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कांवड़ यात्रा में शिव के मूल्य अपनाएं, नशे से दूर रहें: स्वामी चिदानंद सरस्वती

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कांवड़ यात्रा में शिव के मूल्य अपनाएं, नशे से दूर रहें: स्वामी चिदानंद सरस्वती

सारांश

ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन से स्वामी चिदानंद सरस्वती का कांवड़ यात्रियों को स्पष्ट संदेश — शिव का नशे से कोई नाता नहीं, असली भक्ति है शांति, स्वच्छता और सेवा। 'गंदगी और बंदगी एक साथ नहीं हो सकती' — इस सावन, भीतर के शिव को जागृत करें।

मुख्य बातें

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने 31 जुलाई को ऋषिकेश में कांवड़ यात्रियों का स्वागत किया और शिव के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि भगवान शिव भांग या किसी नशे का सेवन नहीं करते — यह एक सामाजिक भ्रांति है जिसे तोड़ना होगा।
यात्रियों से आग्रह किया कि प्लास्टिक कचरा न फैलाएं , गंगा तट को स्वच्छ रखें और 'यूज़ एंड ग्रो' संस्कृति अपनाएं।
संदेश दिया — नशा छोड़ें और किसी से नफरत न करें ; 'शांति ही शिव है।' कांवड़ यात्रा को सेवा, संस्कार और सामाजिक एकता का माध्यम बनाने का आह्वान किया।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने 31 जुलाई को ऋषिकेश में कांवड़ यात्रियों का स्वागत करते हुए उनसे आग्रह किया कि वे इस पावन यात्रा को भगवान शिव के वास्तविक मूल्यों — शांति, स्वच्छता और सेवा — के साथ पूर्ण करें। उन्होंने नशीले पदार्थों के सेवन को 'भ्रांति' बताते हुए स्पष्ट कहा कि भगवान शिव का नशे से कोई संबंध नहीं है।

शिवत्व का अर्थ: भीतर की यात्रा

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि सावन का यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और यह समय श्रद्धालुओं के लिए अपने भीतर के शिव को जागृत करने का अवसर है। उनके अनुसार, 'शिवत्व का अर्थ है शोर से शांति की यात्रा — यह बाहर की नहीं, भीतर की यात्रा है।' उन्होंने कांवड़ियों से आह्वान किया कि वे 'गप करते हुए नहीं, बल्कि जप करते हुए' यात्रा करें।

प्रकृति संरक्षण का संकल्प

स्वामी ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि जिस भाव से वे गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं, उसी भाव से धरती, नदियों और प्रकृति की भी रक्षा करें। उन्होंने कहा कि 'बोल बम' के नारे के साथ-साथ 'कचरा कम करो' का संकल्प भी लेना होगा। उनका स्पष्ट संदेश था — 'गंदगी और बंदगी एक साथ नहीं हो सकती।' यात्रियों से विशेष रूप से आग्रह किया गया कि वे प्लास्टिक कचरा न फैलाएं और गंगा तट पर पुराने कपड़े न छोड़ें।

नशे की भ्रांति पर सीधा प्रहार

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने समाज में फैली उस धारणा को सीधे खारिज किया जिसमें भगवान शिव को नशे से जोड़ा जाता है। उन्होंने कहा, 'भगवान शिव न भांग पीते हैं और न किसी प्रकार का नशा करते हैं। अगर कोई नशा उनके पास है तो वो राम नाम का है।' उन्होंने यात्रियों को दो संकल्प दिए — नशा छोड़ें और किसी से नफरत न करें। उनके अनुसार, 'नशे से नाश होता है, भक्ति से मुक्ति।'

सामाजिक सद्भाव का आह्वान

स्वामी ने कांवड़ यात्रा को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि यदि यात्रा के दौरान कोई छोटा-मोटा विवाद हो, तो हुड़दंग करने की बजाय शांति बनाए रखें, क्योंकि 'शांति ही शिव है।' उन्होंने जोर दिया कि 'दिलों को दिलों से जोड़ने का काम करें — यही भारत है और यही शिव है।'

यात्रियों के लिए संदेश

परमार्थ निकेतन की ओर से सभी कांवड़ियों का देवभूमि उत्तराखंड में स्वागत करते हुए स्वामी ने कहा कि यह यात्रा 'सेवा, संस्कार और भावों की यात्रा' बनाई जाए। उन्होंने 'यूज़ एंड थ्रो' संस्कृति को त्यागकर 'यूज़ एंड ग्रो' संस्कृति अपनाने का आग्रह किया। उनका संदेश था कि जब यात्री अपने गाँवों और शहरों को लौटें, तो प्रदूषण-मुक्त जीवनशैली का संकल्प साथ ले जाएं।

संपादकीय दृष्टिकोण

हिंसा और नशे की घटनाएं बार-बार सुर्खियां बनती हैं। धार्मिक नेताओं का इस तरह सीधे और स्पष्ट रूप से नशे की भ्रांति को तोड़ना सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह आह्वान जमीनी स्तर तक पहुंचता है। प्रकृति संरक्षण और सामाजिक सद्भाव को धार्मिक यात्रा से जोड़ना एक सकारात्मक दिशा है, परंतु इसके लिए संस्थागत प्रयास और प्रशासनिक सहयोग दोनों आवश्यक हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कांवड़ यात्रियों को क्या संदेश दिया?
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कांवड़ यात्रियों से आग्रह किया कि वे शिव के मूल्यों — शांति, स्वच्छता और सेवा — को अपनाएं, नशे से दूर रहें और प्रकृति की रक्षा करें। उन्होंने यात्रा को 'भीतर की यात्रा' बताते हुए कहा कि 'जप करते हुए आगे बढ़ें, गप नहीं।'
क्या भगवान शिव वाकई नशा करते हैं?
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने इसे सीधे 'भ्रांति' बताया। उनके अनुसार भगवान शिव न भांग पीते हैं और न किसी प्रकार का नशा करते हैं — उनका एकमात्र 'नशा' राम नाम का है। उन्होंने श्रद्धालुओं से इस गलत धारणा को तोड़ने का आह्वान किया।
कांवड़ यात्रा के दौरान पर्यावरण को लेकर क्या अपील की गई?
स्वामी ने यात्रियों से प्लास्टिक कचरा न फैलाने, गंगा तट पर पुराने कपड़े न छोड़ने और 'यूज़ एंड थ्रो' की बजाय 'यूज़ एंड ग्रो' संस्कृति अपनाने का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने कहा कि 'गंदगी और बंदगी एक साथ नहीं हो सकती।'
परमार्थ निकेतन कहाँ स्थित है और इसके अध्यक्ष कौन हैं?
परमार्थ निकेतन उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित एक प्रमुख आध्यात्मिक संस्था है। इसके अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती हैं, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव के लिए भी जाने जाते हैं।
सावन में कांवड़ यात्रा का क्या महत्व है?
सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु गंगाजल लेकर शिव मंदिरों में अभिषेक करने की परंपरा निभाते हैं। स्वामी चिदानंद सरस्वती के अनुसार यह समय भीतर के शिव को जागृत करने और आत्मशुद्धि का सर्वोत्तम अवसर है।
राष्ट्र प्रेस
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