28 अगस्त 2026
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रक्षाबंधन पर 'भारत रक्षा पर्व': स्कूली छात्राओं ने थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ को बांधी राखी

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रक्षाबंधन पर 'भारत रक्षा पर्व': स्कूली छात्राओं ने थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ को बांधी राखी

सारांश

रक्षाबंधन सिर्फ पर्व नहीं, इस बार एक राष्ट्रीय संदेश बना। 'भारत रक्षा पर्व' के तहत स्कूली छात्राओं ने थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ को राखी बांधकर सेना और नागरिकों के बीच विश्वास व स्नेह के अटूट रिश्ते को जीवंत किया।

मुख्य बातें

28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के अवसर पर नई दिल्ली में 'भारत रक्षा पर्व' कार्यक्रम आयोजित हुआ।
स्कूली छात्राओं ने थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ को राखी बांधकर सेना के प्रति सम्मान व आभार व्यक्त किया।
यह कार्यक्रम भारतीय सेना की ओर से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य नागरिक-सेना के भावनात्मक जुड़ाव को मज़बूत करना है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह आयोजन सेना और देश की जनता के बीच विश्वास व आत्मीयता के शाश्वत रिश्ते को रेखांकित करता है।
इस पहल से आने वाली पीढ़ी में सेना के प्रति सम्मान की भावना को प्रोत्साहन मिलता है।

नई दिल्ली में 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के पावन अवसर पर स्कूली छात्राओं ने भारतीय थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ को राखी बांधी। भारतीय सेना द्वारा आयोजित 'भारत रक्षा पर्व' कार्यक्रम के तहत यह भावपूर्ण आयोजन हुआ, जिसमें बच्चियों ने देश के सैनिकों के प्रति अपना प्रेम, सम्मान और आभार व्यक्त किया।

मुख्य घटनाक्रम

कार्यक्रम में स्कूली छात्राओं ने जनरल धीरज सेठ की कलाई पर राखी बांधकर रक्षाबंधन की परंपरा को देश की सुरक्षा में समर्पित रक्षकों के सम्मान से जोड़ा। बच्चों के चेहरों पर उत्साह और मासूम मुस्कान ने इस आयोजन को विशेष बना दिया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित किया गया।

'भारत रक्षा पर्व' की पहल

भारतीय सेना की ओर से 'भारत रक्षा पर्व' एक ऐसी पहल है जो रक्षाबंधन जैसे राष्ट्रीय पर्वों को सेना और नागरिकों के बीच भावनात्मक सेतु के रूप में इस्तेमाल करती है। इस वर्ष स्कूली बच्चियों को सीधे थल सेनाध्यक्ष से मिलने और राखी बांधने का अवसर देकर यह संदेश दिया गया कि देश का हर नागरिक अपने सैनिकों को परिवार का हिस्सा मानता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह आयोजन महज औपचारिकता नहीं है — यह उस शाश्वत रिश्ते को रेखांकित करता है जो देश की जनता और भारतीय सेना के बीच विश्वास, स्नेह और आत्मीयता पर टिका है। सेना के जवान कठिन परिस्थितियों में सीमाओं की रक्षा करते हैं और ऐसे कार्यक्रम उनके मनोबल को भी ऊँचा रखते हैं।

आम जनता पर असर

इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय सेना और देश की जनता का रिश्ता केवल सुरक्षा और जिम्मेदारी तक सीमित नहीं, बल्कि यह विश्वास, सम्मान और गहरे भावनात्मक जुड़ाव का भी रिश्ता है। स्कूली बच्चियों की भागीदारी से आने वाली पीढ़ी में सेना के प्रति सम्मान की भावना और प्रगाढ़ होती है।

क्या होगा आगे

'भारत रक्षा पर्व' जैसे आयोजन भविष्य में भी रक्षाबंधन और अन्य राष्ट्रीय पर्वों पर जारी रहने की संभावना है, क्योंकि ये नागरिक-सेना सहभागिता को मज़बूत करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में देखे जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी विचारणीय है कि ऐसे प्रतीकात्मक कार्यक्रम दीर्घकालिक नीतिगत प्रतिबद्धताओं — जैसे सैनिकों के कल्याण, पूर्व सैनिकों की पुनर्वास योजनाओं और सीमावर्ती बुनियादी ढाँचे — का विकल्प नहीं बन सकते। भावनात्मक जुड़ाव ज़रूरी है, पर असली सम्मान नीतियों में झलकता है। यह देखना होगा कि 'भारत रक्षा पर्व' जैसी पहलें केवल उत्सव तक सीमित रहती हैं या इनसे ठोस नागरिक-सेना संवाद के नए रास्ते भी खुलते हैं।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'भारत रक्षा पर्व' क्या है?
'भारत रक्षा पर्व' भारतीय सेना द्वारा आयोजित एक पहल है जो रक्षाबंधन जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर नागरिकों और सेना के बीच भावनात्मक जुड़ाव को मज़बूत करने के लिए आयोजित की जाती है। इस वर्ष 28 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में स्कूली छात्राओं ने थल सेनाध्यक्ष को राखी बांधी।
थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ को किसने राखी बांधी?
नई दिल्ली में आयोजित 'भारत रक्षा पर्व' कार्यक्रम के तहत स्कूली छात्राओं ने थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ को राखी बांधी। यह आयोजन 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के अवसर पर हुआ।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्या था?
इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश की जनता और भारतीय सेना के बीच विश्वास, स्नेह और भावनात्मक जुड़ाव को प्रगाढ़ करना था। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे आयोजन सैनिकों के मनोबल को ऊँचा रखने और नागरिकों में सेना के प्रति सम्मान बढ़ाने में सहायक होते हैं।
क्या यह कार्यक्रम हर साल होता है?
'भारत रक्षा पर्व' के तहत भारतीय सेना रक्षाबंधन और अन्य राष्ट्रीय पर्वों पर नागरिक-सेना सहभागिता के आयोजन करती है। इस वर्ष स्कूली छात्राओं को सीधे थल सेनाध्यक्ष से मिलने का अवसर दिया गया, जो इस पहल को और अधिक सार्थक बनाता है।
इस आयोजन से आम नागरिकों को क्या संदेश मिला?
इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि भारतीय सेना और देश की जनता का रिश्ता केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि यह परिवार जैसे विश्वास और स्नेह का रिश्ता है। स्कूली बच्चियों की भागीदारी से यह भावना आने वाली पीढ़ी तक भी पहुँचती है।
राष्ट्र प्रेस
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