राम माधव के 'जेन-Z आरएसएस में सबसे ज़्यादा' बयान पर भाजपा का समर्थन, विपक्ष बोला — 'जंतर-मंतर तो बस ट्रेलर था'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शुक्रवार, 28 अगस्त को पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव के उस बयान का खुलकर समर्थन किया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में जेन-Z (Gen-Z) की सदस्यता देश के किसी भी अन्य संगठन से अधिक है। जहाँ भाजपा ने इसे 'हकीकत' करार दिया, वहीं विपक्षी दलों ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि युवाओं का भाजपा और उससे जुड़े संगठनों पर 'एक प्रतिशत भी भरोसा नहीं है'।
राम माधव ने क्या कहा
राम माधव ने एक टेलीविज़न चैनल से बातचीत में कहा, 'भाजपा के अलावा आरएसएस देश का सबसे शक्तिशाली युवा संगठन है। तथाकथित जेन-Z के लोग सबसे बड़ी संख्या में आरएसएस में हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में भी उनकी भागीदारी बहुत अधिक है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जेन-Z केवल उन युवाओं तक सीमित नहीं है जो जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते दिखे थे।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने माधव के बयान की पुष्टि करते हुए कहा, 'यह बिल्कुल सच है। जंतर-मंतर पर संख्या लगभग 5,000 से 10,000 रही होगी। ABVP दुनिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा छात्र संगठन है। भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है और भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) हमारा सबसे बड़ा युवा-आधारित संगठन है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि BJYM और ABVP के अतिरिक्त संस्कार भारती और विश्व संवाद केंद्र जैसे संगठनों में भी युवाओं की उल्लेखनीय भागीदारी है।
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने भी माधव का समर्थन करते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही सबसे पहले युवाओं की ताकत को पहचाना और स्टार्टअप्स को समर्थन देकर उन्हें महत्व दिया। हमारी सरकार युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं के लिए काम करने को लेकर प्रतिबद्ध है।'
विपक्ष का पलटवार
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने राम माधव के दावों को खारिज करते हुए कहा कि जेन-Z को 'भाजपा, उससे जुड़े संगठनों या उनसे जुड़े लोगों पर एक प्रतिशत भी भरोसा नहीं है।' उन्होंने कहा, 'जेन-Z जानता है कि उनके अधिकारों के लिए कौन लड़ रहा है और कौन उन्हें छीन रहा है।' चांद ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन को 'सिर्फ एक ट्रेलर' बताया और आगाह किया कि देश का हर युवा अभी परेशान है और उनका भविष्य दाँव पर है।
व्यापक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब जेन-Z की राजनीतिक पहचान और संगठनात्मक झुकाव राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन रहे हैं। जंतर-मंतर पर हुए हालिया प्रदर्शन को विपक्ष ने युवा असंतोष का प्रतीक बताया था, जबकि भाजपा ने उसे एक सीमित और असंगठित घटना के रूप में चित्रित किया। गौरतलब है कि ABVP और RSS दशकों से छात्र एवं युवा वर्ग में संगठनात्मक उपस्थिति बनाए हुए हैं, लेकिन सदस्यता के स्वतंत्र आँकड़े सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हैं।
आगे क्या
यह बहस आने वाले दिनों में और तीखी हो सकती है, क्योंकि विपक्षी दल जंतर-मंतर विरोध को एक बड़े युवा आंदोलन में बदलने का दावा कर रहे हैं। भाजपा के लिए युवा मतदाताओं पर अपनी पकड़ का आख्यान बनाए रखना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जबकि विपक्ष इसे चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रहा है।