17 जुलाई 2026
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चमोली में ईको वैन 400 मीटर गहरी खाई में गिरी, एक परिवार के 3 सदस्यों की मौत, 3 घायल

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चमोली में ईको वैन 400 मीटर गहरी खाई में गिरी, एक परिवार के 3 सदस्यों की मौत, 3 घायल

सारांश

देहरादून से पार्थिव शरीर लेकर लौट रही ईको वैन चमोली के ल्वाणी जंगल में 400-500 मीटर गहरी खाई में गिर गई — एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई। नींद में झपकी को प्रारंभिक कारण बताया जा रहा है। ग्रामीण इस खतरनाक मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था की माँग कर रहे हैं।

मुख्य बातें

30 मई की सुबह 5:50 बजे चमोली जिले के ग्राम ल्वाणी क्षेत्र में ईको वैन 400-500 मीटर गहरी खाई में गिरी।
मृतकों में बलबीर सिंह (50) , उनकी पत्नी शांति देवी (48) और पुत्र आंशु बिष्ट (18) शामिल हैं — तीनों एक ही परिवार के।
तीन अन्य — कविता देवी (32) , मयंक सिंह (8) और रोशनी (18) — गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में उपचाररत।
प्रारंभिक जाँच में चालक की नींद को दुर्घटना का संभावित कारण बताया गया है।
डीडीआरएफ टीम और पुलिस ने संयुक्त बचाव अभियान चलाया; एफआईआर दर्ज।
ग्रामीणों ने इस मार्ग पर गार्ड रेलिंग और साइन बोर्ड लगाने की माँग की।

उत्तराखंड के चमोली जिले में शनिवार, 30 मई की सुबह एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौके पर मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। देहरादून से पार्थिव शरीर लेकर लौट रही एक निजी ईको वैन अनियंत्रित होकर ग्राम ल्वाणी के जंगल क्षेत्र में करीब 400-500 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। यह हादसा थराली थाना क्षेत्र के अंतर्गत सुबह करीब 5:50 बजे हुआ।

घटनाक्रम

बांक, लोहाजंग निवासी बलबीर सिंह (50) अपने परिजनों के साथ निजी ईको वैन (पंजीकरण संख्या: यूके 07 डी 2979) से लौट रहे थे। वाहन में सवार सभी छह लोग स्वर्गीय भजन सिंह का पार्थिव शरीर गाँव ले जा रहे थे, जिनका देहरादून में उपचार के दौरान निधन हो गया था। पुलिस की प्रारंभिक जाँच के अनुसार, चालक को नींद आ जाने के कारण वाहन सड़क से फिसलकर गहरी खाई में जा गिरा।

मृतकों और घायलों की पहचान

पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान बलबीर सिंह (50), पुत्र स्व. नारायण सिंह; उनकी पत्नी शांति देवी (48); तथा उनके पुत्र आंशु बिष्ट (18) के रूप में की गई है। घायलों में कविता देवी (32), पत्नी खुशाल सिंह; मयंक सिंह (8), पुत्र खुशाल सिंह; और रोशनी (18), पुत्री लक्ष्मण सिंह शामिल हैं। तीनों घायलों को तत्काल एम्बुलेंस से अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है।

बचाव अभियान

मृतकों के शवों को खाई से निकालने के लिए डीडीआरएफ टीम, स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त बचाव अभियान चलाया। थानाध्यक्ष थराली घटनास्थल पर तत्काल पहुँचे और राहत कार्यों का निरीक्षण किया। उपजिलाधिकारी थराली को भी घटना की सूचना दी गई। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जाँच शुरू कर दी है।

ग्रामीणों की माँग

इस हादसे से पूरे इलाके में शोक की लहर है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस खंड पर सड़क संकरी और अत्यंत खतरनाक है। उन्होंने प्रशासन से इस मार्ग पर गार्ड रेलिंग, चेतावनी साइन बोर्ड और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की माँग की है। गौरतलब है कि उत्तराखंड के पहाड़ी मार्गों पर इस तरह की दुर्घटनाएँ नींद या थकान के कारण होती रही हैं, विशेषकर भोर के समय जब यात्री लंबी दूरी तय कर रहे होते हैं।

आगे की कार्रवाई

पुलिस दुर्घटना के सटीक कारणों की जाँच कर रही है। प्रशासन से अपेक्षा है कि वह इस मार्ग की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करेगा। यह हादसा पहाड़ी सड़कों पर रात्रि और भोर-यात्रा के दौरान चालक की सतर्कता और सड़क सुरक्षा ढाँचे पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

शोकाकुल परिवार, लंबी दूरी, संकरी सड़क — और गार्ड रेलिंग का कोई नामोनिशान नहीं। ग्रामीण हर हादसे के बाद वही माँगें दोहराते हैं, प्रशासन आश्वासन देता है, और अगली दुर्घटना का इंतजार होता है। जब तक पहाड़ी सड़क सुरक्षा को बजट और जवाबदेही से नहीं जोड़ा जाता, ये खाइयाँ परिवारों को निगलती रहेंगी।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चमोली ईको वैन दुर्घटना में कितने लोगों की मौत हुई?
इस दुर्घटना में एक ही परिवार के तीन सदस्यों — बलबीर सिंह (50), शांति देवी (48) और आंशु बिष्ट (18) — की मौके पर मौत हो गई। तीन अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में उपचाररत हैं।
चमोली दुर्घटना कब और कहाँ हुई?
यह दुर्घटना 30 मई की सुबह करीब 5:50 बजे चमोली जिले के थराली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ल्वाणी के जंगल क्षेत्र में हुई। ईको वैन 400-500 मीटर गहरी खाई में जा गिरी।
ईको वैन दुर्घटना का कारण क्या बताया गया है?
पुलिस की प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि चालक को संभवतः नींद आ जाने के कारण वाहन अनियंत्रित हो गया और सड़क से फिसलकर खाई में गिर गया। जाँच अभी जारी है।
बचाव अभियान में कौन-कौन शामिल था?
मृतकों के शवों को खाई से निकालने के लिए डीडीआरएफ टीम, थराली पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त बचाव अभियान चलाया। थानाध्यक्ष थराली और उपजिलाधिकारी थराली को भी घटना की सूचना दी गई।
ग्रामीणों ने इस दुर्घटना के बाद क्या माँगें रखी हैं?
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क खंड संकरा और खतरनाक है। उन्होंने प्रशासन से गार्ड रेलिंग लगाने, चेतावनी साइन बोर्ड स्थापित करने और समग्र सड़क सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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