तमिलनाडु: सीपीआईएम ने वामपंथी विरोध रोकने पर मुख्यमंत्री विजय से अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई माँगी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के तमिलनाडु राज्य सचिव पी. शनमुगम ने 27 अगस्त को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को पत्र लिखकर मुख्य सचिव, डिंडीगुल जिले के गुजिलियमपराई तहसीलदार और उन अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है, जिन पर वामपंथी संगठनों की गतिविधियों को बाधित करने का आरोप है। यह मामला उस कथित सर्कुलर को लेकर उठा है जिसमें सरकारी विभागों को वामपंथी दलों के विरोध प्रदर्शनों में छात्रों और नागरिकों की भागीदारी रोकने के निर्देश दिए गए थे।
विवादित सर्कुलर और उसके निर्देश
पी. शनमुगम के अनुसार, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में लिया गया निर्णय और उसके बाद जारी सर्कुलर स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन को निर्देशित करता था कि वे मिलकर वामपंथी दलों तथा सीजेपी द्वारा आयोजित प्रदर्शनों में लोगों की भागीदारी रोकें। इस निर्देश को कथित तौर पर उच्च प्राथमिकता का दर्जा दिया गया था और विभागों से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी माँगी गई थी।
शनमुगम ने इस निर्देश को गैर-कानूनी और असंवैधानिक करार दिया और कहा कि इसमें जानबूझकर वामपंथी संगठनों को निशाना बनाया गया। उन्होंने माँग की कि मुख्य सचिव की बैठक में लिए गए फैसले को रद्द किया जाए और सर्कुलर वापस लिया जाए।
जवाबदेही का सवाल
शनमुगम ने तर्क दिया कि राज्य के सबसे वरिष्ठ नौकरशाह की अध्यक्षता में लिए गए फैसले को किसी जूनियर अधिकारी की व्यक्तिगत चूक कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने केवल उस संयुक्त निदेशक से स्पष्टीकरण क्यों माँगा जिसने कॉलेजों को सूचना भेजी थी, जबकि मूल निर्णय लेने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विधानसभा में उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा दी गई माफी का उल्लेख करते हुए शनमुगम ने स्पष्ट किया कि सीपीआईएम ने माफी नहीं, जवाबदेही माँगी थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से सरकार के रुख पर स्पष्टीकरण देने की भी अपील की।
गुजिलियमपराई तहसीलदार पर अलग आरोप
डिंडीगुल जिले के गुजिलियमपराई तहसीलदार पर एक अलग आरोप यह है कि उन्होंने कथित तौर पर ग्राम प्रशासनिक अधिकारियों को तालुक में सीपीआईएम और सीपीआई सदस्यों का विवरण एकत्र करने का निर्देश दिया था। शनमुगम ने इसे डराने-धमकाने और आधिकारिक अधिकार का दुरुपयोग बताया।
जिला प्रशासन ने शुरू में संकेत दिया था कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद तहसीलदार का तबादला किया जाएगा, किंतु बाद में तमिलनाडु सरकारी कर्मचारी आचरण नियमों के नियम 17ए के तहत स्पष्टीकरण माँगा गया। सीपीआईएम नेता ने इसे गंभीर दुरुपयोग को मामूली अनुशासनात्मक चूक की तरह निपटाने का प्रयास बताया।
संवैधानिक अधिकार पर जोर
शनमुगम ने रेखांकित किया कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार भारतीय संविधान द्वारा प्रत्येक नागरिक को प्रदत्त है। उन्होंने छात्रों को प्रदर्शनों से दूर रखने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में पुलिस की प्रस्तावित भूमिका पर कड़ी आपत्ति जताई। कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार के इस दावे को — कि तहसीलदार ने व्यक्तिगत पसंद के आधार पर काम किया — शनमुगम ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पद का ऐसा दुरुपयोग कड़ी कार्रवाई की माँग करता है।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के कार्यालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सीपीआईएम ने स्पष्ट किया है कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह आंदोलन तेज करेगी। यह विवाद तमिलनाडु में वामपंथी दलों और सत्तारूढ़ प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव का संकेत देता है।