रक्षाबंधन पर शेखावत का आह्वान: प्रकृति रक्षा का संकल्प लें, खेजरली बलिदान से लें प्रेरणा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 28 अगस्त को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर रक्षाबंधन का पर्व मनाते हुए देशवासियों से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने राजस्थान के ऐतिहासिक खेजरली बलिदान का स्मरण कराते हुए कहा कि प्रकृति की रक्षा भी उतनी ही पवित्र ज़िम्मेदारी है जितनी भाई-बहन का यह बंधन।
मुख्य संदेश: पर्यावरण की राखी
मीडिया से बातचीत में शेखावत ने कहा, 'भारत की सांस्कृतिक विरासत में आज का दिन खास महत्व रखता है। भारतीय ज्ञान-परंपरा ने रक्षाबंधन को केवल भाई-बहन के रिश्ते तक ही सीमित नहीं रखा। समय के साथ इसका महत्व और व्यापक हुआ।' उन्होंने जोड़ा कि भारतीय सभ्यता में प्रकृति से मिलने वाली हर चीज़ को ईश्वरीय मानने की परंपरा रही है, इसलिए इस पर्व पर प्रकृति और पर्यावरण के हर हिस्से की रक्षा का संकल्प भी लेना चाहिए।
खेजरली बलिदान का संदर्भ
केंद्रीय मंत्री ने राजस्थान की धरती पर हुए ऐतिहासिक बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा, 'रक्षाबंधन का पर्व हमें ज़िम्मेदारी के साथ संकल्प लेने का अवसर देता है। 363 माताओं-बहनों ने इसी धरती पर वृक्षों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे।' गौरतलब है कि खेजरली आंदोलन को विश्व का पहला वृक्ष-रक्षा आंदोलन माना जाता है, जो 1730 में हुआ था और जिससे बाद में 'चिपको आंदोलन' जैसे पर्यावरण आंदोलनों को प्रेरणा मिली।
नेपाल बाढ़ और जलवायु चेतावनी
पड़ोसी देश नेपाल में उस समय आई अचानक बाढ़ का संदर्भ देते हुए शेखावत ने कहा, 'आज हम अपने पड़ोसी देश नेपाल में प्रकृति का प्रकोप देख रहे हैं। हम प्रकृति में हो रहे बदलावों की चुनौतियों को महसूस कर रहे हैं।' उन्होंने इसे रक्षाबंधन पर पर्यावरण सुरक्षा की शपथ लेने के एक और कारण के रूप में रेखांकित किया। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में मानसूनी आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।
उत्तर प्रदेश: ब्रजेश पाठक ने भी मनाया पर्व
इसी अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की बहन ने उनके आवास पर उन्हें राखी बाँधी। पाठक ने कहा, 'आज पूरे देश और दुनिया भर में रक्षाबंधन का शुभ त्योहार बहुत खुशी और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। बहनें सुबह से ही अपने भाइयों के घर जाकर यह त्योहार मना रही हैं।' उन्होंने राज्यवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
आगे की दिशा
शेखावत की यह अपील केवल एक त्योहारी संदेश नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सवों को पर्यावरणीय चेतना से जोड़ने की व्यापक कोशिश का हिस्सा प्रतीत होती है। यह देखना बाकी है कि केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय इस दिशा में कोई ठोस नीतिगत कदम उठाता है या यह आह्वान प्रतीकात्मक स्तर पर ही रहता है।