सनातन धर्म पर सुनियोजित हमले हो रहे हैं: बाबा रामदेव का हरिद्वार में बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
योग गुरु बाबा रामदेव ने 28 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि सनातन धर्म के विरुद्ध सुनियोजित और व्यवस्थित ढंग से हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं के बारे में कथित तौर पर गलत और अपमानजनक दावे करके सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। रामदेव के अनुसार यह विमर्श आज का नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
देवी-देवताओं पर झूठे आरोपों का मामला
रामदेव ने कहा कि भगवान राम और माता सीता के विरुद्ध झूठ फैलाया जा रहा है, जबकि भगवान शिव के संबंध में भी कथित रूप से गलत बयानबाज़ी की जा रही है। उन्होंने भगवान कृष्ण की रासलीला की गलत व्याख्या किए जाने और भगवान ब्रह्मा पर लगाए जाने वाले आरोपों पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
उनका कहना था कि एक ओर कुछ लोग हिंदू देवी-देवताओं के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं, और दूसरी ओर उनके निजी जीवन पर आरोप लगाते हैं। रामदेव ने इस रवैये को 'विरोधाभासी और भ्रामक' बताया।
आर्थिक आधार पर देवताओं को बाँटने का प्रयास
रामदेव ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में यह कहा गया कि भगवान राम अमीरों के देवता हैं क्योंकि उन्हें 56 भोग और विशेष सजावट अर्पित की जाती है, जबकि भगवान शिव को गरीबों का देवता बताया जा रहा है। उन्होंने इसे समाज और धर्म में कृत्रिम विभाजन पैदा करने की साज़िश करार दिया।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक परंपराओं, प्राचीन ग्रंथों की व्याख्याओं और सांस्कृतिक पहचान को लेकर सार्वजनिक बहस तेज़ है।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: मुगल काल से लेकर आज तक
रामदेव ने दावा किया कि पिछले लगभग एक हजार वर्षों में — मुगल काल और ब्रिटिश शासन के दौरान — सनातन धर्म के विरोधियों ने धर्मग्रंथों में बदलाव कर और गलत व्याख्याएँ जोड़कर धर्म को बदनाम करने का प्रयास किया। उनके अनुसार यह सिलसिला आज भी जारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर में सनातन धर्म के 150 करोड़ से अधिक अनुयायी हैं, और यदि अखंड भारत की अवधारणा को जोड़ा जाए तो यह संख्या 200 करोड़ से अधिक हो सकती है।
आर्य आक्रमण सिद्धांत को किया खारिज
रामदेव ने आर्य आक्रमण या आर्य प्रवास सिद्धांत को सिरे से नकारते हुए कहा कि आर्य बाहर से भारत नहीं आए। उनका कहना था कि अपनी विश्व यात्राओं के अनुभव के आधार पर उन्हें यह लगा कि भारत के लोग ज्ञान, रोज़गार और व्यापार के लिए अन्य देशों में गए, न कि इसके विपरीत।
उन्होंने स्पष्ट किया: 'आर्यों और द्रविड़ों के बीच किसी प्रकार का संघर्ष नहीं था।' रामदेव ने आरोप लगाया कि 'मूल निवासी' की अवधारणा और ब्राह्मण-विरोधी नारेबाज़ी जैसे मुद्दों का इस्तेमाल समाज को बाँटने के लिए किया जाता है।
मुस्लिम समुदाय पर टिप्पणी और व्यापक संदर्भ
रामदेव ने भारत के मुस्लिम समुदाय की पृष्ठभूमि पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि कई मुसलमान स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि उनके पूर्वज हिंदू परंपराओं का पालन करते थे। यह टिप्पणी धार्मिक और सामाजिक पहचान से जुड़ी चल रही राष्ट्रीय बहस के बीच आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान भारत के सांस्कृतिक इतिहास और सामाजिक ताने-बाने पर जारी व्यापक विमर्श का हिस्सा हैं, जहाँ अलग-अलग पक्ष अपनी-अपनी ऐतिहासिक व्याख्याएँ प्रस्तुत करते हैं।