भारत-यूएई कांसुलर बैठक: वीजा, प्रत्यर्पण और कानूनी सहायता में सहयोग मजबूत करने पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने 22 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में कांसुलर मामलों पर सातवीं संयुक्त समिति की बैठक आयोजित की, जिसमें दोनों देशों ने वीजा प्रक्रिया, लोगों की आवाजाही, प्रत्यर्पण और आपसी कानूनी सहायता सहित समस्त कांसुलर क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। यह बैठक भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के व्यापक ढाँचे के अंतर्गत आयोजित हुई।
बैठक का नेतृत्व और एजेंडा
बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्रालय (MEA) में सचिव (CPV और OIA) श्रीप्रिया रंगनाथन और यूएई के विदेश मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी उमर ओबैद मोहम्मद अल हसन अल शम्सी ने संयुक्त रूप से की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत सभी कांसुलर मामलों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर जोर
बैठक के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए यूएई सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की सराहना की। यूएई में लाखों भारतीय प्रवासी कार्यरत हैं, जो भारत के प्रेषण (remittance) प्रवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नेताओं के बीच बढ़ती द्विपक्षीय सक्रियता
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क तेज़ हुआ है। 16 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2026 में दोनों नेताओं की यह तीसरी मुलाकात थी — इससे पहले मई में प्रधानमंत्री मोदी की यूएई यात्रा और जनवरी में शेख मोहम्मद की भारत यात्रा के अवसर पर दोनों के बीच वार्ता हुई थी।
जी7 बैठक में दोनों नेताओं ने तकनीक, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का निमंत्रण
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को इस वर्ष भारत में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया है। यह निमंत्रण दोनों देशों के बीच बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग की बढ़ती इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
आगे की राह
सातवीं कांसुलर समिति बैठक के निष्कर्ष दोनों देशों के बीच संस्थागत संवाद की परिपक्वता को रेखांकित करते हैं। कांसुलर सहयोग के इस ढाँचे को और व्यापक बनाने की दिशा में आगामी महीनों में अनुवर्ती कदम उठाए जाने की संभावना है।