28 अगस्त 2026
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सिंटा विवाद: कुनिका सदानंद बोलीं — पूनम ढिल्लो का स्वभाव है दूसरों पर हावी होना

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सिंटा विवाद: कुनिका सदानंद बोलीं — पूनम ढिल्लो का स्वभाव है दूसरों पर हावी होना

सारांश

सिंटा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने पूनम ढिल्लो के 'डोमिनेटिंग नेचर' पर खुलकर बात की और बताया कि उन्होंने पिछले दो एजीएम में जाना इसीलिए बंद किया। सिंटा के भीतर नेतृत्व विवाद अब सार्वजनिक हो चुका है।

मुख्य बातें

अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने 28 अगस्त को सिंटा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि पूनम ढिल्लो का स्वभाव दूसरों पर हावी होने वाला है, जो नेतृत्व में तभी काम करता है जब पूरी टीम को साथ लिया जाए।
कुनिका ने खुलासा किया कि वे पिछले दो एजीएम में शामिल नहीं हुईं, क्योंकि उन्हें लगा कि 'सुनने वाला कोई नहीं है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंटा की स्थापना कलाकारों की भलाई के लिए हुई थी और संगठन को अहंकार से ऊपर उठकर काम करना चाहिए।
आगामी सिंटा चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि वे हमेशा सही को सही और गलत को गलत कहेंगी।

मुंबई में 28 अगस्त को सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने खुलकर अपनी बात रखी। सिंटा की सदस्या के रूप में उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन के भीतर चल रहे टकराव में अहंकार को किनारे रखकर सेवा पर ध्यान देना ज़रूरी है।

सिंटा में क्या चल रहा है

कुनिका ने कहा, 'बहुत दुखद बात है — सिंटा में जो हो रहा है, उसे देखकर लगता है कि हम मुद्दे से भटककर आपसी मनमुटाव और अहंकार में उलझ गए हैं। सिंटा की स्थापना कलाकारों की भलाई के लिए हुई थी, इसलिए उसी पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए। जब आप सेवा में उतरते हैं, तो अहंकार को साइड में रखकर काम किया जाता है।'

पूनम ढिल्लो पर क्या कहा

सिंटा के अन्य सदस्यों द्वारा पूनम ढिल्लो और पद्मिनी पर लगाए गए आरोपों पर कुनिका ने कहा, 'मैं पूनम ढिल्लो को व्यक्तिगत रूप से काफी सालों से जानती हूं। उनके अंदर दूसरों पर हावी होने का स्वभाव है। इस तरह का व्यवहार नेतृत्व में कभी-कभी काम आता है, लेकिन यह तभी चलता है जब आप पूरी टीम को साथ लेकर चल सकें। एक अकेला व्यक्ति कुछ भी अकेले नहीं कर सकता।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पद्मिनी से उनकी व्यक्तिगत परिचय उतनी गहरी नहीं है, इसलिए उनके बारे में वे कोई राय देने की स्थिति में नहीं हैं।

एजीएम से दूरी का खुलासा

कुनिका ने बताया कि वे पिछले दो एजीएम में शामिल नहीं हुईं। उन्होंने कहा, 'जब पूनम जी इलेक्ट होकर आई थीं, तो वे लोगों से बहुत बुरी तरह बात कर रही थीं। मैंने सोचा कि अपने दिन के चार घंटे बर्बाद करने का क्या फायदा, जब सुनने वाला कोई हो ही नहीं। इसके बाद से मैंने जाना बंद कर दिया।'

सिंटा चुनाव पर रुख

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंटा के आगामी चुनावों का भी ज़िक्र हुआ। इस पर कुनिका ने कहा, 'कोई भी आए, मेरा रुख स्पष्ट रहेगा — सही को सही और गलत को गलत ही कहूंगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब सिंटा के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान चरम पर है और संगठन की साख दांव पर लगी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संस्थागत उदासीनता की गंभीर स्वीकृति है। जब एक सक्रिय सदस्य ही बैठकों में जाना बंद कर दे, तो सवाल उठता है कि सिंटा जैसी संस्थाएँ कलाकारों के हितों की रक्षा कितनी वास्तविकता में करती हैं। नेतृत्व विवाद से ज़्यादा ज़रूरी है कि सिंटा अपनी आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाए।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंटा विवाद क्या है और इसमें कुनिका सदानंद की क्या भूमिका है?
सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) में नेतृत्व और आंतरिक मतभेदों को लेकर विवाद चल रहा है। सिंटा की सदस्या अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने 28 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद इस विवाद पर खुलकर अपनी राय रखी।
कुनिका सदानंद ने पूनम ढिल्लो के बारे में क्या कहा?
कुनिका सदानंद ने कहा कि वे पूनम ढिल्लो को कई सालों से जानती हैं और उनका स्वभाव दूसरों पर हावी होने वाला है। उन्होंने कहा कि ऐसा व्यवहार नेतृत्व में तभी काम करता है जब पूरी टीम को साथ लिया जाए।
कुनिका सदानंद ने सिंटा की एजीएम में जाना क्यों बंद किया?
कुनिका ने बताया कि जब पूनम ढिल्लो चुनकर आई थीं, तो वे लोगों से बहुत बुरे तरीके से बात कर रही थीं। उन्हें लगा कि 'सुनने वाला कोई नहीं है,' इसलिए उन्होंने पिछले दो एजीएम में जाना बंद कर दिया।
सिंटा के आगामी चुनावों पर कुनिका का क्या रुख है?
कुनिका सदानंद ने कहा कि चाहे कोई भी नेतृत्व में आए, वे हमेशा सही को सही और गलत को गलत कहेंगी। उन्होंने किसी खास उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया।
सिंटा की स्थापना किस उद्देश्य से हुई थी?
सिंटा यानी सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन की स्थापना फिल्म और टेलीविज़न कलाकारों के हितों की रक्षा और उनकी भलाई के लिए हुई थी। कुनिका सदानंद ने कहा कि संगठन को इसी मूल उद्देश्य पर ध्यान देना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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