28 अगस्त 2026
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रांची: रक्षाबंधन पर पुलिस अधिकारियों ने बालाश्रय के अनाथ बच्चों संग मनाया पर्व, बच्चों ने बांधी राखी

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रांची: रक्षाबंधन पर पुलिस अधिकारियों ने बालाश्रय के अनाथ बच्चों संग मनाया पर्व, बच्चों ने बांधी राखी

सारांश

रांची में रक्षाबंधन पर खाकी वर्दी ने एक अलग रूप दिखाया। बालाश्रय और प्रेमाश्रय के अनाथ बच्चों ने SSP राकेश रंजन सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को राखी बाँधी — यह आयोजन पुलिस और समाज के बीच संवेदनशील रिश्ते की एक सच्ची तस्वीर बना।

मुख्य बातें

28 अगस्त को रक्षाबंधन पर रांची के पंडरा बालाश्रय और चुटिया प्रेमाश्रय में पुलिस अधिकारियों ने अनाथ बच्चों संग पर्व मनाया।
SSP राकेश रंजन , सिटी एसपी पारस राणा , एसपी ग्रामीण गौरव गोस्वामी और ट्रैफिक एसपी राकेश कुमार सिंह दोनों आश्रमों में पहुँचे।
बच्चों ने अधिकारियों की कलाई पर राखियाँ बाँधीं; अधिकारियों ने बच्चों के साथ भोजन किया और उपहार दिए।
अधिकारियों ने बच्चों की पढ़ाई, रुचियों और भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में बातचीत की।
एसएसपी राकेश रंजन ने कहा कि समाज के हर बच्चे को स्नेह, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए।

रांची के पंडरा स्थित बालाश्रय और चुटिया स्थित प्रेमाश्रय में 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व एक अनूठे रूप में मनाया गया, जब अनाथ एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने पुलिस अधिकारियों की कलाई पर राखियाँ बाँधीं। किसी बच्चे ने उन्हें भाई कहा, तो किसी ने अपना संरक्षक — खाकी वर्दी में इस दिन एक अलग ही संवेदनशीलता नज़र आई।

कौन-कौन से अधिकारी पहुँचे

इस आयोजन में रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) राकेश रंजन, सिटी एसपी पारस राणा, पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) गौरव गोस्वामी तथा ट्रैफिक एसपी राकेश कुमार सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी दोनों आश्रमों में पहुँचे। अधिकारियों को अपने बीच पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे।

बच्चों संग बिताए आत्मीय पल

अधिकारियों ने बच्चों के साथ बैठकर भोजन किया और उनकी पढ़ाई, रुचियों तथा भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में बातचीत की। पुलिस अधिकारियों ने बच्चों को उपहार भी भेंट किए और उनका हौसला बढ़ाया। यह आयोजन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि बच्चों के मनोबल को मज़बूत करने का प्रयास था।

एसएसपी का संदेश

एसएसपी राकेश रंजन ने कहा कि समाज के हर बच्चे को स्नेह, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे अवसर बच्चों के मनोबल को मज़बूत करते हैं और साथ ही ऐसे कार्यक्रम पुलिस व समाज के बीच विश्वास और संवेदनशीलता को भी गहरा करते हैं।

पुलिस की भूमिका पर अधिकारियों का नज़रिया

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है — समाज के हर वर्ग के सुख-दुःख में सहभागी बनना भी उसका दायित्व है। विशेष रूप से उन बच्चों के लिए, जिन्हें परिवार का साथ नसीब नहीं हो पाता, समाज और प्रशासन का स्नेह एवं संरक्षण अनिवार्य है।

यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि पुलिस और समुदाय के बीच संवेदनशील सेतु बनाना संभव है — और ऐसे प्रयास आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ऐसे एकल आयोजन इन बच्चों के जीवन में दीर्घकालिक बदलाव ला सकते हैं। पुलिस-समुदाय संबंध मज़बूत करने की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम है, पर बालाश्रयों में संसाधनों की कमी और बच्चों के पुनर्वास की व्यापक चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। एक दिन की आत्मीयता को नीतिगत प्रतिबद्धता में बदलने की ज़रूरत है — तभी खाकी का यह संवेदनशील चेहरा स्थायी असर छोड़ सकता है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची में रक्षाबंधन पर पुलिस अधिकारी किन आश्रमों में गए?
पुलिस अधिकारी रांची के पंडरा स्थित बालाश्रय और चुटिया स्थित प्रेमाश्रय में गए, जहाँ अनाथ एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चे रहते हैं। दोनों आश्रमों में 28 अगस्त को रक्षाबंधन का आयोजन हुआ।
इस आयोजन में कौन-कौन से वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए?
इस आयोजन में SSP राकेश रंजन, सिटी एसपी पारस राणा, एसपी ग्रामीण गौरव गोस्वामी और ट्रैफिक एसपी राकेश कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए। सभी अधिकारी दोनों आश्रमों में पहुँचे।
इस रक्षाबंधन आयोजन का बच्चों पर क्या असर पड़ा?
अधिकारियों को अपने बीच पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने उत्साहपूर्वक राखियाँ बाँधीं। अधिकारियों ने बच्चों के साथ भोजन किया, उपहार दिए और उनकी पढ़ाई व भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में बातचीत की।
SSP राकेश रंजन ने इस मौके पर क्या कहा?
SSP राकेश रंजन ने कहा कि समाज के हर बच्चे को स्नेह, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षाबंधन जैसे अवसर बच्चों के मनोबल को मज़बूत करते हैं और पुलिस व समाज के बीच विश्वास को गहरा करते हैं।
पुलिस की इस पहल का व्यापक उद्देश्य क्या है?
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। जिन बच्चों को परिवार का साथ नहीं मिल पाता, उनके लिए समाज और प्रशासन का स्नेह एवं संरक्षण ज़रूरी है — और ऐसे आयोजन इसी भावना को व्यक्त करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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