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पश्चिम बंगाल मतगणना विवाद: TMC की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 2 मई को जस्टिस नरसिम्हा की पीठ करेगी सुनवाई

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पश्चिम बंगाल मतगणना विवाद: TMC की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 2 मई को जस्टिस नरसिम्हा की पीठ करेगी सुनवाई

सारांश

तृणमूल कांग्रेस ने मतगणना ड्यूटी में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है — कलकत्ता उच्च न्यायालय से राहत न मिलने के बाद। 2 मई की सुनवाई तय करेगी कि ECI का यह अधिकार न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है या नहीं।

मुख्य बातें

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 1 मई 2025 को सर्वोच्च न्यायालय में नई याचिका दाखिल की, जो कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध है।
याचिका में चुनाव आयोग के उस निर्देश को चुनौती दी गई है जिसमें केंद्रीय सरकारी और केंद्रीय PSU कर्मचारियों को मतगणना सुपरवाइजर व असिस्टेंट नियुक्त करने का आदेश है।
CJI सूर्यकांत ने जस्टिस पी.एस.
नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की विशेष पीठ गठित की।
जस्टिस कृष्ण राव की कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने TMC की याचिका यह कहते हुए खारिज की थी कि नियुक्ति ECI का विशेषाधिकार है।
सुनवाई 2 मई को निर्धारित; सर्वोच्च न्यायालय का फैसला मतगणना प्रक्रिया पर सीधा असर डाल सकता है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 1 मई 2025 को सर्वोच्च न्यायालय में एक नई याचिका दाखिल कर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना ड्यूटी में केंद्रीय सरकारी और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (PSU) कर्मचारियों की नियुक्ति के चुनाव आयोग (ECI) के निर्देश को चुनौती दी है। पार्टी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश के विरुद्ध यह याचिका दाखिल की है, जिसमें अदालत ने इसी मुद्दे पर TMC की मूल याचिका खारिज कर दी थी। इस याचिका पर शनिवार, 2 मई को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई निर्धारित है।

विशेष पीठ का गठन

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले की सुनवाई के लिए दो न्यायाधीशों की एक विशेष पीठ का गठन किया है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की यह पीठ TMC की याचिका पर सुनवाई करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में मतगणना की तारीख निकट है और राजनीतिक तनाव चरम पर है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने क्यों खारिज की थी याचिका

इससे पहले गुरुवार को जस्टिस कृष्ण राव की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद TMC की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट की नियुक्ति करना चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है और इस प्रक्रिया में केंद्रीय सरकारी या केंद्रीय PSU कर्मचारियों की नियुक्ति में कोई अवैधता नहीं है।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी निर्देश मतगणना प्रक्रिया में 'पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुव्यवस्थित संचालन' सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिया गया था और यह चुनावी प्रक्रिया का वैध हिस्सा है। गौरतलब है कि हर मतगणना टेबल पर माइक्रो ऑब्जर्वर भी मौजूद रहेंगे, जो सामान्यतः केंद्रीय सरकारी या PSU कर्मचारी ही होते हैं।

TMC की दलीलें और आशंकाएँ

TMC ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि केंद्रीय कर्मचारी केंद्र सरकार के अधीन कार्य करते हैं, इसलिए वे मतगणना के दौरान राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी के पक्ष में प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी का कहना है कि मतगणना ड्यूटी में केवल केंद्रीय कर्मचारियों को प्राथमिकता देना एक मनमाना फैसला है और इससे चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। हालाँकि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस आशंका को स्वीकार नहीं किया।

उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मतगणना के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी या पक्षपात होता है, तो TMC चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद चुनाव याचिका दायर कर इसे चुनौती दे सकती है।

निगरानी और संतुलन की व्यवस्था

उच्च न्यायालय के अनुसार, मतगणना प्रक्रिया में पर्याप्त निगरानी सुनिश्चित करने के लिए माइक्रो ऑब्जर्वर के अतिरिक्त उम्मीदवारों के काउंटिंग एजेंट और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। यह बहु-स्तरीय निगरानी तंत्र किसी एकल पक्ष के प्रभाव की संभावना को सीमित करता है। अब सर्वोच्च न्यायालय की विशेष पीठ यह तय करेगी कि TMC की आशंकाएँ न्यायिक हस्तक्षेप की माँग करती हैं या नहीं।

आगे क्या होगा

2 मई को होने वाली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय यह निर्धारित कर सकता है कि मतगणना से पहले कोई अंतरिम राहत दी जाए या नहीं। यह फैसला पश्चिम बंगाल की मतगणना प्रक्रिया और ECI के अधिकारों की व्याख्या के लिहाज से एक महत्त्वपूर्ण न्यायिक मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सर्वोच्च न्यायालय की विशेष पीठ का गठन यह संकेत देता है कि शीर्ष अदालत इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। असली सवाल यह है कि क्या केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति वास्तव में निष्पक्षता को प्रभावित करती है, या यह TMC की राजनीतिक असुरक्षा की अभिव्यक्ति मात्र है — इसका उत्तर 2 मई की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TMC ने सुप्रीम कोर्ट में किस बात को चुनौती दी है?
TMC ने चुनाव आयोग के उस निर्देश को चुनौती दी है जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के लिए काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट के रूप में केंद्रीय सरकारी व PSU कर्मचारियों की नियुक्ति का आदेश दिया गया है। पार्टी का तर्क है कि यह निष्पक्षता के सिद्धांत के विरुद्ध है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने TMC की याचिका क्यों खारिज की?
जस्टिस कृष्ण राव की एकल पीठ ने कहा कि काउंटिंग कर्मचारियों की नियुक्ति चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है और इसमें केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति में कोई अवैधता नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि माइक्रो ऑब्जर्वर, काउंटिंग एजेंट और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी से पर्याप्त निगरानी सुनिश्चित होती है।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कब होगी?
TMC की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय में 2 मई 2025 को सुनवाई निर्धारित है। CJI सूर्यकांत द्वारा गठित जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की विशेष पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी।
मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति से TMC को क्या आपत्ति है?
TMC का तर्क है कि केंद्रीय कर्मचारी केंद्र सरकार के अधीन काम करते हैं, इसलिए वे मतगणना के दौरान राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी — भारतीय जनता पार्टी (BJP) — के पक्ष में प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी इसे मनमाना और पक्षपातपूर्ण निर्णय मानती है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला मतगणना प्रक्रिया पर क्या असर डाल सकता है?
यदि सर्वोच्च न्यायालय TMC के पक्ष में अंतरिम राहत देता है, तो मतगणना ड्यूटी में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति पर रोक लग सकती है। यह फैसला ECI के अधिकारों और राज्य-केंद्र संबंधों के संदर्भ में एक महत्त्वपूर्ण न्यायिक मिसाल भी स्थापित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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