रणवीर-फरहान विवाद पर पूनम ढिल्लों बोलीं — 'बड़ों की लड़ाई में मासूम कामगार न पिसें'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने 29 मई 2026 को मुंबई में आयोजित अभिनेत्री हेमा मालिनी के डायमंड जुबली कॉन्सर्ट में शिरकत करते हुए अभिनेता रणवीर सिंह और निर्माता-अभिनेता फरहान अख्तर के बीच चल रहे विवाद पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि बड़े कलाकारों और निर्माताओं के आपसी मतभेदों की कीमत फिल्म इंडस्ट्री के दैनिक वेतनभोगी और पर्दे के पीछे काम करने वाले कर्मचारियों को नहीं चुकानी चाहिए।
पूनम ढिल्लों का बयान
पूनम ढिल्लों ने कहा, 'किसी भी फिल्म को बनाने में केवल बड़े कलाकार या निर्माता ही शामिल नहीं होते, बल्कि काफी सारे छोटे-बड़े कामगारों और तकनीकी टीम की दिन-रात की मेहनत भी होती है। कलाकारों और निर्माताओं के बीच मतभेद होना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन उनके आपसी विवाद का असर उन मासूम लोगों को नहीं होना चाहिए, जो पूरी ईमानदारी से फिल्म के पीछे रहकर काम करते हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'जब भी कोई फिल्म किसी बड़े विवाद के चलते रुकती है, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को तकलीफ नहीं होनी चाहिए। चाहे अहंकार हो, आपसी लड़ाई हो या कोई विवाद — उसका असर ज़रूरतमंद लोगों पर नहीं पड़ना चाहिए। जैसे युद्धों में फैसले नेता और बड़े लोग लेते हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है — कुछ ऐसा ही हमारी इंडस्ट्री में भी होता है।'
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब सामने आया जब रणवीर सिंह ने फरहान अख्तर की आगामी फिल्म से शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले आखिरी वक्त में कदम पीछे खींच लिए। इसके बाद फरहान अख्तर और निर्माता रितेश सिधवानी की प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट ने आरोप लगाया कि फिल्म के प्री-प्रोडक्शन पर खर्च हो चुके करीब ₹45 करोड़ का नुकसान इसी वजह से हुआ।
संस्थागत कार्रवाई
मामले के गंभीर होने पर फरहान अख्तर ने इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। फेडरेशन द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब न मिलने पर रणवीर सिंह के खिलाफ 'असहयोग निर्देश' जारी कर दिया गया — जो बॉलीवुड में एक असामान्य और कड़ा कदम माना जाता है।
इंडस्ट्री पर व्यापक असर
यह ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड में बड़े सितारों और निर्माताओं के बीच अनुबंध-संबंधी विवादों की संख्या बढ़ रही है। गौरतलब है कि इस तरह के विवादों में सबसे पहले प्रभावित होते हैं — सेट पर काम करने वाले तकनीशियन, जूनियर आर्टिस्ट और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, जिनकी आजीविका सीधे फिल्म के निर्माण-चक्र पर निर्भर होती है। पूनम ढिल्लों का बयान इसी संवेदनशील पहलू को रेखांकित करता है।