यमुनोत्री हाईवे पर चालक 40-50 मीटर गहरी खाई में गिरा, SDRF ने सुरक्षित निकाला
सारांश
मुख्य बातें
यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्यानाचट्टी के निकट 15 सितंबर 2026 की रात करीब 9 बजे एक टेम्पो ट्रैवलर चालक पैर फिसलने से 40 से 50 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। उत्तरकाशी पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की संयुक्त टीम ने तत्काल बचाव अभियान चलाकर चालक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि वाहन में सवार सात तीर्थयात्रियों को वैकल्पिक वाहन से उनके रात्रि विश्राम स्थल जानकीचट्टी पहुँचाया गया।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
बताया गया है कि चालक उपेन्द्र, निवासी उत्तर प्रदेश, हरिद्वार से मध्य प्रदेश के सात तीर्थयात्रियों को चारधाम यात्रा पर लेकर आए थे। रात के सफर के दौरान शौच के लिए वाहन से उतरते समय उनका पैर फिसल गया और वे राजमार्ग के किनारे की गहरी खाई में जा गिरे।
यह घटना उस समय हुई जब यमुनोत्री हाईवे पर रात का अंधेरा था और पहाड़ी सड़क पर दृश्यता सीमित थी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल पर खाई की गहराई और ऊबड़-खाबड़ इलाके के कारण बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण रहा।
बचाव अभियान: टीम की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही उत्तरकाशी पुलिस और एसडीआरएफ की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुँची। कड़ी मशक्कत के बाद संयुक्त बचाव दल ने चालक उपेन्द्र को खाई से सुरक्षित बाहर निकाला। अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना में उन्हें मामूली चोटें आईं।
गौरतलब है कि पहाड़ी इलाकों में रात के समय इस प्रकार के बचाव अभियान अत्यंत जोखिम भरे होते हैं। इस बार टीम की तेज़ प्रतिक्रिया ने एक बड़े हादसे को टाल दिया।
तीर्थयात्रियों की सुरक्षा
चालक के खाई में गिरने के बाद वाहन में सवार सात तीर्थयात्री राजमार्ग पर फँसे रहे। उत्तरकाशी पुलिस ने तत्काल दूसरे वाहन की व्यवस्था की और सभी यात्रियों को सुरक्षित रूप से उनके रात्रि विश्राम स्थल जानकीचट्टी पहुँचाया गया।
यह ऐसे समय में आया है जब चारधाम यात्रा के मौसम में यमुनोत्री हाईवे पर श्रद्धालुओं की आवाजाही चरम पर रहती है और पहाड़ी सड़कों पर दुर्घटनाओं का जोखिम बना रहता है।
आम जनता पर असर और सराहना
चालक और सभी तीर्थयात्रियों ने उत्तरकाशी पुलिस तथा एसडीआरएफ की त्वरित कार्रवाई, संवेदनशीलता और मानवीय कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने बचाव दल का आभार व्यक्त किया।
यह घटना पहाड़ी राजमार्गों पर रात के सफर के दौरान सावधानी बरतने की ज़रूरत को एक बार फिर रेखांकित करती है। आगे भी यात्रा सीज़न में ऐसी आपात स्थितियों के लिए बचाव दलों की तैनाती और तत्परता बनाए रखना आवश्यक होगा।