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भारत-आसियान द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में ₹128 अरब डॉलर पर पहुँचा, AITIGA समीक्षा में तेज़ी

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भारत-आसियान द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में ₹128 अरब डॉलर पर पहुँचा, AITIGA समीक्षा में तेज़ी

सारांश

भारत-आसियान व्यापार 2025-26 में 128 अरब डॉलर के पार पहुँचा — और अब नई दिल्ली में चल रही 13वीं AITIGA संयुक्त समिति बैठक इस रिश्ते को नई संरचना देने की कोशिश है। रूल्स ऑफ ओरिजिन से लेकर मार्केट एक्सेस तक, हर अध्याय पर घड़ी चल रही है।

मुख्य बातें

भारत-आसियान द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 128 अरब डॉलर हो गया।
आसियान भारत के वैश्विक व्यापार में 11 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ प्रमुख व्यापारिक साझेदार है।
13वीं AITIGA संयुक्त समिति बैठक 6 से 10 जुलाई तक नई दिल्ली में आयोजित हो रही है।
AITIGA की 8 उप-समितियों में से 3 की बैठकें समानांतर रूप से चल रही हैं — SC-CPTF, SC-NTMA और SC-ROO।
बैठक की सह-अध्यक्षता नितिन कुमार यादव (भारत) और मस्तुरा अहमद मुस्तफा (मलेशिया) ने की।

भारत और आसियान देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 128 अरब डॉलर हो गया है, जो दोनों पक्षों के बीच गहरी होती आर्थिक साझेदारी का संकेत है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 8 जुलाई को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी। आसियान फिलहाल भारत के वैश्विक व्यापार में करीब 11 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ देश के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है।

13वीं AITIGA संयुक्त समिति बैठक: मुख्य घटनाक्रम

इस आर्थिक रिश्ते को और प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से भारत 6 से 10 जुलाई तक 13वीं आसियान-भारत ट्रेड इन गुड्स एग्रीमेंट (AITIGA) संयुक्त समिति (JC) और उससे जुड़ी बैठकों की मेज़बानी कर रहा है। इन बैठकों का मकसद AITIGA समीक्षा के अंतर्गत चल रही वार्ता की प्रगति का मूल्यांकन करना और शेष अध्यायों को शीघ्र पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाना है।

गौरतलब है कि AITIGA मूल रूप से 2010 में लागू हुआ था और तब से इसकी समीक्षा की माँग उठती रही है। भारतीय उद्योग जगत लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि इस समझौते के तहत व्यापार घाटा भारत के पक्ष में नहीं रहा, इसलिए इसकी संरचनात्मक समीक्षा ज़रूरी है।

उप-समितियों को रणनीतिक मार्गदर्शन

संयुक्त समिति की बैठक में उप-समितियों को उनके कार्यक्षेत्रों में रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया गया और AITIGA समीक्षा के बाकी बचे अध्यायों को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया। मंत्रालय के बयान के अनुसार, 'बातचीत की गति बनाए रखने के लिए उप-समितियों को सहमत समय-सीमा के अंदर ठोस नतीजे हासिल करने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।'

AITIGA संयुक्त समिति के अंतर्गत कुल आठ उप-समितियाँ हैं, जिनमें से तीन की बैठकें इस 13वीं JC बैठक के साथ-साथ आयोजित हो रही हैं — कस्टम्स प्रक्रियाओं और व्यापार सुगमता उप-समिति (SC-CPTF), नेशनल ट्रीटमेंट और मार्केट एक्सेस उप-समिति (SC-NTMA), और रूल्स ऑफ ओरिजिन उप-समिति (SC-ROO)

बैठक की सह-अध्यक्षता

13वीं AITIGA संयुक्त समिति बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव नितिन कुमार यादव और मलेशिया के निवेश, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय की डिप्टी सेक्रेटरी जनरल (व्यापार) मस्तुरा अहमद मुस्तफा ने संयुक्त रूप से की। यह बैठक भारत और आसियान के बीच सहयोग बढ़ाने तथा रचनात्मक वार्ता को आगे ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रही है।

आम व्यापार और उद्योग पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'एक्ट ईस्ट' नीति को व्यावहारिक धरातल देने की कोशिश कर रहा है। AITIGA की सफल समीक्षा से भारतीय निर्यातकों को आसियान बाज़ारों में बेहतर पहुँच मिल सकती है, विशेष रूप से कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान और कृषि उत्पादों के क्षेत्र में। आने वाले महीनों में वार्ता के नतीजे तय करेंगे कि यह साझेदारी अगले स्तर पर पहुँचती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके भीतर एक असुविधाजनक सच्चाई भी है — भारत का आसियान के साथ व्यापार घाटा लगातार बढ़ता रहा है, और AITIGA को इसके लिए आंशिक रूप से ज़िम्मेदार माना जाता है। 13वीं संयुक्त समिति बैठक में 'गति बनाए रखने' की भाषा उत्साहजनक है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या रूल्स ऑफ ओरिजिन और मार्केट एक्सेस पर होने वाले बदलाव भारतीय निर्यातकों को वास्तविक लाभ देंगे। 'एक्ट ईस्ट' नीति के एक दशक बाद भी यदि समझौते की संरचना एकतरफा बनी रही, तो व्यापार वृद्धि का श्रेय लेना पर्याप्त नहीं होगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और आसियान के बीच 2025-26 में कितना व्यापार हुआ?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और आसियान देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 128 अरब डॉलर हो गया। आसियान अब भारत के वैश्विक व्यापार में करीब 11 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है।
AITIGA क्या है और इसकी समीक्षा क्यों हो रही है?
AITIGA यानी आसियान-भारत ट्रेड इन गुड्स एग्रीमेंट एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता है जो 2010 में लागू हुआ था। भारतीय उद्योग जगत की माँग पर इसकी समीक्षा की जा रही है ताकि रूल्स ऑफ ओरिजिन, मार्केट एक्सेस और कस्टम्स प्रक्रियाओं को अधिक संतुलित बनाया जा सके।
13वीं AITIGA संयुक्त समिति बैठक कब और कहाँ हो रही है?
यह बैठक 6 से 10 जुलाई 2025 तक नई दिल्ली में आयोजित हो रही है। इसकी मेज़बानी भारत कर रहा है और इसमें AITIGA समीक्षा की प्रगति का मूल्यांकन किया जा रहा है।
इस बैठक में कौन-सी उप-समितियाँ शामिल हैं?
13वीं JC बैठक के साथ-साथ तीन उप-समितियों की बैठकें हो रही हैं — कस्टम्स प्रक्रियाओं और व्यापार सुगमता (SC-CPTF), नेशनल ट्रीटमेंट और मार्केट एक्सेस (SC-NTMA), और रूल्स ऑफ ओरिजिन (SC-ROO)। कुल मिलाकर AITIGA के तहत आठ उप-समितियाँ हैं।
AITIGA समीक्षा से भारतीय व्यापार को क्या फायदा होगा?
सफल समीक्षा से भारतीय निर्यातकों को आसियान बाज़ारों में बेहतर पहुँच मिल सकती है, विशेष रूप से कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान और कृषि उत्पादों के क्षेत्र में। रूल्स ऑफ ओरिजिन में बदलाव से तीसरे देशों के ज़रिये होने वाले व्यापार पर भी नियंत्रण बेहतर हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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