24 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूपी 2027: ओवैसी की AIMIM का मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस, गठबंधन न बना तो 200-250 सीटों पर अकेले उतरने की तैयारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूपी 2027: ओवैसी की AIMIM का मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस, गठबंधन न बना तो 200-250 सीटों पर अकेले उतरने की तैयारी

सारांश

यूपी 2027 चुनाव से पहले AIMIM ने मुस्लिम बहुल सीटों पर बूथ स्तर तक तैयारी शुरू कर दी है। गठबंधन पहली प्राथमिकता है, लेकिन सितंबर तक सहमति न बनी तो पार्टी 200-250 सीटों पर अकेले उतरेगी — जो विपक्षी वोटों के बंटवारे का बड़ा कारण बन सकती है।

मुख्य बातें

AIMIM ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए मुस्लिम प्रभावी सीटों पर बूथ स्तर तक संगठन मज़बूत करना शुरू किया।
पार्टी की पहली प्राथमिकता गठबंधन; सितंबर 2026 तक सहमति न बनी तो 200 से 250 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी।
प्रयागराज , बहराइच , सहारनपुर , मुरादाबाद , रामपुर और अमरोहा AIMIM की प्राथमिक सक्रियता वाले क्षेत्र।
2023 के निकाय चुनावों में स्थानीय जीत को विधानसभा तक ले जाने की रणनीति।
विश्लेषकों के अनुसार, AIMIM का अकेले लड़ना विपक्षी मतों का बंटवारा कर BJP को लाभ दे सकता है।
'भीम-मीम' समीकरण के तहत चंद्रशेखर आज़ाद और पल्लवी पटेल के साथ संभावित तालमेल भी विचाराधीन।

आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अपनी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी की प्राथमिकता किसी विपक्षी दल के साथ सम्मानजनक गठबंधन की है, लेकिन यदि सितंबर 2026 तक सीट-बंटवारे पर सहमति नहीं बनी, तो AIMIM प्रदेश की 200 से 250 विधानसभा सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी में है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी स्वयं पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर तराई क्षेत्र के बहराइच तक दौरा कर पार्टी की संभावनाओं का आकलन कर चुके हैं।

किन सीटों पर है AIMIM की नज़र

पार्टी ने फिलहाल प्रयागराज, बहराइच, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर और अमरोहा की कई विधानसभा सीटों पर अपनी सक्रियता बढ़ाई है। इन क्षेत्रों में संगठन को बूथ स्तर तक मज़बूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पार्टी की रणनीति उन विधानसभा क्षेत्रों पर केंद्रित है जहाँ मुस्लिम मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं — पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर अवध और पूर्वांचल के हिस्सों तक।

2023 निकाय चुनाव से मिली प्रेरणा

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत के अनुसार, वर्ष 2023 के निकाय चुनावों में AIMIM के कई प्रत्याशियों की जीत ने पार्टी को स्थानीय स्तर पर एक राजनीतिक आधार दिया। अब पार्टी इसी स्थानीय सफलता को विधानसभा चुनाव तक विस्तारित करने की रणनीति पर काम कर रही है। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनावों में AIMIM का प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा और पार्टी अब तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपना खाता नहीं खोल सकी है।

विपक्षी समीकरण पर असर

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हुज्जत रज़ा के अनुसार, यदि AIMIM गठबंधन से बाहर रहकर चुनाव लड़ती है तो इसका असर मुख्य रूप से विपक्षी मतों के बंटवारे के रूप में सामने आ सकता है, जिसका लाभ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिलने की संभावना रहेगी। वहीं, यदि समाजवादी पार्टी (SP)-कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन AIMIM को साथ लेता है, तो चुनावी तस्वीर भिन्न हो सकती है।

गठबंधन के संभावित विकल्प

रज़ा ने यह भी कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद और पल्लवी पटेल जैसे नेताओं व दलों के साथ संभावित तालमेल को 'भीम-मीम' समीकरण के नज़रिए से देखा जा रहा है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) के साथ गठबंधन की संभावना भी पार्टी के विकल्पों में शामिल है। हालाँकि, अतीक अहमद के परिवार से जुड़े किसी चेहरे को चुनाव मैदान में उतारने की संभावना को लेकर अभी किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी।

पार्टी नेतृत्व का बयान

AIMIM सेंट्रल जोन के अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी ने कहा, 'हम BJP को रोकने के लिए सभी विपक्षी दलों के साथ सम्मानजनक हिस्सेदारी वाले गठबंधन के पक्ष में हैं। BSP के साथ गठबंधन की संभावना हो या चंद्रशेखर आज़ाद और अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का विकल्प — हमारा उद्देश्य BJP को रोकना है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे प्रदेश से चुनाव लड़ने के लिए लगातार आवेदन मिल रहे हैं और बूथ स्तर तक तैयारियाँ जारी हैं। यदि सितंबर 2026 तक गठबंधन की तस्वीर साफ नहीं हुई, तो AIMIM स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह फिर 'वोट-कटवा' की भूमिका तक सीमित रहेगी। विश्लेषकों की चेतावनी सटीक है: AIMIM की स्वतंत्र मौजूदगी SP-कांग्रेस गठबंधन के लिए उतनी ही बड़ी चुनौती है जितनी BJP के लिए अवसर। 'भीम-मीम' समीकरण सैद्धांतिक रूप से आकर्षक लगता है, लेकिन इसका व्यावहारिक इतिहास बिहार और यूपी दोनों में निराशाजनक रहा है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी 2027 चुनाव में AIMIM की क्या रणनीति है?
AIMIM की पहली प्राथमिकता विपक्षी दलों के साथ सम्मानजनक गठबंधन बनाना है। यदि सितंबर 2026 तक सीट-बंटवारे पर सहमति नहीं बनती, तो पार्टी उत्तर प्रदेश की 200 से 250 विधानसभा सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
AIMIM उत्तर प्रदेश में किन सीटों पर ध्यान दे रही है?
पार्टी ने प्रयागराज, बहराइच, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर और अमरोहा की कई विधानसभा सीटों पर सक्रियता बढ़ाई है। ये वे क्षेत्र हैं जहाँ मुस्लिम मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं।
AIMIM के अकेले चुनाव लड़ने से विपक्ष पर क्या असर पड़ेगा?
राजनीतिक विश्लेषक हुज्जत रज़ा के अनुसार, AIMIM के स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरने से मुख्य रूप से विपक्षी मतों का बंटवारा होगा, जिसका सीधा लाभ BJP को मिल सकता है। वहीं, यदि SP-कांग्रेस गठबंधन AIMIM को साथ लेता है, तो विपक्ष को इसका फायदा हो सकता है।
AIMIM को यूपी में राजनीतिक आधार कहाँ से मिला?
2023 के निकाय चुनावों में AIMIM के कई प्रत्याशियों ने स्थानीय निकाय चुनावों में जीत दर्ज की थी। पार्टी अब इसी स्थानीय चुनावी सफलता को विधानसभा चुनाव तक ले जाने की रणनीति पर काम कर रही है।
'भीम-मीम' समीकरण क्या है और इसकी संभावना कितनी है?
'भीम-मीम' समीकरण दलित और मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट करने की राजनीतिक अवधारणा है, जिसमें चंद्रशेखर आज़ाद और पल्लवी पटेल जैसे नेताओं के साथ AIMIM का तालमेल शामिल है। हालाँकि, विश्लेषकों के अनुसार इस समीकरण का व्यावहारिक इतिहास बिहार और यूपी में अब तक सीमित रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले