1 अक्टूबर 2026
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कर्नाटक में 253 दवाओं की लैंडिंग कॉस्ट और MRP में 50 गुना तक का अंतर, राज्य ने केंद्र से हस्तक्षेप माँगा

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कर्नाटक में 253 दवाओं की लैंडिंग कॉस्ट और MRP में 50 गुना तक का अंतर, राज्य ने केंद्र से हस्तक्षेप माँगा

सारांश

कर्नाटक में FDA की जाँच ने 253 दवाओं में लैंडिंग कॉस्ट और MRP के बीच 50 गुना तक के अंतर का खुलासा किया है — कैंसर से जूझ रहे मरीज़ वास्तविक कीमत से दर्जनों गुना अधिक चुका रहे हैं। राज्य ने केंद्र से DPCO संशोधन और ट्रेड मार्जिन नियंत्रण की माँग की है।

मुख्य बातें

कर्नाटक FDA ने निरीक्षण में 253 दवाओं में लैंडिंग कॉस्ट और MRP के बीच असामान्य अंतर पाया, जो कुछ मामलों में 50 गुना से अधिक है।
गुफीपोल की लैंडिंग कॉस्ट ₹86 बनाम MRP ₹4,528 ( 52.6 गुना ); बेवाटास 400 MG की खरीद कीमत ₹5,850 बनाम MRP ₹62,690 ।
25-26 सितंबर 2026 के सत्यापन अभियान में 768+ कंज्यूमेबल आइटम और 189 महंगी दवाओं की जाँच की गई।
स्वास्थ्य मंत्री यू.टी.
खादर ने 23 सितंबर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर DPCO संशोधन , ट्रेड मार्जिन नियंत्रण और अंतर-मंत्रालयी विशेषज्ञ समूह गठित करने की माँग की।
अगले चरण में एंटी-रेट्रोवायरल दवाएँ , नई पीढ़ी की एंटीबायोटिक्स और मेडिकल उपकरणों की जाँच होगी।

कर्नाटक सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 को खुलासा किया कि राज्य के अस्पतालों में कैंसर की दवाओं, एंटीबायोटिक्स, मेडिकल उपकरणों और अन्य अस्पताल सामग्री की संस्थागत खरीद कीमत (लैंडिंग कॉस्ट) और अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के बीच चौंकाने वाला अंतर सामने आया है — कुछ उत्पादों में यह अंतर 50 गुना से भी अधिक पाया गया। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कर्नाटक ने यह मामला केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के समक्ष उठाया है और राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत हस्तक्षेप की माँग की है।

निरीक्षण में क्या सामने आया

FDA कर्नाटक ने कैंसर मरीजों का उपचार करने वाले अस्पतालों और अन्य प्रतिष्ठानों के हालिया निरीक्षण के दौरान 253 दवाओं में लैंडिंग कॉस्ट और एमआरपी के बीच असामान्य रूप से बड़े अंतर की पहचान की। अधिकारियों के अनुसार, दवा कंपनियाँ अस्पतालों को भारी छूट पर संस्थागत मूल्य पर दवाएँ उपलब्ध कराती हैं, लेकिन मरीजों से प्रिंटेड एमआरपी या उसके निकट की राशि वसूल की जाती है।

25 और 26 सितंबर 2026 को बेंगलुरु समेत कर्नाटक के विभिन्न जिलों में थोक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों में विशेष सत्यापन अभियान चलाया गया, जिसमें 768 से अधिक कंज्यूमेबल आइटम और 189 महंगी दवाओं की जाँच की गई।

चौंकाने वाले उदाहरण: कीमतों का अंतर

निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, Critikare द्वारा आपूर्ति की जाने वाली गुफीपोल की लैंडिंग कॉस्ट ₹86 थी, जबकि उसका एमआरपी ₹4,528 दर्ज किया गया — यानी 52.6 गुना का अंतर। गुफीसाइक्लिन-50 इंजेक्शन की लैंडिंग कॉस्ट ₹160 के मुकाबले एमआरपी ₹7,110 था, जो 44.4 गुना का फर्क है।

टर्लिटिस की लैंडिंग कॉस्ट ₹118 के सामने एमआरपी ₹4,416 और टैक्सोकेयर 120 MG की खरीद कीमत ₹1,000 के मुकाबले एमआरपी ₹21,617 दर्ज किया गया। कैनमैब 440 MG की लैंडिंग कॉस्ट ₹6,600 और एमआरपी ₹57,457, तथा बेवाटास 400 MG इंजेक्शन की खरीद कीमत ₹5,850 के विपरीत एमआरपी ₹62,690 रही।

अस्पताल में उपयोग होने वाली सामग्री में भी यही स्थिति पाई गई — एक एडल्ट नेबुलाइज़र मास्क की लैंडिंग कॉस्ट ₹44.50 और एमआरपी ₹950, तथा IV सेट की खरीद कीमत ₹14.75 जबकि एमआरपी ₹295 थी।

सरकार की माँग और प्रस्ताव

कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने 23 सितंबर 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की। उन्होंने मरीजों के बिल में लैंडिंग कॉस्ट और एमआरपी दोनों का अनिवार्य उल्लेख, ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के तहत मूल्य-नियंत्रित दवाओं का दायरा बढ़ाने और ज़रूरी महंगी दवाओं व मेडिकल सामग्री पर ट्रेड मार्जिन को नियंत्रित करने का आग्रह किया।

राज्य ने दवा (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 में संशोधन, ट्रेड मार्जिन को तर्कसंगत बनाने, नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स (NLEM) का दायरा बढ़ाने, तथा ऑडिट और प्रवर्तन तंत्र तैयार करने का भी सुझाव दिया है। इसके साथ ही इस मुद्दे के अध्ययन के लिए एक अंतर-मंत्रालयी विशेषज्ञ समूह गठित करने की माँग भी की गई है।

आम मरीजों पर असर

गौरतलब है कि कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज पहले से ही भारी इलाज खर्च का बोझ उठाते हैं। लैंडिंग कॉस्ट और एमआरपी के बीच यह असाधारण अंतर यह दर्शाता है कि मरीज वास्तविक लागत से कई गुना अधिक भुगतान कर सकते हैं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता की माँग पूरे देश में तेज़ हो रही है।

आगे क्या होगा

FDA और ड्रग्स एनफोर्समेंट अधिकारियों का सत्यापन अभियान चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। अगले चरण में एंटी-रेट्रोवायरल दवाओं, महत्वपूर्ण और नई पीढ़ी की एंटीबायोटिक्स, मेडिकल उपकरणों और अस्पताल सामग्री को शामिल किया जाएगा। अभियान के निष्कर्ष केंद्र सरकार को सौंपे जाएँगे। कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य सेवाओं की बिलिंग में पारदर्शिता और मरीजों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाने के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस प्रणालीगत विफलता का नवीनतम प्रमाण है जो भारत के फार्मास्युटिकल मूल्य-नियंत्रण ढाँचे को दशकों से कमज़ोर करती रही है — DPCO 2013 बड़े पैमाने पर जेनेरिक दवाओं को नियंत्रित करता है, लेकिन अधिकांश स्पेशलिटी और कैंसर दवाएँ उसके दायरे से बाहर रहती हैं। असली विडंबना यह है कि जो कंपनियाँ अस्पतालों को भारी छूट देती हैं और मरीजों से MRP वसूल करती हैं, वे तकनीकी रूप से कानून का उल्लंघन नहीं कर रहीं — यह खामी नीति में है, नीयत में नहीं। केंद्र पर अब दबाव है कि वह NLEM का विस्तार करे और ट्रेड मार्जिन रेशनलाइज़ेशन को केवल प्रस्ताव नहीं, बल्कि बाध्यकारी व्यवस्था बनाए — अन्यथा यह भी पिछली समितियों की अनुशंसाओं की लंबी सूची में जुड़ जाएगा जो अलमारियों में धूल खाती रहीं।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में दवाओं की लैंडिंग कॉस्ट और MRP में इतना अंतर क्यों है?
दवा कंपनियाँ अस्पतालों को संस्थागत मूल्य पर भारी छूट के साथ दवाएँ उपलब्ध कराती हैं, लेकिन मरीजों से प्रिंटेड MRP या उसके निकट की राशि वसूल की जाती है। FDA कर्नाटक के निरीक्षण में 253 दवाओं में यह अंतर 50 गुना तक पाया गया, जो मौजूदा मूल्य-नियंत्रण ढाँचे की कमज़ोरी को उजागर करता है।
कर्नाटक सरकार ने केंद्र से क्या माँगें रखी हैं?
स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने 23 सितंबर 2026 को केंद्र को पत्र लिखकर मरीजों के बिल में लैंडिंग कॉस्ट और MRP दोनों का अनिवार्य उल्लेख, DPCO 2013 में संशोधन, ट्रेड मार्जिन नियंत्रण, NLEM का दायरा बढ़ाने और अंतर-मंत्रालयी विशेषज्ञ समूह गठित करने की माँग की है।
FDA कर्नाटक के सत्यापन अभियान में क्या पाया गया?
25 और 26 सितंबर 2026 को बेंगलुरु समेत कर्नाटक के विभिन्न जिलों में चलाए गए अभियान में 768 से अधिक कंज्यूमेबल आइटम और 189 महंगी दवाओं की जाँच हुई। इसके निष्कर्ष केंद्र सरकार को सौंपे जाएँगे और अभियान चरणबद्ध रूप से जारी रहेगा।
किन दवाओं में सबसे अधिक मूल्य अंतर पाया गया?
गुफीपोल की लैंडिंग कॉस्ट ₹86 के मुकाबले MRP ₹4,528 (52.6 गुना), बेवाटास 400 MG इंजेक्शन ₹5,850 बनाम ₹62,690, और टैक्सोकेयर 120 MG की खरीद कीमत ₹1,000 बनाम MRP ₹21,617 दर्ज की गई। ये सभी मुख्यतः कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएँ हैं।
इस मुद्दे का आम मरीजों पर क्या असर पड़ता है?
कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीज़ पहले से भारी इलाज खर्च वहन करते हैं; लैंडिंग कॉस्ट और MRP के बीच यह अंतर उनकी जेब पर कई गुना अतिरिक्त बोझ डालता है। बिलिंग में पारदर्शिता और ट्रेड मार्जिन नियंत्रण लागू होने पर मरीजों की आउट-ऑफ-पॉकेट लागत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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