गुजरात का 'स्पोर्ट्स जीनोमिक्स प्रोग्राम' लॉन्च: जीन विश्लेषण से होगी खिलाड़ियों की प्रतिभा की पहचान
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 28 अगस्त 2026 को गांधीनगर में राज्यस्तरीय स्पोर्ट्स जीनोमिक्स प्रोग्राम की शुरुआत की — जो एथलीटों की जेनेटिक, शारीरिक और प्रदर्शन-संबंधी विशेषताओं के वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित भारत की पहली ऐसी राज्यस्तरीय पहल है। इस कार्यक्रम को गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) के नेतृत्व में लागू किया जाएगा और इसके तहत पाँच वर्षों में कुल 10,000 सैंपल एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम की संरचना और उद्देश्य
गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोधवाडिया ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में GBRC जीनोमिक्स को स्पोर्ट्स साइंस, शरीर विज्ञान और पोषण के साथ जोड़कर प्रतिभा पहचान का एक साक्ष्य-आधारित मॉडल तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा, "इसका मकसद स्पोर्ट्स टैलेंट के लिए एक ज़्यादा वैज्ञानिक और सबूतों पर आधारित तरीका बनाने के लिए जीनोमिक्स को स्पोर्ट्स साइंस, शरीर विज्ञान और पोषण के साथ जोड़ना है।"
इस वर्ष 2,000 सैंपल एकत्र करने की योजना है। पहला बैच गुजरात स्टेट टेनिस एसोसिएशन (GSTA) के टेनिस खिलाड़ियों से लिया जा चुका है। अगला बैच विजयी भारत फाउंडेशन के तीरंदाजी, फेंसिंग, जूडो और शूटिंग के एथलीटों से लिया जाएगा।
जीनोमिक्स से क्या मिलेगा एथलीटों को
स्पोर्ट्स जीनोमिक्स एक उभरता हुआ वैज्ञानिक क्षेत्र है जो जेनेटिक बदलावों और एथलेटिक विशेषताओं — जैसे मांसपेशियों की बनावट, सहनशक्ति, मेटाबॉलिज्म, चोट की संभावना और रिकवरी — के बीच के संबंध का अध्ययन करता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव पी. भारती ने कहा, "पारंपरिक रूप से टैलेंट की पहचान शारीरिक माप, कोचिंग के आकलन और ट्रायल के दौरान प्रदर्शन के आधार पर की जाती है। गुजरात का प्रस्तावित मॉडल इस प्रक्रिया में जेनेटिक और बायोलॉजिकल जानकारी को भी शामिल करना चाहता है।"
उन्होंने आगे बताया कि कार्यक्रम में न्यूट्रिजेनोमिक्स, लाइफस्टाइल जीनोमिक्स, व्यक्तित्व से जुड़े गुण और सर्केडियन रिदम (शरीर की जैविक घड़ी) जैसे पहलुओं का भी अध्ययन किया जाएगा।
शामिल खेल और एथलीट वर्ग
इस कार्यक्रम में 20 से अधिक खेल विधाएँ शामिल की गई हैं — एथलेटिक्स, तैराकी, बॉक्सिंग, कुश्ती, जूडो, ताइक्वांडो, जिम्नास्टिक और फेंसिंग जैसे व्यक्तिगत खेलों के साथ-साथ फुटबॉल, हॉकी, हैंडबॉल, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, लॉन टेनिस, कबड्डी और खो-खो भी इसमें हैं। सटीकता-आधारित खेल जैसे तीरंदाजी, शूटिंग और शतरंज को भी इसमें जगह दी गई है।
एथलीटों को तीन आयु वर्गों में बाँटा गया है: 14 वर्ष से कम, 14 से 18 वर्ष और 18 वर्ष से अधिक। राज्य और राष्ट्रीय स्तर के चैंपियन को प्राथमिकता दी जाएगी।
तकनीकी अवसंरचना और डेटाबेस
GBRC के पास पहले से ही उन्नत वैज्ञानिक अवसंरचना उपलब्ध है, जिसमें NovaSeq 6000, GridION और PromethION जैसे सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म, जीनोटाइपिंग के लिए Illumina iScan और Illumina DRAGEN, तथा हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की सुविधाएँ शामिल हैं। गुजरात राज्य बायोटेक्नोलॉजी मिशन के मिशन डायरेक्टर दिग्विजयसिंह जडेजा ने बताया कि होल-जीनोम सीक्वेंसिंग के ज़रिये एथलेटिक प्रदर्शन से जुड़े जेनेटिक मार्करों की पहचान की जाएगी।
इस पहल का एक प्रमुख परिणाम होगा गुजरात एथलीट जीनोम डेटाबेस (G-AGD), जो आनुवंशिक, शारीरिक और प्रदर्शन-संबंधी जानकारी को एकीकृत करेगा। एथलीट की पहचान सुरक्षित रखने के लिए दो-स्तरीय बारकोडिंग सिस्टम अपनाया जाएगा।
सीमाएँ और आगे की राह
इस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यक्रम किसी एकल 'स्पोर्ट्स जीन' को सफलता का निर्धारक नहीं मानता। उनके अनुसार खेल में प्रदर्शन एक बहुआयामी प्रक्रिया है जिस पर ट्रेनिंग, कोचिंग, पोषण, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक सहयोग जैसे पर्यावरणीय कारकों का भी उतना ही प्रभाव पड़ता है। यह पहल 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी के व्यापक ढाँचे का हिस्सा भी मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे G-AGD डेटाबेस समृद्ध होगा, यह राज्य को 'स्पोर्ट्स बायोटेक्नोलॉजी इनोवेशन हब' के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो सकता है।