राष्ट्र प्रेस
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