तमिलनाडु विधानसभा में खाद्य व सहकारिता अनुदान पर गुरुवार को बहस, विजय सरकार की परीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा में गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग और सहकारिता विभाग की अनुदान मांगों पर विस्तृत बहस होगी। यह चर्चा मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार द्वारा चलाई जा रही विभागीय समीक्षाओं की श्रृंखला का अगला पड़ाव है, जिसमें सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और विपक्षी सदस्य दोनों अपने-अपने सवाल उठाएँगे।
बहस में कौन-से मुद्दे उठेंगे
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री वेंकटरमणन और सहकारिता मंत्री गंधीराज विधायकों के सवालों का जवाब देंगे और नई योजनाओं की घोषणा भी संभावित है। बहस में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता, उचित मूल्य की दुकानों के संचालन और उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
सहकारिता पक्ष पर सदस्य सहकारी बैंकों, क्रेडिट सोसायटियों, फसल ऋण और किसानों तथा कमज़ोर वर्गों को मिलने वाली वित्तीय सहायता के सवाल उठा सकते हैं।
विजय सरकार की प्रमुख घोषणाएँ
मई 2026 में सत्ता संभालने के बाद से विजय सरकार ने कई कल्याणकारी कदम उठाए हैं। संशोधित बजट में स्कूलों के आधुनिकीकरण और मुख्यमंत्री नाश्ता योजना को कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों तक विस्तारित करने का प्रस्ताव शामिल है। पात्र परिवारों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य बीमा कवर ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख कर दिया गया है।
सहकारिता ऋणधारकों को राहत देते हुए सरकार ने ₹75,000 तक के पात्र ऋण पूरी तरह माफ करने की घोषणा की है। ₹75,000 से ₹1 लाख के बीच के ऋणों पर अतिरिक्त छूट का भी प्रावधान किया गया है।
बुधवार की कार्यवाही और विवाद
बुधवार की विधानसभा कार्यवाही में DMK विधायक आई. पेरियासामी और ग्रामीण विकास मंत्री एन. आनंद के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री विजय को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा। सरकार ने स्पष्ट किया कि विकास निधि का वितरण निष्पक्ष रूप से होगा और परियोजनाएँ बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के लागू की जाएँगी।
विपक्ष की चुनौती
विपक्षी सदस्य सरकार की वित्तीय स्थिति, टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और योजनाओं के क्रियान्वयन की गति पर सवाल उठाते रहे हैं। गौरतलब है कि इस सत्र में पहले ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, जल संसाधन, ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज और पर्यटन एवं संस्कृति विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा हो चुकी है।
गुरुवार की यह बहस सरकार के कल्याणकारी दावों और उपभोक्ताओं, किसानों तथा सहकारी संस्थाओं से जुड़ी जमीनी चिंताओं को दूर करने की उसकी क्षमता की एक महत्त्वपूर्ण परीक्षा होगी।