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सनातन धर्म पर सुनियोजित हमले हो रहे हैं: बाबा रामदेव का हरिद्वार में बड़ा बयान

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सनातन धर्म पर सुनियोजित हमले हो रहे हैं: बाबा रामदेव का हरिद्वार में बड़ा बयान

सारांश

बाबा रामदेव ने हरिद्वार में बड़ा बयान देते हुए कहा कि सनातन धर्म पर सुनियोजित हमले हो रहे हैं — राम को अमीरों और शिव को गरीबों का देवता बताकर विभाजन की कोशिश हो रही है। आर्य आक्रमण सिद्धांत को नकारते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय बाहर गए, कोई बाहर से नहीं आया।

मुख्य बातें

बाबा रामदेव ने 28 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में कहा कि सनातन धर्म के विरुद्ध सुनियोजित और व्यवस्थित हमले किए जा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान राम को अमीरों और भगवान शिव को गरीबों का देवता बताकर समाज में कृत्रिम विभाजन पैदा किया जा रहा है।
रामदेव ने आर्य आक्रमण सिद्धांत को खारिज किया और कहा कि आर्यों व द्रविड़ों के बीच कोई संघर्ष नहीं था।
उनके अनुसार दुनिया भर में सनातन धर्म के 150 करोड़ से अधिक अनुयायी हैं, जो अखंड भारत की अवधारणा के साथ 200 करोड़ से अधिक हो सकते हैं।
रामदेव ने पिछले एक हजार वर्षों — मुगल काल और ब्रिटिश शासन — में धर्मग्रंथों में बदलाव कर धर्म को बदनाम करने के प्रयासों का उल्लेख किया।

योग गुरु बाबा रामदेव ने 28 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि सनातन धर्म के विरुद्ध सुनियोजित और व्यवस्थित ढंग से हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं के बारे में कथित तौर पर गलत और अपमानजनक दावे करके सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। रामदेव के अनुसार यह विमर्श आज का नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

देवी-देवताओं पर झूठे आरोपों का मामला

रामदेव ने कहा कि भगवान राम और माता सीता के विरुद्ध झूठ फैलाया जा रहा है, जबकि भगवान शिव के संबंध में भी कथित रूप से गलत बयानबाज़ी की जा रही है। उन्होंने भगवान कृष्ण की रासलीला की गलत व्याख्या किए जाने और भगवान ब्रह्मा पर लगाए जाने वाले आरोपों पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

उनका कहना था कि एक ओर कुछ लोग हिंदू देवी-देवताओं के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं, और दूसरी ओर उनके निजी जीवन पर आरोप लगाते हैं। रामदेव ने इस रवैये को 'विरोधाभासी और भ्रामक' बताया।

आर्थिक आधार पर देवताओं को बाँटने का प्रयास

रामदेव ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में यह कहा गया कि भगवान राम अमीरों के देवता हैं क्योंकि उन्हें 56 भोग और विशेष सजावट अर्पित की जाती है, जबकि भगवान शिव को गरीबों का देवता बताया जा रहा है। उन्होंने इसे समाज और धर्म में कृत्रिम विभाजन पैदा करने की साज़िश करार दिया।

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक परंपराओं, प्राचीन ग्रंथों की व्याख्याओं और सांस्कृतिक पहचान को लेकर सार्वजनिक बहस तेज़ है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: मुगल काल से लेकर आज तक

रामदेव ने दावा किया कि पिछले लगभग एक हजार वर्षों में — मुगल काल और ब्रिटिश शासन के दौरान — सनातन धर्म के विरोधियों ने धर्मग्रंथों में बदलाव कर और गलत व्याख्याएँ जोड़कर धर्म को बदनाम करने का प्रयास किया। उनके अनुसार यह सिलसिला आज भी जारी है।

उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर में सनातन धर्म के 150 करोड़ से अधिक अनुयायी हैं, और यदि अखंड भारत की अवधारणा को जोड़ा जाए तो यह संख्या 200 करोड़ से अधिक हो सकती है।

आर्य आक्रमण सिद्धांत को किया खारिज

रामदेव ने आर्य आक्रमण या आर्य प्रवास सिद्धांत को सिरे से नकारते हुए कहा कि आर्य बाहर से भारत नहीं आए। उनका कहना था कि अपनी विश्व यात्राओं के अनुभव के आधार पर उन्हें यह लगा कि भारत के लोग ज्ञान, रोज़गार और व्यापार के लिए अन्य देशों में गए, न कि इसके विपरीत।

उन्होंने स्पष्ट किया: 'आर्यों और द्रविड़ों के बीच किसी प्रकार का संघर्ष नहीं था।' रामदेव ने आरोप लगाया कि 'मूल निवासी' की अवधारणा और ब्राह्मण-विरोधी नारेबाज़ी जैसे मुद्दों का इस्तेमाल समाज को बाँटने के लिए किया जाता है।

मुस्लिम समुदाय पर टिप्पणी और व्यापक संदर्भ

रामदेव ने भारत के मुस्लिम समुदाय की पृष्ठभूमि पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि कई मुसलमान स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि उनके पूर्वज हिंदू परंपराओं का पालन करते थे। यह टिप्पणी धार्मिक और सामाजिक पहचान से जुड़ी चल रही राष्ट्रीय बहस के बीच आई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान भारत के सांस्कृतिक इतिहास और सामाजिक ताने-बाने पर जारी व्यापक विमर्श का हिस्सा हैं, जहाँ अलग-अलग पक्ष अपनी-अपनी ऐतिहासिक व्याख्याएँ प्रस्तुत करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक लंबे सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा है जिसमें सनातन धर्म की राजनीतिक और सांस्कृतिक परिभाषा को लेकर खींचतान जारी है। राम-शिव को आर्थिक वर्गों से जोड़ने वाली व्याख्याएँ निश्चित रूप से विवादास्पद हैं, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बात को चूक जाती है कि ऐसे बयान धार्मिक एकता के साथ-साथ वोट-बैंक की राजनीति को भी प्रभावित करते हैं। आर्य प्रवास सिद्धांत पर रामदेव की स्थिति मुख्यधारा के पुरातात्विक और आनुवंशिक शोध से अलग है — इस असहमति को संदर्भ दिए बिना रिपोर्ट करना पाठक के साथ अन्याय होगा। असली सवाल यह है कि क्या ऐसे बयान सामाजिक सद्भाव की दिशा में जाते हैं या उस विभाजन को और गहरा करते हैं जिसे रामदेव खुद रोकने की बात करते हैं।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबा रामदेव ने सनातन धर्म पर हमलों को लेकर क्या कहा?
बाबा रामदेव ने 28 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में कहा कि सनातन धर्म के विरुद्ध सुनियोजित और व्यवस्थित तरीके से हमले हो रहे हैं। उनके अनुसार हिंदू देवी-देवताओं के बारे में कथित तौर पर गलत और अपमानजनक दावे करके धर्म को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
रामदेव ने भगवान राम और शिव को लेकर क्या आरोप लगाया?
रामदेव ने आरोप लगाया कि भगवान राम को '56 भोग और विशेष सजावट' के कारण अमीरों का देवता और भगवान शिव को गरीबों का देवता बताया जा रहा है। उन्होंने इसे समाज और धर्म में कृत्रिम विभाजन पैदा करने की साज़िश करार दिया।
आर्य आक्रमण सिद्धांत पर रामदेव का क्या मत है?
रामदेव ने आर्य आक्रमण या आर्य प्रवास सिद्धांत को खारिज करते हुए कहा कि आर्य बाहर से भारत नहीं आए, बल्कि भारत के लोग ज्ञान, रोज़गार और व्यापार के लिए दूसरे देशों में गए। उन्होंने यह भी कहा कि आर्यों और द्रविड़ों के बीच किसी प्रकार का संघर्ष नहीं था।
रामदेव के अनुसार सनातन धर्म के अनुयायियों की संख्या कितनी है?
रामदेव ने दावा किया कि दुनिया भर में सनातन धर्म के 150 करोड़ से अधिक अनुयायी हैं। उनके अनुसार अखंड भारत की अवधारणा को जोड़ा जाए तो यह संख्या 200 करोड़ से अधिक हो सकती है।
रामदेव ने ऐतिहासिक संदर्भ में सनातन धर्म को कैसे देखा?
रामदेव ने आरोप लगाया कि पिछले लगभग एक हजार वर्षों में — मुगल काल और ब्रिटिश शासन के दौरान — धर्मग्रंथों में बदलाव कर और गलत व्याख्याएँ जोड़कर सनातन धर्म को बदनाम करने के प्रयास हुए। उन्होंने कहा कि 'मूल निवासी' की अवधारणा और ब्राह्मण-विरोधी नारेबाज़ी जैसे मुद्दों का इस्तेमाल भी समाज को बाँटने के लिए किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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