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गुजरात की 'शक्तिदूत 2.0' योजना 12 अगस्त से, खिलाड़ियों की सहायता राशि ₹25 लाख से बढ़कर ₹50 लाख

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गुजरात की 'शक्तिदूत 2.0' योजना 12 अगस्त से, खिलाड़ियों की सहायता राशि ₹25 लाख से बढ़कर ₹50 लाख

सारांश

गुजरात सरकार की 'शक्तिदूत 2.0' योजना सिर्फ राशि दोगुनी करने तक सीमित नहीं — यह ग्रासरूट्स से ओलंपिक तक की पूरी पाइपलाइन का पुनर्निर्माण है। ₹50 लाख की सहायता, 9 साल की न्यूनतम आयु और वैज्ञानिक चयन प्रणाली मिलकर एक ऐसा ढाँचा बनाती हैं जो 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक की तैयारी को गति दे सकता है।

मुख्य बातें

शक्तिदूत 2.0 योजना का शुभारंभ 12 अगस्त 2026 को महात्मा मंदिर, गांधीनगर से उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के हाथों होगा।
खिलाड़ियों की अधिकतम आर्थिक सहायता ₹25 लाख से दोगुनी कर ₹50 लाख की गई।
आवेदन की न्यूनतम आयु सीमा 12 वर्ष से घटाकर 9 वर्ष की गई; दिव्यांग खिलाड़ियों को समान सहायता।
वर्ष 2015 से अब तक योजना के तहत कुल 1,604 पदक — राष्ट्रीय 831 , अंतरराष्ट्रीय 773 ।
799 खिलाड़ियों को पुरस्कार; ₹388 करोड़ से अधिक के खेल परिसरों और पुस्तकालयों का ई-भूमिपूजन व ई-लोकार्पण।
20वें एशियन गेम्स 2026 (आइची, जापान) के लिए योजना के 9 खिलाड़ी चुने गए हैं।

गुजरात सरकार ने राज्य के खेल क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए 12 अगस्त 2026 को महात्मा मंदिर, गांधीनगर से 'शक्तिदूत 2.0' योजना का राज्यव्यापी शुभारंभ करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में लागू इस नवीनीकृत योजना में खिलाड़ियों को मिलने वाली अधिकतम आर्थिक सहायता ₹25 लाख से दोगुनी कर ₹50 लाख कर दी गई है। यह योजना ओलंपिक और एशियन गेम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के लिए गुजरात के खिलाड़ियों को तैयार करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

शुभारंभ कार्यक्रम का विवरण

'रमशे गुजरात, जीतशे गुजरात' (खेलेगा गुजरात, जीतेगा गुजरात) के ध्येय मंत्र के साथ 12 अगस्त को आयोजित इस भव्य समारोह में उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के हाथों 799 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरित किए जाएंगे। इस अवसर पर एकलव्य पुरस्कार, सरदार पटेल पुरस्कार और जयदीपसिंहजी पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

इसके साथ ही राज्यभर में ₹388 करोड़ से अधिक की लागत वाले विभिन्न खेल परिसरों और पुस्तकालयों का ई-भूमिपूजन एवं ई-लोकार्पण भी किया जाएगा। इन परियोजनाओं में 11 तहसील स्तरीय खेल परिसर, 7 जिला स्तरीय खेल परिसर, 7 लाइब्रेरी, 2 स्टडी हॉल और 2 नगर पालिका लाइब्रेरी शामिल हैं।

शक्तिदूत 2.0 के प्रमुख सुधार

नई योजना में खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास को केंद्र में रखते हुए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। आवेदन की न्यूनतम आयु सीमा 12 वर्ष से घटाकर 9 वर्ष कर दी गई है, ताकि जमीनी स्तर (ग्रासरूट्स) से ही प्रतिभाओं की पहचान हो सके।

चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने के लिए पॉइंट-आधारित मार्किंग सिस्टम लागू किया गया है, जिसमें ओलंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसी प्रतियोगिताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। स्क्रीनिंग और सिलेक्शन कमेटी में खेल विशेषज्ञों की भागीदारी अनिवार्य की गई है। निश्चित समय सीमा हटाकर अब प्रदर्शन के आधार पर निरंतर सहायता का प्रावधान किया गया है।

समावेशिता को प्राथमिकता देते हुए पैरा, डेफ, ब्लाइंड और अन्य दिव्यांग खिलाड़ियों को भी योजना में समान अवसर और समान सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, 'शक्तिदूत बी' पहल के तहत योजना में शामिल न होने वाले, किंतु वर्ष के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को तत्काल वित्तीय सहायता दी जाएगी।

2015 से अब तक की उपलब्धियाँ

शक्तिदूत योजना वर्ष 2015 से संचालित है और इसके अंतर्गत खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर 831 पदक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 773 पदक — कुल मिलाकर 1,604 पदक — जीतकर गुजरात का गौरव बढ़ाया है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व के संदर्भ में, टोक्यो ओलंपिक 2021 और पेरिस ओलंपिक 2024 में 3-3 खिलाड़ी चुने गए। 19वें एशियन गेम्स 2023 (हांग्जो) में 7 खिलाड़ी शामिल हुए और 20वें एशियन गेम्स 2026 (आइची, जापान) के लिए योजना के 9 खिलाड़ी चुने गए हैं। 23वीं कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (ग्लासगो-स्कॉटलैंड) में 1 खिलाड़ी ने देश का प्रतिनिधित्व किया।

बुनियादी ढाँचे में निवेश

खेल विभाग द्वारा ₹388 करोड़ से अधिक के खर्च से राज्य के विभिन्न जिलों में बुनियादी ढाँचे का विकास किया जाएगा। इनमें अहमदाबाद, कच्छ, जामनगर, दाहोद, वलसाड, मोरबी, नवसारी, पाटण, पोरबंदर सहित अनेक जिले शामिल हैं। परियोजनाओं में 400 मीटर एथलेटिक सिंथेटिक ट्रैक, एस्ट्रोटर्फ हॉकी ग्राउंड, स्पोर्ट्स हॉस्टल और स्वर्णिम गुजरात स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, वडोदरा के कैम्पस विकास जैसे कार्य शामिल हैं।

आगे की राह

शक्तिदूत 2.0 का शुभारंभ गुजरात के खेल परितंत्र को एक संस्थागत आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। योजना में खिलाड़ियों की संख्या भी चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जाएगी और वार्षिक एवं द्विवार्षिक मूल्यांकन के आधार पर श्रेणी उन्नयन (कैटेगरी अपग्रेड) का पारदर्शी तंत्र विकसित किया गया है। यदि क्रियान्वयन सुचारु रहा, तो यह योजना 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक की तैयारी के लिए गुजरात की पाइपलाइन को और मजबूत कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

1,604 पदक, ₹388 करोड़ का बुनियादी ढाँचा — लेकिन असली कसौटी यह है कि वैज्ञानिक पॉइंट-आधारित चयन प्रणाली पारदर्शिता के वादे पर कितनी खरी उतरती है। अब तक की योजना में खिलाड़ियों की संख्या सीमित रही और समय-सीमा बाधा बनी — दोनों को नई नीति में संबोधित किया गया है, जो सकारात्मक है। किंतु दिव्यांग खिलाड़ियों को 'समान सहायता' का वादा तभी सार्थक होगा जब उनके लिए विशेष प्रशिक्षण सुविधाएँ भी सुनिश्चित हों — जिसका विवरण अभी स्पष्ट नहीं है। 2028 ओलंपिक की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है; गुजरात की यह योजना सही दिशा में है, पर क्रियान्वयन की गति ही इसकी विरासत तय करेगी।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शक्तिदूत 2.0 योजना क्या है और यह पहले से कैसे अलग है?
शक्तिदूत 2.0 गुजरात सरकार की नवीनीकृत खेल सहायता योजना है, जिसमें खिलाड़ियों की अधिकतम आर्थिक सहायता ₹25 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख की गई है। पुरानी योजना की तुलना में इसमें न्यूनतम आयु 9 वर्ष, वैज्ञानिक चयन प्रणाली, दिव्यांग खिलाड़ियों को समान सहायता और 'शक्तिदूत बी' जैसी नई पहलें जोड़ी गई हैं।
शक्तिदूत 2.0 का शुभारंभ कब और कहाँ होगा?
योजना का राज्यव्यापी शुभारंभ 12 अगस्त 2026 को महात्मा मंदिर, गांधीनगर में उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के हाथों होगा। इसी कार्यक्रम में 799 खिलाड़ियों को पुरस्कार और ₹388 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का ई-भूमिपूजन व ई-लोकार्पण भी होगा।
शक्तिदूत योजना से अब तक कितने पदक मिले हैं?
वर्ष 2015 से अब तक शक्तिदूत योजना के अंतर्गत खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर 831 और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 773 — कुल 1,604 पदक जीते हैं। 20वें एशियन गेम्स 2026 (आइची, जापान) के लिए योजना के 9 खिलाड़ी चुने जा चुके हैं।
शक्तिदूत 2.0 में दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए क्या प्रावधान है?
नई योजना में पैरा, डेफ, ब्लाइंड और अन्य दिव्यांग खिलाड़ियों को सामान्य खिलाड़ियों के समान अवसर और समान आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह समावेशिता की दृष्टि से पुरानी योजना से एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
₹388 करोड़ की खेल परियोजनाओं में कौन-से जिले शामिल हैं?
इन परियोजनाओं में अहमदाबाद, कच्छ, जामनगर, दाहोद, वलसाड, मोरबी, नवसारी, पाटण, पोरबंदर सहित 19 से अधिक जिले और स्वर्णिम गुजरात स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, वडोदरा शामिल हैं। सुविधाओं में 400 मीटर सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक, एस्ट्रोटर्फ हॉकी ग्राउंड, लाइब्रेरी और स्पोर्ट्स हॉस्टल शामिल हैं।
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