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रेवंत रेड्डी का राम-शिव बयान: भाजपा ने लगाया हिंदुओं को बांटने का आरोप

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रेवंत रेड्डी का राम-शिव बयान: भाजपा ने लगाया हिंदुओं को बांटने का आरोप

सारांश

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भगवान शिव को 'गरीबों के देवता' और राम को 'अमीरों के देवता' बताया — साथ ही उत्तर-दक्षिण धार्मिक पहचान पर तीखा बयान दिया। भाजपा ने इसे 'हिंदुओं को बांटने की चाल' कहकर पलटवार किया। यह विवाद द्रविड़ बनाम आर्य पहचान की उस राजनीतिक लड़ाई का नया अध्याय है जो दक्षिण भारत में भाजपा के विस्तार के साथ तेज़ हुई है।

मुख्य बातें

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने नई दिल्ली में एक मीडिया कार्यक्रम में भगवान शिव को 'गरीबों के देवता' और भगवान राम को 'अमीरों के देवता' बताया।
रेड्डी ने यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेता मंच पर 'हर हर महादेव' का नारा क्यों नहीं लगाते।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने बयान को 'वोट बैंक की राजनीति' और 'हिंदुओं को बांटने की चाल' करार दिया।
भंडारी ने आरोप लगाया कि रेड्डी ने यह बयान राहुल गांधी के कहने पर दिया।
भाजपा ने कांग्रेस का 2018 में 'हर हर महादेव' नारे पर तीन कार्यकर्ताओं को सस्पेंड करने का मामला भी उठाया।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के भगवान राम और भगवान शिव को लेकर दिए एक बयान ने 29 सितंबर 2026 को देशव्यापी राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। नई दिल्ली में एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान रेड्डी ने उत्तर और दक्षिण भारत की धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान के बीच अंतर रेखांकित किया, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

रेड्डी ने क्या कहा

मुख्यमंत्री रेड्डी ने कार्यक्रम में कहा, 'हम द्रविड़ हैं। यहाँ (उत्तर भारत में) लोग आर्य हैं। हम शिव के भक्त हैं, जबकि यहाँ के लोग भगवान राम के भक्त हैं। भाजपा ने राम को हथिया लिया। यह एक भावना है, एक जज्बात है। पीएम मोदी 'हर हर महादेव' क्यों नहीं कहते?'

रेड्डी ने यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री और भाजपा के अन्य नेता मंच से 'हर हर महादेव' का उद्घोष क्यों नहीं करते, जबकि 'जय श्री राम' का नारा नियमित रूप से लगाते हैं। उन्होंने भगवान शिव को 'गरीबों के देवता' और भगवान राम को 'अमीरों के देवता' भी बताया — साथ ही यह स्पष्ट किया कि दोनों की पूजा होती है।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने रेड्डी के बयान को 'हिंदुओं को बांटने की बुरी चाल' करार दिया। सोशल मीडिया पर भंडारी ने आरोप लगाया कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने यह बयान कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के कहने पर दिया और इसका उद्देश्य 'वोट बैंक की राजनीति' है।

भंडारी ने कांग्रेस पार्टी को 'मॉडर्न मुस्लिम लीग कांग्रेस' तक कह दिया और दावा किया कि पार्टी के नेता 'भगवान राम और भगवान शिव के मानने वालों के बीच हिंदुओं को बांटने में कामयाब नहीं होंगे।'

भंडारी का ऐतिहासिक संदर्भ

भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस के अतीत का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी ने सोमनाथ मंदिर के निर्माण और काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का विरोध किया था। उन्होंने यह भी कहा कि 2018 में 'हर हर महादेव' का नारा लगाने पर कांग्रेस ने अपने तीन कार्यकर्ताओं को सस्पेंड कर दिया था।

रेड्डी के इस सुझाव को खारिज करते हुए कि भाजपा नेता 'हर हर महादेव' नहीं कहते, भंडारी ने तर्क दिया: 'पीएम मोदी ही एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो 'जय श्री राम' और 'हर हर महादेव' दोनों कहते हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि रामायण के लंकाकांड में भगवान राम ने लंका जाने से पहले स्वयं महादेव की पूजा की थी।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर-दक्षिण राजनीतिक विभाजन और द्रविड़ बनाम आर्य पहचान का विमर्श राष्ट्रीय राजनीति में तेज़ हो रहा है। गौरतलब है कि तेलंगाना में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) सत्ता में है और रेड्डी का यह बयान दक्षिण भारत में भाजपा की बढ़ती पैठ के खिलाफ राजनीतिक विमर्श को नया आकार देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक उपकरण बनाने का काम करते हैं, चाहे वे किसी भी दल की ओर से आएँ। आगे देखना होगा कि क्या कांग्रेस इस बयान से दूरी बनाती है या रेड्डी के तर्क का समर्थन करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे दिल्ली के मंच से उठाना स्पष्ट संकेत है कि कांग्रेस इसे राष्ट्रीय एजेंडे पर लाना चाहती है। विडंबना यह है कि भाजपा जिस 'बांटने की राजनीति' का आरोप लगाती है, उसी के प्रतिउत्तर में वह भी धार्मिक प्रतीकों की चुनावी व्याख्या करने लगती है। मुख्यधारा की कवरेज जो नज़रअंदाज़ करती है वह यह है कि शिव-राम का यह कथित विभाजन ऐतिहासिक रूप से तथ्यसम्मत नहीं है — दक्षिण भारत में रामभक्ति की गहरी परंपरा रही है — और इसीलिए यह बयान राजनीतिक रूप से जोखिम भरा भी है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेवंत रेड्डी ने राम और शिव को लेकर क्या बयान दिया?
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने नई दिल्ली में एक मीडिया कार्यक्रम में भगवान शिव को 'गरीबों के देवता' और भगवान राम को 'अमीरों के देवता' बताया। उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण भारत के लोग शिव भक्त हैं जबकि उत्तर भारत के लोग राम भक्त हैं, और सवाल उठाया कि भाजपा नेता 'हर हर महादेव' का नारा मंच पर क्यों नहीं लगाते।
भाजपा ने रेवंत रेड्डी के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इसे 'हिंदुओं को बांटने की बुरी चाल' और 'वोट बैंक की राजनीति' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बयान राहुल गांधी के इशारे पर दिया गया और दावा किया कि पीएम मोदी दोनों नारे — 'जय श्री राम' और 'हर हर महादेव' — लगाते हैं।
भाजपा ने कांग्रेस के किस पुराने विवाद का ज़िक्र किया?
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने याद दिलाया कि 2018 में कांग्रेस ने 'हर हर महादेव' नारा लगाने पर अपने तीन कार्यकर्ताओं को सस्पेंड कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने सोमनाथ मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का विरोध किया था।
यह विवाद राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भाजपा दक्षिण भारत में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है और कांग्रेस द्रविड़ पहचान की राजनीति को राष्ट्रीय विमर्श में लाना चाहती है। उत्तर-दक्षिण सांस्कृतिक विभाजन का यह विमर्श 2024 के बाद से तेज़ हुआ है।
क्या रेड्डी ने भगवान राम और शिव की पूजा से इनकार किया?
नहीं, रेड्डी ने स्पष्ट किया कि दोनों देवताओं की पूजा होती है। उनका बयान धार्मिक आस्था को नकारने के बजाय उत्तर-दक्षिण की राजनीतिक-सांस्कृतिक पहचान के अंतर को रेखांकित करने के संदर्भ में आया, हालाँकि भाजपा ने इसकी व्याख्या धार्मिक विभाजन की कोशिश के रूप में की।
राष्ट्र प्रेस
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