मनोज जरांगे पाटिल का अनशन का 17वाँ दिन: 'यह शायद आखिरी मुलाकात हो', अकेले मुंबई मार्च की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने 14 सितंबर 2026 को अपने अनशन के 17वें दिन छत्रपति संभाजीनगर से अत्यंत भावुक अपील की। उन्होंने सलाइन और अन्य चिकित्सा सहायता पूरी तरह बंद कर दी है, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति तेज़ी से बिगड़ रही है। मुंबई मार्च से पहले उनका कहना है कि यह महाराष्ट्र के लोगों से उनकी आखिरी मुलाकात भी हो सकती है।
अनशन की गंभीर स्थिति
जरांगे पाटिल ने बताया कि पिछले सात-आठ दिनों तक सलाइन के कारण उनका ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर सामान्य बना हुआ था। लेकिन सरकार की ओर से मांगों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने के कारण उन्होंने दोबारा इलाज लेने से इनकार कर दिया। उनके अनुसार, सलाइन और पानी बंद होने के बाद अब शरीर में तेज़ी से बदलाव आ रहे हैं और पेट में जलन फिर शुरू हो गई है।
उन्होंने कहा, 'आज मेरे अनशन का 17वाँ दिन है। मैं ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा हूँ। मैं मुंबई के लिए लगभग अकेला निकलूंगा — मेरे साथ केवल चार-पाँच साथी होंगे। यह शायद हमारी आखिरी मुलाकात हो सकती है।'
मुंबई मार्च की तैयारी और समर्थकों से अपील
जरांगे पाटिल बिना औपचारिक पुलिस अनुमति के मुंबई रवाना होने की तैयारी में हैं। उन्होंने समर्थकों से स्पष्ट रूप से कहा कि रास्ते में स्वागत के कार्यक्रम आयोजित न किए जाएँ, माला या शॉल न पहनाई जाए — क्योंकि इससे संक्रमण और रक्तचाप बढ़ने का खतरा रहता है। उन्होंने लंबे मंच बनाने के बजाय रास्ते में छोटे विश्राम केंद्र बनाने की सलाह दी।
उन्होंने समर्थकों से यह भी कहा कि अभी उनसे मिलने पर पैसे खर्च न करें, बल्कि अंतिम और बड़े मुंबई मार्च के लिए धन और वाहन बचाकर रखें। साथ ही उन्होंने अभी मार्च में शामिल न होने की अपील की।
मुख्यमंत्री फडणवीस पर आरोप
जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मराठा आंदोलन को कमज़ोर करने के लिए राजनीतिक रणनीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को बदनाम करने और दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन समाज को संगठित रहना होगा।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार पर आंदोलन को कमज़ोर करने का आरोप लगाया हो। मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में वर्षों से केंद्र में है, और कई बार अनशन व सरकारी वार्ता के दौर से गुज़रा है।
समाज और नेतृत्व को संदेश
जरांगे पाटिल ने मराठा समाज को संदेश दिया कि नेतृत्व की कोई कमी नहीं है — एक नेता न रहे तो दूसरा सामने आएगा। उन्होंने समाज से अपील की कि वे उसी व्यक्ति या दल का समर्थन करें जो वास्तव में आरक्षण दिलाने में मदद करे। उन्होंने यह भी दावा किया कि 5.5 करोड़ मेहनतकश मराठा किसी भी समय मुंबई को रोक सकते हैं।
उन्होंने कहा, 'मेरा शरीर जहाँ गिरे, गिर जाए — लेकिन मराठा समाज इतनी मज़बूती से लड़े कि आने वाली पीढ़ियाँ गर्व से कहें कि वह मर गया, लेकिन झुका नहीं।' आने वाले दिन मराठा आरक्षण आंदोलन की दिशा तय करेंगे, क्योंकि जरांगे पाटिल का मुंबई मार्च राज्य की राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है।