पूनम ढिल्लों की महिलाओं को सीख: 'शिक्षा हो या हुनर, इसे कभी मत छोड़ो — यही आपकी असली ताकत है'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने अभिनेता राजीव खंडेलवाल के टेलीविजन शो 'तुम हो न : घर की सुपरस्टार' के आगामी एपिसोड में शिरकत करते हुए महिलाओं को एक गहरी और व्यक्तिगत सलाह दी — कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन हों, अपनी शिक्षा या हुनर को कभी न छोड़ें, क्योंकि वही उन्हें आत्मनिर्भर और मजबूत बनाता है। 12 जून को प्रसारित होने वाले इस एपिसोड में पूनम ने मातृत्व के अपने निजी अनुभव साझा किए और बताया कि किस तरह उन्होंने एक कामकाजी माँ के रूप में करियर और परिवार के बीच संतुलन बनाए रखा।
मातृत्व की चुनौती और अकेलेपन का सच
पूनम ढिल्लों ने शो में खुलकर बात करते हुए कहा कि अधिकांश माताएँ अपने बच्चों को अकेले ही पालती हैं — चाहे वे विवाहित हों या संयुक्त परिवार में रहती हों। उन्होंने कहा, 'ज़्यादातर औरतें बच्चों को अकेले ही बड़ा करती हैं। मैंने अक्सर ऐसा देखा है। चाहे वे शादीशुदा हों या संयुक्त परिवार में रहती हों, हर माँ पूरे दिल और हिम्मत के साथ अपने बच्चों की जिम्मेदारी खुद उठाती है।'
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके अपने जीवन में भी कुछ हद तक यही स्थिति रही। उनके अनुसार, आर्थिक सहायता मिलती थी, लेकिन भावनात्मक और व्यावहारिक जिम्मेदारियाँ उन्होंने स्वयं निभाईं।
आत्मनिर्भरता पर जोर — 'हुनर ही आपकी इज्जत है'
पूनम ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा, 'कभी भी आपको काम की जरूरत पड़ सकती है। इस पर आपकी इज्जत भी निर्भर करती है कि आप खुद को कितना काबिल बना सकती हैं — शिक्षा हो या कोई हुनर, उसे कभी न छोड़ें। क्योंकि वही आपको मजबूत बनाता है और अपने पैरों पर खड़े होने की ताकत देता है।' यह बयान उन लाखों महिलाओं के लिए प्रासंगिक है जो शादी या मातृत्व के बाद करियर छोड़ देती हैं।
करियर में ब्रेक और वापसी की रणनीति
अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश के लिए कुछ समय के लिए काम से दूरी बना ली थी, क्योंकि घर में छोटे बच्चे थे और उनके पास माता-पिता का सहारा भी नहीं था। उन्होंने कहा, 'कई साल तक ब्रेक लेने के बाद मैंने टीवी में काम किया कि आउटडोर शूट कम होंगे और यह शर्त भी रखी थी कि सीमित घंटे ही काम करूंगी, क्योंकि मेरा बेटा सिर्फ डेढ़ साल का था।'
उन्होंने बताया कि वे सुबह बच्चों को स्कूल भेजती थीं और उनके लौटने के बाद सेट पर जाती थीं। बच्चों का होमवर्क भी सेट पर ही करवाती थीं। यह दिनचर्या एक सचेत और सुनियोजित प्रबंधन का नतीजा थी।
नियोक्ताओं से अपील — 'माँओं के साथ सहानुभूति दिखाएँ'
पूनम ढिल्लों ने उन लोगों से भी सीधी बात की जो माताओं को नौकरी पर रखते हैं। उन्होंने कहा, 'प्लीज थोड़ा समझदारी और सहानुभूति दिखाएँ। सिर्फ यह न सोचें कि वे आपके यहाँ नौकरी करती हैं। वे एक औरत हैं, जिनकी कई जिम्मेदारियाँ होती हैं।' उनका यह संदेश कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता की माँग करता है।
आगे क्या
पूनम ढिल्लों का यह एपिसोड जल्द ही दर्शकों के सामने आएगा। उनके इस खुलकर किए गए संवाद ने सोशल मीडिया पर भी चर्चा छेड़ दी है, जहाँ महिलाएँ उनके अनुभवों से खुद को जोड़ रही हैं। यह शो उन गृहिणियों और कामकाजी माताओं को एक मंच देता है जो रोज़मर्रा की जिंदगी में 'सुपरस्टार' की भूमिका निभाती हैं।