सिंटा विवाद: पूनम ढिल्लो और पद्मिनी कोल्हापुरे ने तानाशाही के आरोप नकारे, कहा — '8 सदस्यों का कोरम जरूरी'
सारांश
मुख्य बातें
सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) की अध्यक्ष पूनम ढिल्लो और वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद्मिनी कोल्हापुरे ने 24 अगस्त को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व महासचिव उपासना सिंह के उन आरोपों को सिरे से खारिज किया, जिनमें दोनों अभिनेत्रियों पर संस्था को कथित तौर पर तानाशाही और गैर-लोकतांत्रिक ढंग से चलाने का इल्ज़ाम लगाया गया था। दोनों नेत्रियों ने एग्जीक्यूटिव कमेटी की संरचना और निर्णय-प्रक्रिया का हवाला देते हुए अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया।
पद्मिनी कोल्हापुरे का जवाब
पद्मिनी कोल्हापुरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे पहले तानाशाही के आरोप का जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'सिंटा की एग्जीक्यूटिव कमेटी में फैसले किसी एक व्यक्ति की मर्जी से नहीं लिए जाते। किसी भी बैठक को शुरू करने के लिए पहले आठ सदस्यों का कोरम पूरा होना जरूरी है। इसके बाद ही बैठक शुरू होती है और अगर किसी मुद्दे पर फैसला लेना हो तो उसे बहुमत के आधार पर तय किया जाता है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं सिंटा में अकेले खड़ी होकर यह फैसला भी नहीं कर सकती कि हमें प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी है। इस तरह के फैसले भी कमेटी की बैठक में चर्चा के बाद लिए जाते हैं।' पद्मिनी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या पिंटू जी, राकेश बेदी और यशपाल शर्मा जैसे अनुभवी कलाकार किसी के दबाव में आँख मूँदकर चल सकते हैं।
कमेटी की वैधता पर उन्होंने स्पष्ट किया, 'यह कमेटी पूरी तरह कानूनी है। इसे भंग नहीं किया गया है और हम संविधान के अनुसार काम कर रहे हैं। यहाँ मौजूद सभी लोगों का एकमात्र उद्देश्य सिंटा के सदस्यों के हित में काम करना है।'
पूनम ढिल्लो की नाराज़गी
सिंटा अध्यक्ष पूनम ढिल्लो ने उपासना सिंह के बयानों पर गहरा दुख और नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा, 'पिछली कमेटी और उसकी महासचिव की ओर से सिंटा के बारे में जिस तरह की बातें की गईं, उससे संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। संस्था के इतिहास में पहले कभी इस तरह की गलत बातें नहीं कही गईं।' उन्होंने यह भी कहा कि जब तक सही पक्ष लोगों तक नहीं पहुंचता, भ्रम बना रहेगा।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद इस महीने तब और गहरा गया जब सिंटा की 21 सदस्यीय एग्जीक्यूटिव कमेटी के 11 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया, जिनमें 8 निर्वाचित सदस्य शामिल थे। इस्तीफा देने वालों में हेमंत पांडे, मुकेश ऋषि, साहिला चड्ढा, हेतल परमार, पुनीत इस्सर, विंदू दारा सिंह, विकास वर्मा और दीपक पराशर शामिल थे। इन सदस्यों ने संस्था के कामकाज पर भरोसा कम होने की बात कहते हुए नए चुनाव कराने की माँग उठाई थी।
उस समय महासचिव रहीं उपासना सिंह ने इस्तीफों की पुष्टि करते हुए दावा किया था कि सदस्यों ने पूनम ढिल्लो और पद्मिनी कोल्हापुरे के विरुद्ध शिकायतें दर्ज कराई हैं। इन शिकायतों में पदों के कथित दुरुपयोग, फैसले लेने में निष्पक्षता की कमी और एग्जीक्यूटिव कमेटी से पर्याप्त परामर्श न लेने जैसे आरोप शामिल थे। पूर्व कोषाध्यक्ष दीपक पराशर और उपासना सिंह ने यह भी आरोप लगाया था कि संस्था की शक्ति धीरे-धीरे केवल दो लोगों के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही थी।
आगे क्या होगा
फिलहाल सिंटा की मौजूदा कमेटी अपने पद पर बनी हुई है और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस्तीफा देने वाले सदस्यों की नए चुनाव कराने की माँग अभी भी लंबित है। यह विवाद फिल्म और टेलीविज़न उद्योग के कलाकारों के प्रतिनिधित्व और संस्थागत पारदर्शिता पर व्यापक सवाल खड़े करता है।