तमिलनाडु विधानसभा सोमवार को फिर शुरू, छह विभागों की अनुदान मांगों पर होगी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार, 25 अगस्त 2026 को कार्यवाही फिर शुरू होगी, जब छह प्रमुख विभागों की अनुदान मांगों पर विस्तृत चर्चा होनी है। शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित रही थी। इस बहस में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के अधीन आने वाले विभाग भी शामिल हैं, जिससे इसे विशेष महत्व मिल रहा है।
किन विभागों पर होगी चर्चा
सदन में नगर प्रशासन और जलापूर्ति, सूचना, प्रचार, स्टेशनरी और प्रिंटिंग, स्कूली शिक्षा, तमिल विकास, और उच्च शिक्षा सहित छह विभागों की अनुदान मांगों पर बहस होगी। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के विधायकों के इस बहस में भाग लेने और नीतियों, खर्च तथा योजनाओं पर सवाल उठाने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री और मंत्री देंगे जवाब
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के पास नगर प्रशासन और जलापूर्ति विभाग का प्रभार है, इसलिए वे इस विभाग से जुड़े विधायकों के सवालों का जवाब देंगे। सूचना, प्रचार और स्कूली शिक्षा मंत्री राजमोहन तथा उच्च शिक्षा मंत्री विश्वनाथन भी अपने-अपने विभागों की बहस का उत्तर देंगे। चर्चा के अंत में मंत्रियों की ओर से नई विभागीय पहलों की घोषणा की भी संभावना है।
मौजूदा बजट सत्र की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि तमिलनाडु विधानसभा में 5 अगस्त को 2026-27 का आम बजट और 6 अगस्त को कृषि बजट पेश किया गया था। इन दोनों वित्तीय दस्तावेज़ों पर 7, 10 और 11 अगस्त को तीन दिन तक आम चर्चा हुई। वित्त मंत्री मारिया विल्सन और कृषि मंत्री विनोद के जवाब के बाद 12 अगस्त को बहस का समापन हुआ। इसके पश्चात स्वतंत्रता दिवस समारोह के चलते विधानसभा की कार्यवाही चार दिन के लिए स्थगित रही।
अब तक 18 विभागों को मिली मंजूरी
17 अगस्त को सदन की कार्यवाही पुनः आरंभ होने के बाद से विभाग-वार अनुदान मांगों पर चर्चा का क्रम जारी है। मौजूदा सत्र में अब तक 18 विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा हो चुकी है और उन्हें सदन की मंजूरी मिल चुकी है। 22 और 23 अगस्त को शनिवार-रविवार होने के कारण कार्यवाही स्थगित रही।
आगे क्या होगा
सोमवार को मंत्रियों के जवाब और संभावित घोषणाओं के बाद अनुदान मांगों को सदन की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। नगर प्रशासन और पेयजल आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है, क्योंकि ये विषय तमिलनाडु के शहरों, कस्बों और तेज़ी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों की आबादी को सीधे प्रभावित करते हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट आवंटन, योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत बहस जारी रहने की संभावना है।