मोदी हमेशा युवाओं के साथ खड़े रहे हैं: भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना का राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद गुलाम अली खटाना ने 31 जुलाई को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आने के पहले दिन से ही देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य को लेकर सजग रहे हैं। यह बयान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस आरोप के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार 'जेनज़ी' (Gen-Z) की आवाज़ को दबा रही है।
मुख्य बयान: युवाओं के लिए मोदी सरकार की पहल
खटाना ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 'परीक्षा पे चर्चा' और 'स्टार्टअप स्टैंडअप' जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए छात्रों से सीधा संवाद करते रहे हैं। उनके अनुसार, समाज का कोई ऐसा वर्ग नहीं है जिसके लिए केंद्र सरकार ने कोई न कोई योजना न चलाई हो।
उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने देश की बागडोर युवाओं के हाथों में सौंप दी है और भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। खटाना के अनुसार, कांग्रेस और इंडी गठबंधन का रवैया हमेशा 'लटकाने और भटकाने' वाला रहा है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भाजपा का रुख
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के घायल जवानों के परिजनों की प्रेस वार्ता का हवाला देते हुए खटाना ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को 'हाईजैक' किया। उनका कहना था कि धरने में कथित तौर पर अपराधियों को शामिल किया गया और राजनीतिक लाभ के लिए प्रदर्शनकारी छात्रों का इस्तेमाल किया गया।
खटाना ने कहा कि इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ बर्बरता की गई, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज में स्वीकार्य नहीं है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया
संसद परिसर में विपक्षी दलों द्वारा राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर किए गए प्रदर्शन पर भाजपा सांसद ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन के नेता 'निराशा के शिकार' हो गए हैं और पेपर लीक, भ्रष्टाचार तथा अपराध जैसे मामलों में उनकी संलिप्तता रही है।
विपक्ष पर संविधान की मर्यादा तोड़ने का आरोप
खटाना ने कहा कि यह 'दुर्भाग्यपूर्ण' है कि विपक्षी नेता एक तरफ संविधान की प्रति हाथ में लेकर घूमते हैं और दूसरी तरफ संसद की मर्यादा को तार-तार करते हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने इन दलों को सत्ता से बाहर कर दिया है और यह जनादेश का स्पष्ट संदेश है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र विभिन्न मुद्दों पर हंगामे की भेंट चढ़ रहा है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच टकराव चरम पर है।