सिंटा विवाद: मुकेश ऋषि ने खोला राज़ — 'धीरे-धीरे तनाव बढ़ा, इसलिए 8 सदस्यों ने दिया सामूहिक इस्तीफा'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता मुकेश ऋषि ने 10 अगस्त 2026 को सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) की एग्जीक्यूटिव कमेटी में पनपे आंतरिक विवाद पर पहली बार विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि कमेटी के भीतर बढ़ते तनाव और दिशाहीनता के चलते आठ निर्वाचित सदस्यों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का फैसला किया। यह घटनाक्रम मुंबई के फिल्म और टेलीविजन उद्योग से जुड़े कलाकारों के सबसे बड़े संगठन में गहराते संकट की ओर इशारा करता है।
कमेटी में कैसे बढ़ा तनाव
मुकेश ऋषि के अनुसार, शुरुआत में कमेटी की सोच बिल्कुल स्पष्ट और समावेशी थी। उन्होंने कहा, 'कमेटी में यह भावना थी कि जो भी अभिनेता सिंटा के लिए योगदान देना चाहता है, वह आगे आ सकता है। अभिनेता की आर्थिक स्थिति चाहे जैसी भी हो, वह कमेटी में आकर अपनी भूमिका निभा सकता था।' उन्होंने जोड़ा कि अगर कोई व्यक्ति काम में योगदान देना चाहता था तो उसके लिए रास्ता खुला था और व्यवस्था काफी सरल थी।
हालाँकि, समय बीतने के साथ यह माहौल बदलता गया। ऋषि ने बताया, 'इच्छाशक्ति की कमी महसूस हो रही थी और कमेटी के भीतर जो कुछ हो रहा था, उससे यह लगने लगा था कि चीजें सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही हैं।'
किस घटना ने भरा इस्तीफे का रास्ता
मुकेश ऋषि ने एक ठोस उदाहरण देते हुए बताया कि 'अगर किसी व्यक्ति को किसी पद से हटा दिया जाता था तो दूसरा व्यक्ति भी बिना किसी पद के रह जाता था।' इस तरह की घटनाओं ने कमेटी के सदस्यों के मन में यह सवाल खड़ा किया कि आगे बने रहना सार्थक है या नहीं। अंततः सदस्यों के बीच आम सहमति बनी कि सभी मिलकर एक साथ इस्तीफा दें। ऋषि ने कहा, 'सभी सदस्य मिले, स्थिति पर चर्चा की और सामूहिक रूप से इस्तीफे पर हस्ताक्षर किए। इस्तीफे के साथ अपने फैसले के कारण भी बताए गए थे, ताकि उनकी बात साफ तौर पर सामने आ सके।'
सिंटा का पलटवार और विवाद की स्थिति
कथित तौर पर 11 सदस्यों के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया, जिनमें आठ एग्जीक्यूटिव कमेटी के निर्वाचित सदस्य बताए गए। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या एग्जीक्यूटिव कमेटी भंग हो गई है। सिंटा ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर इन खबरों को सिरे से खारिज किया। संस्था ने कहा कि 'कुछ असंतुष्ट सदस्य भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। हमारी यूनियन पूरी तरह सक्रिय है और एग्जीक्यूटिव कमेटी के ज़रिए काम कर रही है।'
एफडब्ल्यूआईसीई का विवादित हस्तक्षेप
इस पूरे विवाद में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (एफडब्ल्यूआईसीई) का नाम भी सामने आया है। सिंटा का आरोप है कि एफडब्ल्यूआईसीई ने ऐसे दिशा-निर्देश जारी करने की कोशिश की, जिसके लिए उसके पास सिंटा के संवैधानिक ढाँचे के तहत अधिकार नहीं हैं। संस्था ने स्पष्ट किया कि एक स्वतंत्र ट्रेड यूनियन के आंतरिक कामकाज और संविधान को बाहरी हस्तक्षेप से नहीं बदला जा सकता।
आगे क्या होगा
फिलहाल सिंटा ने कमेटी के भंग होने से इनकार किया है, लेकिन इस्तीफों की संख्या और आरोप-प्रत्यारोप के बीच संस्था की आंतरिक स्थिरता पर सवाल बने हुए हैं। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या सिंटा और एफडब्ल्यूआईसीई के बीच का संवैधानिक विवाद किसी कानूनी या मध्यस्थता प्रक्रिया की ओर जाता है, और क्या असंतुष्ट सदस्य कोई नया मंच बनाने की दिशा में कदम उठाते हैं।