भारत-यूएई संयुक्त समिति की सातवीं बैठक: मोबिलिटी, प्रत्यर्पण और प्रवासी कल्याण पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच वाणिज्य दूतावास मामलों की संयुक्त समिति की सातवीं बैठक 22 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित हुई, जिसमें दोनों देशों ने मोबिलिटी, प्रत्यर्पण और पारस्परिक कानूनी सहायता के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) श्रीप्रिया रंगनाथन और यूएई के विदेश मंत्रालय के अवर सचिव उमर ओबैद मोहम्मद अल हेसन अल शम्सी ने की।
बैठक में क्या हुआ
विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में बताया कि दोनों पक्षों ने भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के ढाँचे के तहत वाणिज्य दूतावास से जुड़े सभी विषयों पर सहयोग को और प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। चर्चा में लोगों की आवाजाही (मोबिलिटी), प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) और पारस्परिक कानूनी सहायता जैसे अहम मुद्दे केंद्र में रहे।
भारतीय पक्ष ने यूएई में रह रहे लगभग 43 लाख प्रवासी भारतीयों के कल्याण और उनके हितों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों की सराहना की। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार यह समुदाय यूएई की कुल आबादी का लगभग 35% से 38% है और खाड़ी क्षेत्र का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है।
प्रत्यर्पण संधि की पृष्ठभूमि
भारत और यूएई के बीच 1999 में औपचारिक प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, जो भगोड़े अपराधियों को एक-दूसरे को सौंपने की प्रक्रिया को कानूनी आधार देती है। इस संधि के तहत दोनों देशों के बीच कई प्रत्यर्पण मामले निपटाए जा चुके हैं। वर्तमान बैठक में इसी ढाँचे को और सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया गया।
भारत-यूएई संबंधों का व्यापक संदर्भ
यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और पश्चिम एशिया नीति में उसकी केंद्रीय भूमिका है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मई को यूरोप दौरे से पहले अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की थी। उस बैठक के बाद मोदी ने कहा था, 'भारत और यूएई की मित्रता बहुत मजबूत है। हमारे देश अपनी माटी के बेहतर भविष्य के निर्माण के उद्देश्य से साथ मिलकर काम करते रहेंगे।'
यह ऐसे समय में आया है जब इज़राइल-अमेरिका के ईरान पर संयुक्त हमले के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी यूएई नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क में रहे थे, जो इस द्विपक्षीय संबंध की रणनीतिक गहराई को दर्शाता है।
आगे की राह
इस बैठक के निष्कर्ष दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने की दिशा में एक ठोस कदम माने जा रहे हैं। प्रवासी भारतीयों के अधिकारों की सुरक्षा और आपराधिक मामलों में न्यायिक सहयोग को लेकर आने वाले समय में और विस्तृत कार्य-योजना बनाए जाने की संभावना है।