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पूनम ढिल्लों का खुलासा: 'शादी सिर्फ प्यार से नहीं, सोच और संस्कारों का मेल भी ज़रूरी'

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पूनम ढिल्लों का खुलासा: 'शादी सिर्फ प्यार से नहीं, सोच और संस्कारों का मेल भी ज़रूरी'

सारांश

पूनम ढिल्लों ने 'तुम हो ना' में दिल खोलकर बताया — सख्त परवरिश, सीमित सामाजिक दायरा और एक प्रेम विवाह जो टूट गया। उनका सबसे बड़ा सबक: दो अच्छे इंसान भी अच्छे जीवनसाथी नहीं बन सकते, जब तक सोच और संस्कारों का मेल न हो।

मुख्य बातें

अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने राजीव खंडेलवाल के शो 'तुम हो ना' में अपनी परवरिश और विवाह पर खुलकर बात की।
उन्होंने बताया कि माता-पिता की सख्ती के कारण उन्हें हमउम्र लोगों से मिलने या डेट करने की अनुमति नहीं थी।
पूर्व पति अशोक के बारे में कहा — 'वह अच्छे इंसान हैं, लेकिन दो अच्छे लोग हमेशा अच्छे जीवनसाथी नहीं होते।' उनका मानना है कि सफल विवाह के लिए परवरिश, सोच, शिक्षा और जीवन-मूल्यों का मेल ज़रूरी है।
उन्होंने माता-पिता से अपील की कि बच्चों को स्वतंत्र निर्णय लेने का अवसर दें।

अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने अभिनेता राजीव खंडेलवाल के चर्चित शो 'तुम हो ना' में अपनी परवरिश, विवाह और सेलिब्रिटी जीवन की चुनौतियों पर बेबाकी से बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके माता-पिता बेहद सख्त थे और उन्हें अपनी हमउम्र लोगों से मिलने या डेट करने की अनुमति नहीं थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एक सफल वैवाहिक जीवन के लिए केवल दो अच्छे लोगों का साथ होना पर्याप्त नहीं — परवरिश, सोच और जीवन-मूल्यों का मेल भी उतना ही ज़रूरी है।

सेलिब्रिटी जीवन और सीमित सामाजिक दायरा

शो में राजीव खंडेलवाल ने जब सार्वजनिक हस्तियों की चुनौतियों का ज़िक्र किया, तो पूनम ने कहा, 'जब आप एक सेलिब्रिटी या पब्लिक फिगर होते हैं और सोमवार से रविवार तक काम करते हैं, तो आपको बहुत कम लोगों से मिलने का मौका मिलता है।' उन्होंने बताया कि आधे लोग उन्हें 'अपनी पसंद से बाहर' मानते थे और आधे 'फिल्मी सितारे' की छवि में देखते थे — दोनों स्थितियों में असली पहचान बन पाना मुश्किल था।

सख्त परवरिश और उसके सबक

पूनम ढिल्लों ने बताया कि अभिनेत्री बनने के बाद भी उनका सामाजिक दायरा बेहद सीमित रहा। उन्होंने कहा, 'मेरे माता-पिता बहुत सख्त थे। मुझे अपनी उम्र के लोगों से मिलने या डेट करने की इजाजत नहीं थी। अगर कोई ग्रुप मूवी देखने का प्लान बनाता था, तो मुझे कहा जाता था — नहीं, तुम्हें जाने की अनुमति नहीं है।'

हालाँकि उन्होंने सख्त परवरिश को पूरी तरह नकारा नहीं। उनका कहना था, 'सख्त परवरिश अच्छी होती है, लेकिन आज मैं माता-पिता से कहूंगी कि बच्चों को थोड़ा मौका दीजिए — उन्हें उड़ने और नई चीजें सीखने का अवसर दीजिए, ताकि वे सही फैसले लेना सीख सकें। अगर हम उन्हें ज़रूरत से ज़्यादा सुरक्षित रखेंगे, तो उनका नज़रिया सीमित रह जाएगा।'

पूर्व पति अशोक के बारे में बेबाक राय

अपने पूर्व पति अशोक के बारे में बात करते हुए पूनम ने कहा, 'मेरे पति अशोक बहुत अच्छे इंसान हैं। आज भी मैं उनके बारे में बुरा नहीं कहूंगी, क्योंकि वह वास्तव में अच्छे इंसान हैं — लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि दो अच्छे लोग हमेशा एक अच्छे जीवनसाथी साबित हों।'

उन्होंने आगे जोड़ा, 'शादी सिर्फ दो अच्छे लोगों के साथ होने से नहीं चलती। परवरिश, सोच, शिक्षा और जीवन-मूल्य जैसी कई चीजों का मेल होना ज़रूरी होता है। जब ये बातें मेल नहीं खातीं, तो वैवाहिक जीवन कठिन हो जाता है।'

प्रेम विवाह और अनुभवहीनता की कीमत

पूनम ढिल्लों ने बताया कि उनकी शादी प्रेम विवाह थी और उस समय उन्हें जीवन का ज़्यादा अनुभव नहीं था। उन्होंने कहा, 'अशोक जी ने मुझे काफी समय तक मनाया। वह अच्छे इंसान थे, इसलिए मुझे लगा कि यही सही फैसला है। उस समय मुझे अंदाज़ा नहीं था कि आगे की ज़िंदगी कितनी चुनौतीपूर्ण होगी।'

यह बातचीत ऐसे समय में आई है जब सार्वजनिक जीवन में रिश्तों और विवाह की जटिलताओं पर खुलकर चर्चा करना अभी भी असामान्य माना जाता है। पूनम की बेबाकी उनकी उस पीढ़ी की आवाज़ बनती है जिसने परंपरा और आधुनिकता के बीच अपना रास्ता खुद बनाया।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारतीय समाज में प्रचलित उस धारणा को चुनौती देता है जो विवाह को केवल 'अच्छे परिवार' और 'अच्छे चरित्र' की कसौटी पर तौलती है। गौरतलब है कि सख्त परवरिश और सीमित सामाजिक अनुभव के बीच लिए गए जीवन के सबसे बड़े फैसले अक्सर सबसे कठिन साबित होते हैं — यह बात केवल सेलिब्रिटी जीवन पर नहीं, बल्कि लाखों भारतीय परिवारों पर भी लागू होती है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूनम ढिल्लों ने अपनी शादी के बारे में क्या कहा?
पूनम ढिल्लों ने बताया कि उनकी शादी प्रेम विवाह थी और उस समय उन्हें जीवन का ज़्यादा अनुभव नहीं था। उन्होंने कहा कि उनके पूर्व पति अशोक अच्छे इंसान हैं, लेकिन दो अच्छे लोगों का साथ होना ही सफल विवाह की गारंटी नहीं है।
पूनम ढिल्लों की परवरिश कैसी थी?
पूनम ढिल्लों के माता-पिता बेहद सख्त थे और उन्हें हमउम्र लोगों से मिलने या डेट करने की अनुमति नहीं थी। यहाँ तक कि अभिनेत्री बनने के बाद भी उन्हें ग्रुप में फिल्म देखने जाने की इजाज़त नहीं दी जाती थी।
पूनम ढिल्लों ने माता-पिता को क्या सलाह दी?
उन्होंने कहा कि सख्त परवरिश अच्छी होती है, लेकिन बच्चों को उड़ने और नई चीज़ें सीखने का अवसर देना भी ज़रूरी है। ज़रूरत से ज़्यादा सुरक्षित रखने पर बच्चों का नज़रिया सीमित रह जाता है।
पूनम ढिल्लों का 'तुम हो ना' शो में क्या कहना था?
राजीव खंडेलवाल के शो 'तुम हो ना' में पूनम ढिल्लों ने कहा कि सेलिब्रिटी होने के कारण उनकी एक अलग छवि बन गई थी, जिससे सामान्य सामाजिक संबंध बनाना मुश्किल था। उन्होंने अपनी परवरिश, विवाह और जीवन की चुनौतियों पर खुलकर बात की।
पूनम ढिल्लों के अनुसार सफल विवाह के लिए क्या ज़रूरी है?
पूनम ढिल्लों का मानना है कि शादी सिर्फ दो अच्छे लोगों के साथ आने से नहीं चलती। परवरिश, सोच, शिक्षा और जीवन-मूल्यों का मेल होना उतना ही ज़रूरी है — जब ये बातें मेल नहीं खातीं, तो वैवाहिक जीवन कठिन हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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