18 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

137 कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% सीमित, NPPA के फैसले से कीमतें 70% तक घटने की उम्मीद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
137 कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% सीमित, NPPA के फैसले से कीमतें 70% तक घटने की उम्मीद

सारांश

सरकार ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन MRP के 30% पर सीमित कर दिया है। 9 नवंबर 2026 से लागू इस फैसले से पेम्ब्रोलिज़ुमैब, बेवासिजुमैब समेत कई महँगी दवाओं की कीमतें 70% तक गिर सकती हैं — 2019 के पायलट में 526 ब्रांडों की MRP 90% तक कम हुई थी।

मुख्य बातें

NPPA ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन MRP के 30% पर सीमित किया।
नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से देशभर की फार्मेसियों और अस्पतालों में लागू होंगी।
दवाओं की कीमत 70% तक कम होने की उम्मीद; 20 से अधिक प्रकार के कैंसर की दवाएँ शामिल।
प्रमुख दवाओं में पेम्ब्रोलिज़ुमैब , डुरवलुमैब , ओसिमर्टिनिब , बेवासिजुमैब और डेनोसुमैब शामिल।
2019 के पायलट में 42 दवाओं पर समान सीमा लगाने के बाद 526 ब्रांडों की MRP 90% तक घटी थी।
निर्माता फार्मा सही दाम ऐप और NPPA वेबसाइट पर संशोधित कीमतें प्रदर्शित करेंगे।

नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30 प्रतिशत पर सीमित कर दिया है, जिससे कई दवाओं की कीमतें 70 प्रतिशत तक कम होने की उम्मीद है। यह निर्णय रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल्स विभाग के अंतर्गत ट्रेड मार्जिन रेशनलाइज़ेशन (TMR) कार्यक्रम का हिस्सा है और 9 नवंबर 2026 से प्रभावी होगा।

मुख्य घटनाक्रम

सरकारी गजट अधिसूचना के प्रकाशन के 7 दिनों के भीतर सभी दवा निर्माताओं को NPPA को संशोधित मूल्य सूची सौंपनी होगी। निर्माताओं को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नई कीमतें प्रदर्शित करनी होंगी और सभी खुदरा विक्रेताओं तथा अस्पतालों को इसकी सूचना देनी होगी।

9 नवंबर 2026 से खुदरा फार्मेसियाँ और अस्पताल संशोधित कम दरें वसूलेंगे। अस्पतालों को अपनी वेबसाइटों पर भी नई कीमतें प्रमुखता से दर्शानी होंगी। मरीज़ और परिजन फार्मा सही दाम ऐप और NPPA की आधिकारिक वेबसाइट के ज़रिए संशोधित कीमतों की जाँच कर सकते हैं।

किन दवाओं पर होगा असर

इस अधिसूचना के दायरे में आने वाली 137 दवाओं में 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के उपचार में उपयोग होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवाएँ शामिल हैं। इनमें ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर में प्रयुक्त डेनोसुमैब, न्यूट्रोपेनिया की रोकथाम के लिए इस्तेमाल होने वाली पेगफिलग्रास्टिम, तथा कोलन, अंडाशय और सर्वाइकल कैंसर में स्वीकृत बेवासिजुमैब भी शामिल हैं।

व्यापक रूप से निर्धारित की जाने वाली पेम्ब्रोलिज़ुमैब, डुरवलुमैब और ओसिमर्टिनिब जैसी दवाओं की MRP भी अधिक सुलभ होने की उम्मीद है। ये दवाएँ फिलहाल मरीज़ों के लिए भारी वित्तीय बोझ का कारण बनती हैं।

2019 के पायलट से जुड़ाव

यह हस्तक्षेप NPPA के 2019 के पायलट कार्यक्रम पर आधारित है, जिसके तहत 42 कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को 30 प्रतिशत पर सीमित किया गया था। उस पायलट के बाद गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के 526 ब्रांडों की MRP में 90 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई थी।

गौरतलब है कि TMR नीति का मूल उद्देश्य वितरण श्रृंखला — निर्माता से थोक व्यापारी और खुदरा विक्रेता तक — में अत्यधिक मार्जिन को नियंत्रित करना है, ताकि अंतिम उपभोक्ता यानी मरीज़ को उचित मूल्य पर दवा मिल सके।

आम जनता पर असर

सरकार के अनुसार इस पहल का सीधा लाभ कैंसर मरीज़ों और उनके परिवारों को मिलेगा, जो अक्सर इलाज के दौरान भारी आर्थिक दबाव में होते हैं। भारत में कैंसर उपचार की ऊँची लागत मरीज़ों को समय पर चिकित्सा लेने से रोकती रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और सामर्थ्य को लेकर नीतिगत बहस तेज़ हुई है। आलोचकों का कहना है कि केवल ट्रेड मार्जिन नियंत्रण पर्याप्त नहीं है — दवाओं की मूल निर्माण लागत को भी नियामक दायरे में लाने की ज़रूरत है।

क्या होगा आगे

निर्माताओं द्वारा संशोधित मूल्य अधिसूचना के बाद 9 नवंबर 2026 को नई दरें देशभर की फार्मेसियों और अस्पतालों में लागू होंगी। NPPA अनुपालन की निगरानी करेगी और उल्लंघन पर कार्रवाई का अधिकार उसके पास रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम की दीर्घकालिक सफलता क्रियान्वयन की सख्ती पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ट्रेड मार्जिन नियंत्रण केवल वितरण श्रृंखला की अक्षमता को संबोधित करता है — दवा की मूल निर्माण लागत और पेटेंट-संरक्षित मूल्य निर्धारण को नहीं, जो असली बाधाएँ हैं। 2019 के पायलट का '90% तक MRP घटने' का आँकड़ा प्रभावशाली लगता है, पर सवाल यह है कि क्या वह गिरावट वास्तव में मरीज़ के हाथ तक पहुँची या केवल कागज़ पर रही। अनुपालन की निगरानी तंत्र और उल्लंघन पर दंड का ब्यौरा अभी अस्पष्ट है। जब तक क्रियान्वयन की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, यह नीति पूर्व की घोषणाओं की तरह 'महत्त्वपूर्ण किंतु अधूरी' बनी रह सकती है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NPPA ने कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन सीमा का फैसला क्यों किया?
NPPA का यह निर्णय ट्रेड मार्जिन रेशनलाइज़ेशन (TMR) कार्यक्रम के तहत आया है, जिसका उद्देश्य वितरण श्रृंखला में अत्यधिक मार्जिन को नियंत्रित कर मरीज़ों तक दवाएँ किफायती दाम पर पहुँचाना है। सरकार का लक्ष्य कैंसर उपचार के वित्तीय बोझ को कम करना है।
नई कीमतें कब से लागू होंगी और प्रक्रिया क्या है?
संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगी। गजट अधिसूचना के प्रकाशन के 7 दिनों के भीतर सभी निर्माताओं को NPPA को संशोधित मूल्य सूची देनी होगी और अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी होगी।
इस फैसले से कौन-सी प्रमुख कैंसर दवाएँ सस्ती होंगी?
पेम्ब्रोलिज़ुमैब, डुरवलुमैब, ओसिमर्टिनिब, बेवासिजुमैब, डेनोसुमैब और पेगफिलग्रास्टिम समेत 137 दवाएँ इस सीमा के दायरे में आती हैं। ये दवाएँ ब्रेस्ट, प्रोस्टेट, कोलन, अंडाशय, सर्वाइकल कैंसर सहित 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के इलाज में उपयोग होती हैं।
2019 के पायलट कार्यक्रम का क्या परिणाम रहा था?
NPPA के 2019 के पायलट में 42 कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% सीमित करने के बाद गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के 526 ब्रांडों की MRP 90% तक कम हो गई थी। मौजूदा फैसला उसी सफल पायलट का विस्तार है।
मरीज़ संशोधित कीमतें कैसे जाँच सकते हैं?
मरीज़ और परिजन फार्मा सही दाम ऐप और NPPA की आधिकारिक वेबसाइट के ज़रिए संशोधित कीमतें देख सकते हैं। सभी खुदरा फार्मेसियाँ और अस्पताल भी अपने परिसर व वेबसाइट पर नई कीमतें प्रमुखता से दर्शाने के लिए बाध्य होंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 15 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 3 सप्ताह पहले
  8. 1 साल पहले