30 जुलाई 2026
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बंगाल के सरकारी स्कूलों में इस्कॉन के मिड-डे मील के साथ अलग से मिलेंगे अंडे: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी

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बंगाल के सरकारी स्कूलों में इस्कॉन के मिड-डे मील के साथ अलग से मिलेंगे अंडे: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी

सारांश

बंगाल में इस्कॉन को मिड-डे मील की जिम्मेदारी देने पर उठे विवाद का मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने समाधान निकाला — इस्कॉन का शाकाहारी भोजन रहेगा, साथ में स्वयं सहायता समूहों के जरिए अलग से अंडे भी मिलेंगे। 1 अगस्त से कोलकाता में पायलट शुरू होगा।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 29 जुलाई 2026 को घोषणा की कि सरकारी स्कूलों में इस्कॉन के मिड-डे मील के साथ अलग से अंडे दिए जाएंगे।
1 अगस्त से कोलकाता में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा, बाद में पूरे राज्य में लागू होगा।
अंडों का वितरण स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्कूल प्रशासन द्वारा अलग से किया जाएगा।
प्राइमरी स्कूलों का मिड-डे मील बजट ₹6.78 से बढ़ाकर ₹10 प्रति छात्र किया गया।
मिड-डे मील की समग्र जिम्मेदारी इस्कॉन के पास बनी रहेगी, जो शाकाहारी भोजन परोसेगा।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार, 29 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की जिम्मेदारी इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) को सौंपे जाने के बावजूद छात्रों को अंडे से वंचित नहीं किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि 1 अगस्त से इस्कॉन के शाकाहारी भोजन के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अलग से अंडों का वितरण किया जाएगा।

मुख्य घोषणा

मुख्यमंत्री अधिकारी ने मीडियाकर्मियों को बताया कि मिड-डे मील की समग्र जिम्मेदारी इस्कॉन के पास बनी रहेगी, जो शाकाहारी और प्रोटीनयुक्त भोजन परोसेगा। इसके अतिरिक्त, स्कूल प्रशासन स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से छात्रों को अलग से अंडे उपलब्ध कराएगा। 1 अगस्त से कोलकाता के एक बड़े हिस्से में यह व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगी और बाद में पूरे राज्य में लागू की जाएगी।

बजट में बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मिड-डे मील के लिए आवंटित बजट में संशोधन किया गया है। पहले प्राइमरी स्कूलों में प्रति छात्र ₹6.78 और हाई व अपर प्राइमरी स्कूलों में ₹10 का बजट निर्धारित था। अब प्राइमरी स्कूलों के लिए भी यह राशि बढ़ाकर ₹10 प्रति छात्र कर दी गई है।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि जब कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील का काम इस्कॉन को सौंपने का निर्णय लिया गया, तो राज्य सरकार की व्यापक आलोचना हुई थी। विपक्षी दलों और नागरिक समाज के एक वर्ग ने आरोप लगाया कि यह निर्णय शाकाहारी भोजन परोसने के एजेंडे के तहत बच्चों को अंडे जैसे प्रोटीन स्रोत से वंचित करने की कोशिश है। आलोचकों का कहना था कि इससे पोषण की दृष्टि से कमज़ोर तबके के बच्चों को नुकसान होगा।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री की बुधवार की घोषणा को इसी आलोचना के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस्कॉन की धार्मिक मान्यताओं के कारण उसके भोजन में अंडे शामिल नहीं होंगे, लेकिन राज्य सरकार स्वयं सहायता समूहों के जरिए यह कमी पूरी करेगी। यह व्यवस्था दोनों पक्षों — इस्कॉन की शाकाहार नीति और छात्रों के पोषण अधिकार — के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है।

आगे क्या होगा

1 अगस्त 2026 से कोलकाता में शुरू होने वाला यह पायलट प्रोजेक्ट यह तय करेगा कि दोहरी व्यवस्था — इस्कॉन का शाकाहारी भोजन और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अंडे — व्यावहारिक रूप से कितनी सुचारु रहती है। इसके परिणामों के आधार पर इसे पूरे पश्चिम बंगाल में लागू किया जाएगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह दोहरी व्यवस्था जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू हो पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रशासनिक रूप से जटिल — एक ही भोजन के लिए दो अलग-अलग आपूर्ति श्रृंखलाएँ चलाना जमीनी स्तर पर कितनी चुनौतियाँ खड़ी करेगा, यह देखना बाकी है। असली सवाल यह है कि क्या स्वयं सहायता समूहों के पास इतनी क्षमता और निगरानी तंत्र है कि वे हर स्कूल में नियमित रूप से अंडे पहुँचा सकें। इस्कॉन को मिड-डे मील देना एक नीतिगत निर्णय था जिसने धर्म और पोषण के बीच टकराव को उजागर किया — दोहरी व्यवस्था उस टकराव को सुलझाती नहीं, बल्कि उसे प्रशासनिक स्तर पर टाल देती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में अंडे कैसे दिए जाएंगे?
इस्कॉन का शाकाहारी मिड-डे मील यथावत रहेगा और उसके साथ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्कूल प्रशासन अलग से अंडे उपलब्ध कराएगा। यह व्यवस्था 1 अगस्त 2026 से कोलकाता में पायलट के तौर पर शुरू होगी।
इस्कॉन को मिड-डे मील की जिम्मेदारी क्यों दी गई?
राज्य सरकार ने कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था इस्कॉन को सौंपी, जो शाकाहारी और प्रोटीनयुक्त भोजन परोसेगा। इस निर्णय की विपक्ष और नागरिक समाज ने आलोचना की थी।
मिड-डे मील बजट में क्या बदलाव हुआ है?
प्राइमरी स्कूलों में प्रति छात्र मिड-डे मील बजट ₹6.78 से बढ़ाकर ₹10 कर दिया गया है। हाई और अपर प्राइमरी स्कूलों में यह पहले से ₹10 था।
विपक्ष ने इस्कॉन मिड-डे मील पर क्या आपत्ति जताई थी?
विपक्षी दलों और नागरिक समाज के एक वर्ग ने आरोप लगाया था कि इस्कॉन को मिड-डे मील देने से बच्चों को अंडे जैसे प्रोटीन स्रोत से वंचित किया जा रहा है। आलोचकों का कहना था कि यह शाकाहार थोपने का प्रयास है जो कमज़ोर तबके के बच्चों के पोषण को नुकसान पहुँचाएगा।
यह पायलट प्रोजेक्ट कब और कहाँ शुरू होगा?
1 अगस्त 2026 से कोलकाता के एक बड़े हिस्से में यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। इसके परिणामों के आधार पर इसे पूरे पश्चिम बंगाल में लागू करने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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