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प्रम्बानन से बहरीन तक: 10 वर्षों में भारत ने कैसे संवारे विश्व के प्रमुख हिंदू धरोहर स्थल

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प्रम्बानन से बहरीन तक: 10 वर्षों में भारत ने कैसे संवारे विश्व के प्रमुख हिंदू धरोहर स्थल

सारांश

प्रम्बानन से बहरीन तक — पिछले एक दशक में भारत ने 8 देशों में हिंदू और सांस्कृतिक विरासत स्थलों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाई है। इंडोनेशिया के साथ ताज़ा आशय पत्र इस 'सभ्यतागत कूटनीति' की नई कड़ी है, जो धर्म और इतिहास को कूटनीतिक सेतु में बदलती है।

मुख्य बातें

7 जुलाई 2026 को भारत और इंडोनेशिया ने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण के लिए लेटर ऑफ इंटेंट का आदान-प्रदान किया।
10वीं शताब्दी का प्रम्बानन इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है, जिसमें मूलतः 240 मंदिर और 47 मीटर ऊँचा शिव मंदिर शामिल है।
भारत ने 2015 के नेपाल भूकंप के बाद 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता से 28 विरासत स्थलों का पुनर्स्थापन किया।
बहरीन में 42 लाख अमेरिकी डॉलर की लागत से 200 वर्ष पुराने श्रीनाथजी मंदिर का पुनर्विकास 2019 में पूरा हुआ।
श्रीलंका में थिरुकेतीश्वरम मंदिर के लिए 32.6 करोड़ श्रीलंकाई रुपये की अनुदान सहायता दी गई।
ASI ने म्यांमार के बागान में 12 ऐतिहासिक पगोडाओं का जीर्णोद्धार किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 8 जुलाई 2026 को इंडोनेशिया के योग्याकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर की यात्रा से ठीक पहले, भारत और इंडोनेशिया ने इस यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट (आशय पत्र) का आदान-प्रदान किया। यह आदान-प्रदान 7 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद संपन्न हुआ। पिछले एक दशक में यह भारत की उस व्यापक सांस्कृतिक कूटनीति की नवीनतम कड़ी है, जिसके तहत खाड़ी देशों से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक के धार्मिक और विरासत स्थलों का पुनरुद्धार किया गया है।

प्रम्बानन: साझी सभ्यता का जीवंत प्रतीक

10वीं शताब्दी में निर्मित प्रम्बानन मंदिर परिसर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर स्थल है, जो मुख्यतः भगवान शिव को समर्पित है। इस परिसर में हिंदू त्रिमूर्ति — शिव, विष्णु और ब्रह्मा — को समर्पित ऊँचे शिखर मंदिरों के साथ-साथ उनके दिव्य वाहनों के मंदिर भी हैं। परिसर का केंद्रीय शिव मंदिर 47 मीटर (154 फुट) ऊँचा है और प्राचीन हिंदू वास्तुकला का अप्रतिम उदाहरण है। मूल रूप से इस परिसर में 240 मंदिर थे, जिनकी दीवारों पर रामायण और अन्य हिंदू महाकाव्यों के दृश्य बारीकी से उकेरे गए हैं — जो भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच गहरे सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक संबंधों का जीवंत साक्ष्य है।

दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के संरक्षण प्रयास

वियतनाम में 2014 में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन के ज़रिये भारत को यूनेस्को सूचीबद्ध माई सोन अभयारण्य में संरक्षण कार्य का अवसर मिला। यह स्थल दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे महत्वपूर्ण शैव मंदिर परिसरों में से एक और प्राचीन चंपा साम्राज्य का धार्मिक केंद्र रहा है।

म्यांमार में भारत ने 2017 में यूनेस्को सूचीबद्ध बागान पुरातात्विक क्षेत्र में भूकंप से क्षतिग्रस्त स्मारकों के पुनर्स्थापन के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने वहाँ 12 ऐतिहासिक पगोडाओं का जीर्णोद्धार किया और प्रसिद्ध आनंद मंदिर में संरक्षण कार्य पूरा किया।

कंबोडिया में 2022 से भारत अंगकोर विरासत परिसर में संरक्षण कार्य जारी रखे हुए है, जिसमें ता प्रोहम, अंगकोर वाट और प्रीह विहार शामिल हैं। लाओस में भारत ने यूनेस्को सूचीबद्ध वाट फू मंदिर की प्रमुख संरचनाओं का पुनर्स्थापन किया — यह लगभग 1,000 वर्ष पुराना शिव मंदिर दक्षिण-पूर्व एशिया में सनातन सभ्यता के सबसे पुराने जीवित प्रतीकों में से एक है।

दक्षिण एशिया और खाड़ी में भारत की भूमिका

नेपाल में 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने अपनी 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की पुनर्निर्माण सहायता योजना के तहत 28 सांस्कृतिक विरासत स्थलों के संरक्षण और पुनर्स्थापन का कार्य शुरू किया, जिनमें सेतो मच्छिंद्रनाथ मंदिर और बुधनीलकंठ मंदिर धर्मशाला शामिल हैं।

बांग्लादेश में भारत ने 1971 में पाकिस्तान के ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान नष्ट किए गए रामना काली मंदिर के पुनर्निर्माण में सहायता की, जिसका उद्घाटन 2021 में हुआ। इसके अलावा 2020 में अनुदान सहायता से नाटोर स्थित लगभग 300 वर्ष पुराने जॉय काली माता मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। आनंदमयी काली माता मंदिर और रामकृष्ण मंदिर के संरक्षण में भी भारत ने सहायता प्रदान की।

श्रीलंका में जुलाई 2015 में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत भारत ने ऐतिहासिक थिरुकेतीश्वरम मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 32.6 करोड़ श्रीलंकाई रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित श्रीलंका के पाँच प्राचीन पंच ईश्वरम मंदिरों में से एक है।

बहरीन में प्रधानमंत्री मोदी की 2019 की यात्रा के दौरान मनामा स्थित 200 वर्ष पुराने श्रीनाथजी (श्री कृष्ण) मंदिर की 42 लाख अमेरिकी डॉलर की पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन किया गया — यह खाड़ी क्षेत्र के सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में से एक है।

सांस्कृतिक कूटनीति का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि यह पहल केवल धार्मिक संरक्षण तक सीमित नहीं है — यह भारत की 'सभ्यतागत कूटनीति' की रणनीति का हिस्सा है, जो पड़ोसी और क्षेत्रीय देशों के साथ साझा ऐतिहासिक जड़ों को कूटनीतिक सेतु के रूप में उपयोग करती है। इंडोनेशिया और भारत ने प्रम्बानन परियोजना के साथ-साथ अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के तरीकों पर भी चर्चा की। आने वाले महीनों में प्रम्बानन परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति और पारदर्शिता में होगी — कंबोडिया और लाओस जैसी परियोजनाएँ वर्षों तक सुर्खियों से दूर चलती रहीं। यह रणनीति धर्म और इतिहास को कूटनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करती है, जो क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने का एक नरम लेकिन प्रभावी तरीका है। आलोचकों का कहना है कि बांग्लादेश जैसे देशों में जहाँ अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले जारी हैं, वहाँ केवल मंदिर पुनर्निर्माण पर्याप्त नहीं है — सामुदायिक सुरक्षा की भी ज़रूरत है। फिर भी, यह दशक-भर का रिकॉर्ड दर्शाता है कि भारत ने सांस्कृतिक संरक्षण को विदेश नीति के एक सुसंगत स्तंभ के रूप में स्थापित किया है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रम्बानन मंदिर क्या है और भारत इसके संरक्षण में क्यों शामिल है?
प्रम्बानन इंडोनेशिया के योग्याकार्ता में स्थित 10वीं शताब्दी का यूनेस्को विश्व धरोहर हिंदू मंदिर परिसर है, जिसमें मूलतः 240 मंदिर थे। 7 जुलाई 2026 को भारत और इंडोनेशिया ने इसके संरक्षण के लिए एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए, जो दोनों देशों की साझी सभ्यतागत विरासत को मज़बूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
पिछले 10 वर्षों में भारत ने किन देशों में धार्मिक विरासत स्थलों का संरक्षण किया है?
2014 के बाद से भारत ने इंडोनेशिया, वियतनाम, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और बहरीन में धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत स्थलों के संरक्षण और पुनर्स्थापन में सहयोग दिया है। इनमें से अधिकांश स्थल यूनेस्को सूचीबद्ध हैं।
नेपाल में भारत ने भूकंप के बाद कितनी सहायता दी?
2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की पुनर्निर्माण सहायता योजना के तहत नेपाल के 28 सांस्कृतिक विरासत स्थलों के पुनर्स्थापन और संरक्षण का कार्य शुरू किया, जिनमें सेतो मच्छिंद्रनाथ मंदिर और बुधनीलकंठ मंदिर धर्मशाला शामिल हैं।
बहरीन में भारत द्वारा समर्थित मंदिर परियोजना क्या थी?
प्रधानमंत्री मोदी की 2019 की बहरीन यात्रा के दौरान मनामा स्थित 200 वर्ष पुराने श्रीनाथजी (श्री कृष्ण) मंदिर की 42 लाख अमेरिकी डॉलर की पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन किया गया। यह खाड़ी क्षेत्र के सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में से एक है।
भारत की यह सांस्कृतिक कूटनीति विदेश नीति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह पहल भारत को क्षेत्रीय देशों के साथ साझा ऐतिहासिक और धार्मिक जड़ों के ज़रिये कूटनीतिक संबंध मज़बूत करने का अवसर देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह 'नरम शक्ति' (soft power) का प्रभावी उपयोग है जो आर्थिक और रणनीतिक साझेदारियों को सांस्कृतिक आधार प्रदान करता है।
राष्ट्र प्रेस
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