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प्रम्बानन मंदिर संरक्षण में भारत की भूमिका: मोदी-प्रबोवो ने ASI परियोजना का किया शुभारंभ

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प्रम्बानन मंदिर संरक्षण में भारत की भूमिका: मोदी-प्रबोवो ने ASI परियोजना का किया शुभारंभ

सारांश

बोरोबुदुर के बाद अब प्रम्बानन — भारत की सांस्कृतिक कूटनीति दक्षिण-पूर्व एशिया में एक और मील का पत्थर छू रही है। PM मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो ने 9वीं सदी के इस हिंदू मंदिर परिसर में ASI की संरक्षण परियोजना शुरू कर साझा सभ्यतागत विरासत को नई पहचान दी।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने 8 जुलाई 2026 को प्रम्बानन मंदिर परिसर में ASI संरक्षण परियोजना का शुभारंभ किया।
9वीं शताब्दी में निर्मित प्रम्बानन इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है, जो भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव को समर्पित है।
यह परियोजना 2025 में राष्ट्रपति प्रबोवो की भारत यात्रा के दौरान बनी सहमति का परिणाम है।
ASI इससे पहले बोरोबुदुर मंदिर परिसर का विस्तृत दस्तावेजीकरण कर चुका है।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने इसे दोनों देशों के सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों का स्थायी प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने बुधवार, 8 जुलाई 2026 को योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रम्बानन मंदिर परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की संरक्षण एवं पुनर्स्थापन परियोजना का औपचारिक शुभारंभ किया। दोनों नेताओं ने इस अवसर पर एक प्रतीकात्मक पट्टिका का अनावरण किया, जो भारत और इंडोनेशिया के बीच सभ्यतागत सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस पहल को दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का स्थायी प्रतीक बताया है।

प्रम्बानन मंदिर परिसर का ऐतिहासिक महत्व

9वीं शताब्दी में निर्मित प्रम्बानन मंदिर परिसर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर समूह है। यह परिसर हिंदू त्रिमूर्ति — भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव — को समर्पित है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह स्थल भारत-इंडोनेशिया के हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक जुड़ाव की जीती-जागती मिसाल है।

गौरतलब है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में हिंदू और बौद्ध सभ्यता के प्रसार का प्रभाव इंडोनेशिया के द्वीपसमूह पर गहराई से पड़ा था, और प्रम्बानन उसी विरासत की अमूल्य धरोहर है।

परियोजना की पृष्ठभूमि

यह संरक्षण परियोजना वर्ष 2025 में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की भारत यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच बनी सहमति का परिणाम है। उस यात्रा में प्रम्बानन मंदिर परिसर की पुनर्स्थापना में भारत की सहायता की संभावनाओं पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी। इस सहमति को अब व्यावहारिक रूप देते हुए ASI को परियोजना का नेतृत्व सौंपा गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ सांस्कृतिक और सामरिक संबंधों को नई गहराई देने में जुटा है।

ASI का अनुभव और पूर्व योगदान

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इससे पहले इंडोनेशिया के बोरोबुदुर मंदिर परिसर का विस्तृत दस्तावेजीकरण कर चुका है। दक्षिण-पूर्व एशिया में कई यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण और पुनर्स्थापन में ASI का सफल अनुभव इस नई परियोजना के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ASI की तकनीकी दक्षता और प्राचीन भारतीय वास्तुशिल्प की समझ इस परियोजना में विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।

सांस्कृतिक कूटनीति का नया आयाम

MEA के बयान के अनुसार, यह परियोजना केवल एक संरक्षण कार्य नहीं है — यह भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का एक सशक्त उदाहरण है। प्रम्बानन के संरक्षण में भारत का सहयोग यह संदेश देता है कि साझा सभ्यतागत विरासत की रक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दीर्घकालिक और ठोस है।

आगे चलकर इस परियोजना के परिणाम दोनों देशों के बीच पर्यटन, शोध और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और मजबूत करने की संभावना रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि ASI के पास घरेलू स्तर पर भी सैकड़ों संरक्षण-प्रतीक्षी स्थल हैं — ऐसे में विदेशी परियोजनाओं की प्राथमिकता पर बहस ज़रूरी है। साथ ही, इस परियोजना की समयसीमा, बजट और जवाबदेही का ढाँचा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, जो पारदर्शिता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सांस्कृतिक विरासत की साझेदारी तभी असरदार होती है जब वह प्रतीकात्मकता से आगे बढ़कर दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग में बदले।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रम्बानन मंदिर परिसर में भारत की ASI क्या काम करेगी?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इंडोनेशिया के योग्याकार्ता स्थित प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन का कार्य करेगी। यह परियोजना 8 जुलाई 2026 को PM मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो द्वारा औपचारिक रूप से शुरू की गई।
प्रम्बानन मंदिर परिसर क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रम्बानन इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है, जिसका निर्माण 9वीं शताब्दी में हुआ था। यह भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव को समर्पित है और यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल है — भारत-इंडोनेशिया के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक।
यह परियोजना कब और कैसे तय हुई?
यह परियोजना 2025 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की भारत यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच बनी सहमति का परिणाम है। उस यात्रा में प्रम्बानन की पुनर्स्थापना में भारत की सहायता पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी, जिसे अब व्यावहारिक रूप दिया गया है।
क्या ASI ने पहले भी इंडोनेशिया में कोई कार्य किया है?
हाँ, ASI इससे पहले इंडोनेशिया के बोरोबुदुर मंदिर परिसर का विस्तृत दस्तावेजीकरण कर चुकी है। इसके अलावा, दक्षिण-पूर्व एशिया में कई यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण में ASI का अनुभव रहा है।
इस परियोजना का भारत-इंडोनेशिया संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह पहल दोनों देशों के सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यटन, शोध और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए अवसर भी खुलेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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