तमिलनाडु मिड-डे मील में साप्ताहिक चिकन बिरयानी जोड़ने पर विचार, 40 लाख बच्चों को होगा फायदा
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार राज्य की मिड-डे मील योजना में सप्ताह में एक बार चिकन बिरयानी शामिल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पोषण स्तर को बेहतर बनाना और छात्रों के लिए स्कूली भोजन को अधिक आकर्षक बनाना है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो देश के सबसे पुराने स्कूल पोषण कार्यक्रमों में से एक में यह एक उल्लेखनीय बदलाव होगा।
प्रस्ताव का विवरण
अधिकारियों के अनुसार, यह प्रस्ताव अभी सरकार के विचाराधीन है और कोई भी अंतिम निर्णय सामाजिक कल्याण एवं महिला सशक्तिकरण विभाग के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा। यही विभाग पूरे राज्य में मिड-डे मील योजना के क्रियान्वयन की देखरेख करता है। प्रस्तावित चिकन बिरयानी मौजूदा मेन्यू में एक प्रोटीन-युक्त विकल्प के रूप में जोड़ी जाएगी, जिससे बच्चों को हफ्ते में कम से कम एक बार संतुलित पोषण मिल सके।
मौजूदा योजना की व्यापकता
तमिलनाडु की दोपहर भोजन योजना वर्तमान में कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों को कवर करती है और राज्य के सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 40 लाख बच्चों को इसका लाभ मिलता है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री नाश्ता योजना कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को सुबह का नाश्ता उपलब्ध कराती है और हालिया विस्तार के बाद इससे लगभग 32 लाख बच्चों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
विस्तार की संभावनाएँ
सरकार इस योजना को कक्षा 11 और 12 तक विस्तारित करने के प्रस्तावों पर भी विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है, तो लगभग 8 लाख और छात्र इस योजना के दायरे में आ जाएँगे। शिक्षा विशेषज्ञों और स्कूल प्रशासकों का लंबे समय से यह मत रहा है कि उच्च माध्यमिक छात्रों को पोषण सहायता देने से स्कूल उपस्थिति में सुधार होगा, ड्रॉपआउट दर घटेगी और विशेष रूप से कम आय वाले परिवारों के बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन में बेहतरी आएगी।
गुणवत्ता सुधार पर ज़ोर
चिकन बिरयानी के प्रस्ताव के साथ-साथ सरकार मिड-डे मील के तहत परोसे जाने वाले भोजन की समग्र गुणवत्ता सुधारने के सुझावों पर भी विचार कर रही है, जिसमें स्कूलों को आपूर्ति किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता भी शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर गुणवत्ता का भोजन इस कार्यक्रम की समग्र प्रभावशीलता को और बढ़ा सकता है।
तमिलनाडु का अग्रणी रोल
तमिलनाडु भोजन-आधारित कल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू करने में देशभर में अग्रणी राज्य रहा है और इसकी दोपहर भोजन योजना अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में काम करती है। यह कार्यक्रम आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों के नामांकन और स्कूल में ठहराव दर को बेहतर बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। यदि चिकन बिरयानी का प्रस्ताव मंजूर होता है, तो यह स्कूली पोषण के प्रति राज्य की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की दिशा में एक और ठोस कदम होगा।