उपासना सिंह का पूनम ढिल्लो-पद्मिनी कोल्हापुरे पर बड़ा हमला, बोलीं — 'मुझे ऐरा-गैरा कहा गया'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री और सिने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन (सिंटा) की पूर्व महासचिव उपासना सिंह ने 28 अगस्त 2026 को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभिनेत्रियों पूनम ढिल्लो और पद्मिनी कोल्हापुरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि संस्था की बैठकों के दौरान उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और उन्हें 'ऐरा-गैरा' जैसे शब्दों से नवाज़ा गया।
मुख्य घटनाक्रम
उपासना सिंह ने स्पष्ट किया कि सिंटा कार्यकारिणी के 11 सदस्यों के इस्तीफे के बाद कमेटी पूरी तरह भंग हो चुकी है। इस्तीफा देने वाले सदस्यों में अभिनेता मुकेश ऋषि, पुनीत इस्सर और विंदू दारा सिंह शामिल हैं। उपासना और उनका समर्थन कर रहे सदस्यों का आरोप है कि संस्था में बिना किसी सहमति के अकेले फैसले लिए जाते थे और बिना नोटिस दिए पद बदले जाते थे।
अपमान के आरोप
उपासना सिंह ने कहा, 'हमारी बहुत बेइज्जती हुई है। मुझे ऐरा-गैरा कहा गया। मुझसे कहा गया कि तुम एक कैरेक्टर आर्टिस्ट हो और मैं एक स्टार हूं। नीचा दिखाने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया।' उन्होंने यह भी बताया कि पूनम ढिल्लो और पद्मिनी कोल्हापुरे ने उन्हें कैरेक्टर आर्टिस्ट और खुद को स्टार बताकर दोयम दर्जे का महसूस कराया।
दीपक पराशर प्रकरण
उपासना ने अभिनेता दीपक पराशर से जुड़ी एक कथित घटना का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, दीपक पराशर को यह कहकर अपमानित किया गया कि 'तुम्हें अंग्रेजी नहीं आती।' उपासना ने बताया कि सीपी ठाकुर के साथ हुई कथित बदसलूकी के बाद दीपक रोते हुए वहाँ से चले गए और बाद में उन्हें दर्द होने पर अस्पताल ले जाना पड़ा।
उपासना की अपनी बात
उपासना सिंह ने अपनी पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा, 'मैं छोटे से शहर श्यारपुर की लड़की हूं, जिसने जीरो से शुरुआत की थी। आज अगर मुझे पूरी दुनिया में लोग जानते हैं, तो यह मेरे करियर की वजह से है। मैं अपने एक्टर्स और टेक्नीशियनों के लिए, पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए काम करना चाहती हूं।' उन्होंने यह भी कहा कि वे पिछले ढाई सालों से यह सब झेलते आ रहे हैं।
आगे क्या होगा
सिंटा कार्यकारिणी के भंग होने के बाद संस्था के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उपासना सिंह ने संकेत दिया कि वे संस्था के भीतर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आगे भी आवाज़ उठाती रहेंगी। यह विवाद फिल्म उद्योग के भीतर कलाकार संगठनों की कार्यशैली और आंतरिक लोकतंत्र पर बड़े सवाल खड़े करता है।