बिहार के 19 जिलों में येलो अलर्ट: बारिश, आंधी और कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर से चिंता
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के 19 जिलों में मौसम विभाग ने 25 सितंबर 2026 को 'येलो अलर्ट' जारी किया है, क्योंकि उत्तर-पश्चिम भारत से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के साथ लगातार बारिश, आंधी-तूफान और नदियों में जलस्तर वृद्धि ने राज्य में सामान्य जनजीवन को बाधित कर दिया है। कोसी बेसिन के निकटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा सबसे अधिक बताया जा रहा है, जबकि समस्तीपुर और बांका में मौसमी घटनाओं से तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम
मौसम विभाग के अनुसार बिहार के 19 जिलों में तेज हवाओं, बिजली कड़कने और आंधी-तूफान की आशंका को देखते हुए येलो अलर्ट घोषित किया गया है। पिछले 24 घंटों में राज्य की राजधानी पटना सहित करीब 11 जिलों में रुक-रुक कर वर्षा दर्ज की गई है। पटना के पांडारक पुलिस स्टेशन अंतर्गत दरगाही टोला के पास एनएच-31 पर एक बड़ा इमली का पेड़ गिर जाने से वाहनों की आवाजाही कुछ समय के लिए बाधित हुई।
जान-माल का नुकसान
समस्तीपुर में गुरुवार को तेज आंधी के दौरान पेड़ गिरने से दो छात्राओं की मौत हो गई और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। बांका में बुधवार रात भारी बारिश और नमी के कारण एक जर्जर दीवार ढहने से एक महिला की मौत हो गई। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य पहले से ही मौसमी आपदाओं का सामना कर रहा है और प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
कोसी नदी और बाढ़ का खतरा
नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार भारी बारिश के बाद कोसी नदी का जलस्तर काफी बढ़ने की आशंका है। जल संसाधन विभाग ने कोसी बेसिन से जुड़े इंजीनियरों और अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा है। कोसी बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने की उम्मीद जताई जा रही है। नवहट्टा, महिषी, सिमरी बख्तियारपुर और सलखुआ ब्लॉक की करीब 35 पंचायतों को विशेष रूप से संवेदनशील इलाकों के तौर पर चिह्नित किया गया है।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
अधिकारियों ने तटबंधों के भीतर रहने वाले निवासियों और स्थानीय नाविकों को निर्देश दिए हैं कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो वे सुरक्षित और ऊँचे स्थानों पर तत्काल चले जाएं। प्रशासन ने आमजन को सलाह दी है कि आंधी-तूफान और तेज हवाओं के दौरान घर के अंदर ही रहें और मौसम एवं आपदा प्रबंधन से जुड़ी आधिकारिक सलाह का पालन करें। गौरतलब है कि कोसी बेसिन में हर वर्ष मानसून के अंत में इसी तरह के हालात उत्पन्न होते हैं, लेकिन इस बार नेपाल में असामान्य वर्षा ने जोखिम को और बढ़ा दिया है।
आम जनता पर असर और आगे की स्थिति
मौसम विभाग के अनुसार, बारिश होने से तापमान में तत्काल बदलाव की संभावना नहीं है। हालाँकि, वर्षा कम होने के बाद तापमान में करीब 2–4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। निचले इलाकों और नदी किनारे बसे गाँवों के लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं। कोसी बेसिन में अगले 48 घंटे अहम माने जा रहे हैं और अधिकारियों की नज़र बैराज के जलस्तर पर टिकी है।